
ED Action After SEBI: भारतीय प्रतिभूति विनिमय बोर्ड (SEBI) की कार्रवाई के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जेनसोल इंजीनियरिंग लिमिटेड के परिसरों पर छापेमारी की. इस दौरान सह-संस्थापक पुनीत सिंह जग्गी को दिल्ली के एक होटल से हिरासत में लिया गया, जबकि दूसरे प्रमोटर अनमोल जग्गी के दुबई में होने की बात कही जा रही है.
पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के प्रावधानों के तहत इलेक्ट्रिक वाहन बनाने और पट्टे पर देने वाली कंपनी के दिल्ली, गुरुग्राम और अहमदाबाद स्थित परिसरों में तलाशी ली गई है.
ED की यह कार्रवाई SEBI के आदेश पर आधारित है, जिसमें दावा किया गया था कि जग्गी बंधुओं ने इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने के लिए लोन का दुरुपयोग किया. जग्गी बंधुओं पर 262 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का आरोप है.
SEBI ने जून 2024 में जेनसोल के शेयर मूल्य में हेरफेर और फंड डायवर्जन की शिकायतों के बाद जांच शुरू की थी. जांच में SEBI ने पाया कि कंपनी के प्रमोटरों ने फंड को निजी इस्तेमाल के लिए डायवर्ट किया. इसके बाद SEBI ने दोनों भाइयों को निदेशक पद से हटा दिया और उन पर शेयर बाजार में कारोबार करने पर भी प्रतिबंध लगा दिया.
कंपनी ने भारतीय अक्षय ऊर्जा विकास एजेंसी (IREDA) और पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन (PFC) जैसी संस्थाओं से 977.75 करोड़ रुपये का टर्म लोन लिया. इसमें से 664 करोड़ रुपये 6,400 इलेक्ट्रिक वाहन (EV) खरीदने के लिए थे, जिन्हें ब्लूस्मार्ट को लीज पर दिया जाना था.
जेनसोल की स्थापना अनमोल सिंह जग्गी और पुनीत सिंह जग्गी ने 2012 में की थी. इसकी शुरुआत सोलर एनर्जी कंसल्टेंसी और इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (EPC) फर्म के तौर पर हुई थी. इसने अपनी सब्सिडियरी EV राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म ब्लूस्मार्ट मोबिलिटी के जरिए EV लीजिंग और मैन्युफैक्चरिंग में विस्तार किया.
जेनसोल तीन खंडों में काम करता है (ED Action After SEBI)
- सोलर EPC: सौर ऊर्जा परियोजनाओं के लिए इंजीनियरिंग, खरीद और निर्माण (अप्रैल-दिसंबर 2024 में राजस्व का 72.3%).
- EV लीजिंग: ब्लूस्मार्ट जैसे प्लेटफॉर्म के लिए EV को लीज़ पर देना (राजस्व का 27.7%).
- EV विनिर्माण: पुणे में प्रति वर्ष 12,000 कारों की क्षमता वाली EV विनिर्माण इकाई स्थापित करना.