जयपुरिया स्कूल प्रोजेक्ट में पार्टनरशिप न देने से विवाद ने खोला काली कमाई के राज, सौरभ पर शिकंजा कसने में दोस्त शरद जायसवाल का रोल — देखें VIDEO

परिवहन विभाग के पूर्व कॉन्स्टेबल सौरभ शर्मा की काली कमाई को बेनकाब करने में उसके सबसे बड़े राजदार दोस्त शरद जायसवाल का अहम रोल सामने आ रहा है। वजह ये है कि शरद ही सौरभ का पूरा कारोबार संभालता था, लेकिन शाहपुरा के निर्माणाधीन जयपुरिया स्कूल के प्रोजेक्ट में सौरभ ने शरद को पार्टनरशिप देने से इनकार कर दिया।

सौरभ ने मां उमा शर्मा को चेयरपर्सन बनाया और पत्नी दिव्या को डायरेक्टर, लेकिन शरद को कोई जगह नहीं मिली। इस बात काे लेकर दोनों में अनबन शुरू हो गई थी। 19 दिसंबर 2024 को जिस दिन लोकायुक्त ने सौरभ के अरेरा कॉलोनी स्थित मकान पर छापेमारी की, उस दिन सौरभ और उसकी पत्नी दिव्या दुबई में थे।

सौरभ ने दूसरे मकान में खड़ी कार में सोना और नकद रखवाकर उसे वहां से निकलवा दिया। लोकायुक्त को भले ही उसकी भनक नहीं लगी, लेकिन इनकम टैक्स अधिकारियों को उस कार की परफेक्ट लोकेशन मिल गई।

जांच से जुड़े सूत्रों का कहना है कि सौरभ के किसी बड़े राजदार ने ही वो लोकेशन बताई थी। ये कार मेंडोरी के एक फॉर्म हाउस के बाहर मिली थी। इनकम टैक्स अधिकारियों ने इस कार से 52 किलो सोना और 11 करोड़ रुपए नकद बरामद किए थे। ये कार सौरभ के दोस्त चेतन सिंह गौर के नाम रजिस्टर्ड है।

शरद पर इसलिए उठ रहे सवाल…

जेल में भी अलग-अलग बैरक में रखा गया है

भोपाल जेल में भी सौरभ, शरद और चेतन को अलग-अलग बैरकों में रखा गया है। वजह ये है कि तीनों के बीच अब पहले जैसे रिश्ते नहीं रहे। लोकायुक्त की पूछताछ में शरद और चेतन ने साफ कह दिया है कि वे तो सिर्फ कर्मचारी हैं। जेल अधीक्षक राकेश बांगरे का कहना है कि ये हाईप्रोफाइल केस है। तीनों ही आरोपियाें को अलग-अलग सेल में रखा गया है।

इस बात का भी ध्यान रखा गया है कि जब वे सेल से बाहर निकलेंगे, तब भी उन पर सीसीटीवी कैमरे से पूरी निगरानी रहे। तीनों आरोपी किन लोगों से मिल रहे हैं, कौन उनसे मुलाकात के लिए आ रहा है, इस पर भी नजर रखी जाएगी।

बांगरे ने बताया कि जेल में दाखिल करने से पहले तीनों का मेडिकल चेकअप कराया गया था। तीनों फिट हैं इसलिए जेल अस्पताल में भेजने का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता।

कठघरे में मां के कान में फुसफुसाता रहा सौरभ

4 फरवरी को जब तीनों आरोपियों को लोकायुक्त ने कोर्ट में पेश किया तो कोर्ट रूम के कठघरे में सौरभ अपनी मां उमा शर्मा से फुसफुसाकर बातचीत करता दिखा। शरद भी अपने रिश्तेदारों से धीरे-धीरे बात करता नजर आया। आरोपियों की आपस में कोई बातचीत नजर नहीं आई।

ऐसे ही उमा शर्मा और शरद की भांजी व बहन के बीच भी कोई बातचीत नजर नहीं आई। यहां तक की तीनों के वकील भी अलग-अलग हैं। छापे से पहले तीनों एक थे, लेकिन अब उनके एडवोकेट भी अलग होने से ये कयास लगाए जा रहे हैं कि अब उनके रिश्ते मुश्किल दौर में हैं।

लोकायुक्त की टीम सौरभ, चेतन और शरद को दो गाड़ियों में कोर्ट लेकर पहुंची थी।

न 52 किलो सोने का सच सामने आया, न अविरल कंस्ट्रक्शन की प्रॉपर्टी

लोकायुक्त ने 29 जनवरी को सौरभ को भोपाल से गिरफ्तार किया था। इसके बाद उसी दिन चेतन और शरद को भी हिरासत में ले लिया। 4 फरवरी तक लोकायुक्त पुलिस ने उनसे पूछताछ की। लेकिन कोई बड़ा खुलासा नहीं हुआ। लोकायुक्त पुलिस पूरे समय तीनों आरोपियों के सुरक्षा प्रोटोकाॅल पर ज्यादा फोकस करती रही। हर दिन मेडिकल जांच कराई गई, लेकिन टीम सौरभ से ये नहीं उगलवा पाई कि आखिर इतना पैसा कहां से आया?

