
?कार्तिक मास कृष्णपक्ष चतुर्थी संकष्टी चतुर्थी व्रत –करक चतुर्थी ☝️
?प्रचीन हनुमान मंदिर मुकेरिपुरा इंदौर ।पं बद्रीप्रसाद जी पुजारी ज्योतिष संस्थान ✌संस्थापक स्व. पं राधेश्याम जी शर्मा ?
? कार्तिक मास कृष्णपक्ष चतुर्थी संकष्टी चतुर्थी व्रत-4—11— 2020 बुधवार ।
?पूर्ण चतुर्थी तिथि मे व्रत योग ?
?बुधवार व चतुर्थी का महापर्व संयोग —- ?
? मृगशिरा नक्षत्र मे चतुर्थी व्रत– नक्षत्र स्वामी मंगल ग्रह तिथि स्वामी गणेश जी ।
? शिव योग मे करक चतुर्थी योग ?
?मिथुन राशि मे चंद्रोदय मिथुन राशि के स्वामी बुध ?
? बुधवार पर मृगशिरा नक्षत्र होने से सर्वाथ सिद्धी योग भी है ।
?करक चतुर्थी का उघापन करने वाले उघापन विधि कर सकते है । किसी प्रकार से तारा अस्त व अन्य दोष नही है ।
ॐ.. चंद्रोदय ?रात्रि – 8-32 मिनट पर ।
? वामन पुराण के अनुसार करक चतुर्थी पर सूर्योदय से पूर्व उठकर व्रत करने वाले संकटनाशी व्रत के दिन पंचगव्य का पान करें स्नान करके संकल्प करना चाहिए
मम सुख सौभाग्य पुत्र-पौत्रादि सुस्थिर श्री प्राप्तये करक चतुर्थी व्रतमहं करिष्ये।”
?पूर्ण दिवस निराहार रहकर भगवत स्मरण कीर्तन करके सायं काल मे पुन स्नान करके
संध्या काल प्रदोष काल मे सायं काल 5-44 से
– गणेश जी गौरी कार्तिकेय भगवान शिव जी का चतुर्थी देवी का पूजन अभिषेक पूजा अर्चना करना चाहिए । फिर
?गणेश जी चतुर्थी देवी को अर्घ देना चाहिए–
गणेशाय नमस्तुभ्यं सर्वसिद्धिप्रदायक।
संकष्टहर मे देव गृहाणार्घ्य नमोस्तु ते।।
कृष्णपक्षे चतुर्थ्यां तु सम्पूजित विधूदये।
क्षिप्रं प्रसीद देवेश गृहाणार्घ्यं नमोस्तुते।।
?चतुर्थी देवी को भी अर्घ प्रदान करे।
तिथिनामुत्तमे देवि गणेशप्रियवल्लभे।
सर्वसंकटनाशाय गृहाणार्घ्य नमोस्तुते।।
चतुर्थ्यै नमः इदमअर्घ्यं समर्पयामि।
संसारपीडाव्यथितं हि मां सदा संकष्टभूतं सुमुख प्रसीद।
त्वं त्रहि मां मोचय कष्टसंघान्नमो नमो विघ्ननाशनाय।।
?चंद्रोदय रात्रि 8-32 पर चंद देव के दर्शन करके पूजा करे । चंद देव को कच्चे गाय के दूध मे अर्घ तैयार करके अर्घ दे ।
छांदोग्य उपनिषद् के अनुसार चंद्रमा में पुरुष रूपी ब्रह्मा की उपासना करने से सारे पाप नष्ट हो जाते हैं।
गगनार्णवमाणिक्य चन्द्र दाक्षायणीपते।
गृहाणार्घ्य मया दत्तं गणेशप्रतिरूपक।।
नमस्ते मास मासान्ते ,जायमान पुनः पुनः ।
गृहाणाअर्घ श्शांक त्वं. , रोहिण्या सहितो मम्।।
?पुन भगवान शिवजी गौरी की आरती करके पति परिवार संतान की दीर्घायु की कामना कर ।
‘नमस्त्यै शिवायै शर्वाण्यै सौभाग्यं संतति शुभा।
प्रयच्छ भक्तियुक्तानां नारीणां हरवल्लभे।’
?फिर करक मिट्टी के करवे से जल ग्रहण करके व्रत का पारणा करे । माता पिता पति व सभी परिवार जनो से आशीर्वाद लेकर भोजन प्रसाद कराकर स्वयं को पारणा करना चाहिए ।
?इस व्रत को करने से संकट दूर होता हैं. इस व्रत को करने के फल-स्वरूप सौभाग्य पति स्नेह पुत्र की प्राप्ति होती है .
?श्रीगणेश जी समस्त विघ्नों का नाश करने वाले, विद्या, बुद्धि, संपन्नता व समस्त कामनाओं की पूर्ति करने वाले हैं।
?- शंकरजी त्रिपुर दैत्य को जीतने के लिए, भगवान श्रीविष्णु ने बलि को बांधने के लिए, ब्रह्मा ने सृष्टि निर्माण के लिए, शेषजी पृथ्वी धारण के लिए, दुर्गाजी ने महिषासुर वध के समय, सिद्ध लोग अपनी सिद्धि के लिए व कामदेव ने विश्व विजय के लिए सर्वप्रथम गणेशजी का ध्यान और पूजन किया था-
? ‘चैतुं यस्त्रिपुरं हरेण हरिणा व्याजाद्बलिं बध्नता। स्रष्टं वादिभवोद् भवेन भुवनं शेषेण धर्तु धराम।
पार्वत्या महिषासुर प्रथमने सिद्धाधिपै: सिद्धये। ध्यत: पञ्चशरेण विश्व विजये पापात्स नागानन:।।
?इस महापर्व व शुभ संयोग पर — तीर्थ स्नान तर्पण पूजन हवन गौ सेवा जरूर करे । अपने इष्ट देव की आराधना करे । मंगल बुध ग्रह की शुभता हेतु पूजा जप दान हैतु अनुष्ठान करे । हनुमान जी को चौला श्रृंगार भोग आरती करे।
✌आप भी इस महापर्व का पुण्य लाभ ले ?
?मंदिर पुजारी पं राजाराम शर्मा 9826057023
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