धीरेंद्र शास्त्री के मंच पर अंग्रेज़ी अंदाज़ और नारियल कला का जलवा; उधर ताड़ी की तारीफ, ‘अभिनंदन’ विवाद और मामा के सीएम न बन पाने का छलका दर्द सुर्खियों में

धीरेंद्र शास्त्री ने बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र शास्त्री की पदयात्रा 2.0 का विश्राम हो गया है। 10 दिन तक चली इस यात्रा में पंडित धीरेंद्र शास्त्री हास-परिहास कर पदयात्रियों का उत्साह बढ़ाते रहे। उनके मंच पर कई कलाकारों ने अपनी प्रतिभा दिखाई।

धीरेंद्र शास्त्री की पदयात्रा का एक ऐसा ही वीडियो सामने आया है। जिसमें वे एंकर बन गए। उन्होंने जो अंग्रेजी बोली, उसे सुनकर पंडाल में मौजूद हर कोई हंस-हंसकर लोटपोट हो गया।

यात्रा में एक शख्स ने अपने सिर, कोहनी से नारियल फोड़ने की कला का प्रदर्शन किया। इस दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने किसी शो की तरह इस प्रदर्शन को देखने का ऐलान किया। मंच पर एक विदेशी नागरिक भी बैठा रहा। धीरेंद्र शास्त्री ने रोचक अंदाज में उससे अंग्रेजी में बात की।

पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने कहा- यू लाइव वॉच इंडियन गॉट टैलेंट। फिर जमकर हंसे। उन्होंने नारियल को लेकर कहा- शी इज द कोकोनट, वेरी स्ट्रॉन्ग कोकोनट। पास में बैठे विदेशी नागरिक से कहा- यू चेक, वेरी स्ट्रॉन्ग। फिर उन्होंने पूछा- दिस मेन इज स्ट्रॉन्ग या कोकोनट स्ट्रॉन्ग? इस पर जमकर ठहाके लगे।

धीरेंद्र शास्त्री ने जैसे ही 1,2,3.. स्टार्ट बोला, युवक ने सिर से नारियल फोड़ने शुरू कर दिए। इस पर जमकर तालियां बजीं।

धीरेंद्र शास्त्री के सामने एक कलाकार ने अपने सिर से नारियल फोड़ने का प्रदर्शन किया।

ताड़ी की तारीफ में खो गए सीएम यादव भगवान बिरसा मुंडा की जयंती पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आलीराजपुर पहुंचे थे। जहां उन्होंने जिले की प्राकृतिक सुंदरता की जमकर तारीफ की। इस दौरान वो वहां की ‘ताड़ी’ के आनंद में भी डूबे नजर आए।

मुख्यमंत्री ने मंच से कहा- यहां ताड़ी के पेड़ का आनंद भी अलग ही है। लोग पता नहीं क्या-क्या कहते हैं लेकिन जो मजे लेता है, वो तो उससे ही पूछो कि क्या होता है। जिसके मन में जो भाव हो, लेकिन आनंद आता है। मैं तो आपको देखकर ही खुश हो जाता हूं।

सीएम डॉ. मोहन यादव ने आलीराजपुर में ताड़ी की जमकर तारीफ की।

जीतू पटवारी को मोहन यादव का जवाब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के भाषण के अंदाज पर, उनके बार-बार ‘अभिनंदन करो’, ‘तालियां बजाओ’ कहने पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने उन्हें ‘अभिनंदन मुख्यमंत्री’ का नाम दिया था।

मुख्यमंत्री ने शाजापुर जिले के मक्सी में इसे लेकर जीतू पटवारी पर पलटवार किया है। उन्होंने मंच से ही कहा- हमारे कांग्रेस के अध्यक्ष को, जब मैं ताली बजाने को बोलता हूं, अभिनंदन करने का बोलता हूं, तो उनको कीड़ा काटता है, ये क्यों बोलते हो, ये क्यों बोलते हो।

मुख्यमंत्री यहीं नहीं रुके, उन्होंने जीतू पटवारी को लेकर ढपोरशंख की कहानी सुना दी। मुख्यमंत्री ने पटवारी के नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए कहा कि कांग्रेस गर्त में जा रही है। उनके खिलाफ उनकी पार्टी में ही आंदोलन हो रहे हैं।

सीएम ने जीतू पटवारी को लेकर कहा- कोई बात नहीं भैया तू बोलता रह, तू ढपोरशंख की भूमिका निभा ले, हम तो भक्त की भूमिका में ही खुश हैं।

अभिनंदन मुख्यमंत्री’ कहने पर सीएम डॉ. मोहन यादव ने जीतू पटवारी को जवाब दिया।

फिर छलका शिवराज सिंह चौहान का दर्द मध्य प्रदेश में साल 2023 के चुनाव में भाजपा की बड़ी जीत हुई थी, लेकिन पार्टी ने सीएम के रूप में शिवराज सिंह चौहान को रिपीट नहीं किया। मुख्यमंत्री पद के लिए डॉ. मोहन यादव का नाम तय किया गया।

लगता है कि शिवराज सिंह को इसका अब भी मलाल है। उनका ये दर्द फिर छलक आया। इसका जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उस दौरान उनके माथे पर कोई बल नहीं आया। वो हालात उनके लिए किसी परीक्षा के जैसे थे।

भोपाल में किरार समाज के कार्यक्रम में बोलते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा, ‘2023 के विधानसभा चुनाव के बाद की परिस्थितियां जीवन की बड़ी परीक्षा थीं। बंपर बहुमत मिला था। सबको लगा था कि अब सब कुछ स्वाभाविक है, लेकिन जब तय हुआ कि मुख्यमंत्री मोहन जी होंगे। मेरे माथे पर बल नहीं पड़ा।’

उन्होंने कहा, ‘अलग-अलग रिएक्शन हो सकते थे। गुस्सा भी आ सकता था कि मैंने इतनी मेहनत की, लोगों ने किसे वोट दिया? लेकिन दिल ने कहा- शिवराज, ये तेरी परीक्षा की घड़ी है। माथे पर शिकन मत आने देना। आज तू कसौटी पर कसा जा रहा है। और मैंने मोहन जी का नाम प्रस्तावित किया। यही परीक्षा होती है। उसके बाद मुझे प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में दिल्ली में काम करने का मौका मिला।’

कांग्रेस अब इस पर तंज कस रही है। पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने कहा- शिवराज सिंह चौहान ने बिल्कुल सही कहा। भाजपा ने उन्हें दूल्हा बनाया, घोड़ी पर बैठाकर खूब घुमाया और चुनाव परिणाम आने के बाद घोड़ी पर मोहन यादव को बैठा दिया।

सीएम नहीं बन पाने को लेकर शिवराज सिंह का दर्द एक बार फिर छलक उठा।

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