लोकायुक्त अधिकारियों ने ये भी कहा कि उनकी जांच का फोकस सिर्फ सौरभ की 7 साल की नौकरी में हासिल की गई प्रॉपर्टी है। इस दौरान कमाई गई काली कमाई का उसने कहां-कहां निवेश किया? अविरल कंस्ट्रक्शन नाम की जिस कंपनी के नाम पर सौरभ ने कई शहरों में प्रॉपर्टी खरीदी है, उसके लिए पैसा कहां से आया, ये भी बहुत स्पष्ट नहीं हो सका है।

शरद और चेतन सारा इन्वेस्टमेंट सौरभ का बता रहे हैं, लेकिन सौरभ कह रहा है कि जिसकी प्रॉपर्टी है, उससे पूछिए।

सबसे अहम सवालों पर टालमटोल वाले जवाब…

52 किलो सोना और 11 करोड़ कैश किसका है?

सौरभ ने कहा कि ये कैश और सोना मेरा नहीं है। न तो गाड़ी मेरी है। न वो फॉर्म हाउस मेरा है।

चेतन ने कहा कि गाड़ी भले ही मेरे नाम से है, लेकिन इस्तेमाल सौरभ करता है। इसकी किस्तें भी उसने ही चुकाई है।

शरद ने कहा कि ये तो सौरभ और चेतन जानें। मैं तो सिर्फ कर्मचारी हूं।

आयकर विभाग की टीम को 19-20 दिसंबर की रात इनोवा कार में 52 किलो सोना मिला था।

चेकपोस्ट की रसीदें कहां से आईं?

सौरभ ने कहा कि मुझे इसकी जानकारी नहीं। न ही ट्रांसपोर्ट के चेकपोस्ट से मेरा कोई लेनदेन है। मैं तो दो साल पहले ही इस्तीफा दे चुका हूं।

चेतन ने कहा कि ये सबकुछ सौरभ ही यहां रखता रहा है।

शरद ने तो सीधे तौर पर पल्ला झाड़ लिया।

लोकायुक्त छापे में मिली परिवहन विभाग की सील और चेकपोस्ट की रसीदें।

227 किलो चांदी की सिल्लियां कैसे आईं?

सौरभ इस सवाल पर चुप है। वो इसका कोई सीधा जवाब नहीं दे रहा है।

चेतन ने तो साफ कह दिया कि वह सिर्फ दो कमरों का इस्तेमाल करता था। जिस कमरे से चांदी की सिल्लियां मिली हैं और नकद पैसे मिले, वहां तो सौरभ ताला लगाकर रखता था। उसे बिल्कुल भी चांदी और पैसों की जानकारी नहीं थी। मेरे नाम जो कुछ भी है, वो सब सौरभ का है।

सौरभ के घर से चांदी की सिल्लियां मिली थीं।

अब ईडी करेगी जेल में पूछताछ

ईडी ने कोर्ट में आवेदन देकर तीनों आरोपियों से जेल में पूछताछ की अनुमति ले ली है। ईडी फिलहाल जेल में पूछताछ करेगी। यदि जरूरत हुई तो तीनों आरोपियों को रिमांड पर लेगी।

ईडी इतने दिनों में सौरभ की सारी कंपनियों की प्रोफाइल, बैलेंस शीट, इनकम टैक्स रिटर्न और मनी ट्रेल की स्टडी कर चुकी है। ईडी के सामने तीनों आरोपी झूठ नहीं बोल पाएंगे। वजह ये है कि उन्हें हर डॉक्यूमेंट वेरिफाई करने होंगे।

ईडी इस मामले में मनी लॉ​​​न्ड्रिंग का केस दर्ज कर चुकी है। ऐसे में वह ये प्रमाणित करेगी कि जिन प्रॉपर्टी को सौरभ अपनी मानने से इनकार कर रहा है, उनका भुगतान कैसे हुआ? उस पैसे का सोर्स क्या था?

 

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