एक्टर सैफ अली खान अपने ऊपर हुए हमले के 5 दिन बाद 21 जनवरी को हॉस्पिटल से डिस्चार्ज हुए। घर पहुंचे तो वहां मौजूद लोगों की ओर देखकर हाथ हिलाया और पैदल चलकर अंदर गए। महाराष्ट्र सरकार में मंत्री नितेश राणे ने कहा कि सैफ जिस तरह हॉस्पिटल से निकले, मुझे लगा कि क्या वाकई उन पर हमला हुआ था। राणे से पहले शिवसेना नेता संजय निरूपम ने 22 जनवरी को यही शक जाहिर किया था।
मेडिकल रिपोर्ट के मुताबिक, सैफ को 5 जगह चाकू लगा था। इस पर एम्स के पूर्व डायरेक्टर डॉ. एमसी मिश्रा से बात की। उनसे पूछा कि सैफ को लगी चोटें कितनी सीरियस थीं। जवाब मिला कि चोटें जानलेवा नहीं थीं। एक्टर को हॉस्पिटल ले जाने वाले ऑटो ड्राइवर भजन सिंह राणा ने भी बताया कि ऑटो में बहुत कम खून लगा था। हालांकि, पुलिस ने उसका बयान दर्ज नहीं किया है।
सैफ पर हमले की जांच कहां तक पहुंची, हमने इसकी भी पड़ताल की। वे डॉक्युमेंट भी देखे, जिनके आधार पर मुंबई पुलिस ने आरोपी शरीफुल इस्लाम को गिरफ्तार कर रिमांड पर लिया है।
मौजूद डॉक्युमेंट्स से साफ है कि मुंबई पुलिस ने शुरुआती जांच के 7 दिन बाद भी सैफ अली खान के अपार्टमेंट के आसपास की CCTV फुटेज की जांच नहीं की है। पुलिस को अब तक सैफ के कपड़ों और बाकी सैंपल की साइंटिफिक रिपोर्ट भी नहीं मिली है।
ऑटो ड्राइवर बोला- पुलिस ने ऑटो से खून का सैंपल नहीं लिया ऑटो ड्राइवर भजन सिंह राणा 15-16 जनवरी की रात सैफ अली खान को लीलावती हॉस्पिटल ले गए थे। सैफ पर उनके बांद्रा वाले घर सदगुरु शरण अपार्टमेंट में हमला हुआ था। भजन सिंह से बात की, तो समझ आया कि सैफ जब हॉस्पिटल पहुंचे, तब बहुत ब्लीडिंग नहीं हुई थी। पहले दावा किया गया था कि हॉस्पिटल जाते वक्त सैफ खून से लथपथ थे।
भजन सिंह ने बताया, ‘रात के करीब 3 बजे थे। मैं सवारी की तलाश में जा रहा था। तभी एक हाउस हेल्प भागती हुई आई और बोली जल्दी से गेट पर गाड़ी लगाओ। वहां कोई गार्ड नहीं दिखा। पता नहीं गार्ड थे या नहीं। तभी सैफ आए। उनके कपड़े पर खून था।’
‘मेरे ऑटो की सीट पर भी हल्का-फुल्का खून लग गया था। मैंने उसे कपड़े से साफ कर दिया। वैसे भी मेरी गाड़ी रोज धुलती है। मैंने इतना ध्यान नहीं दिया कि सैफ को पीठ में चाकू लगा था या नहीं। पुलिस ने मुझसे थोड़ी-बहुत पूछताछ की, लेकिन ऑटो से खून का सैंपल नहीं लिया।’
एक्सपर्ट बोले- सैफ के घाव सिर्फ स्किन पर, मसल्स, हड्डी या नर्व तक नहीं सैफ अली खान के मेडिको लीगल केस यानी MLC की जांच दिल्ली एम्स के पूर्व डायरेक्टर और जनरल सर्जरी के हेड ऑफ डिपार्टमेंट डॉ. एमसी मिश्रा से कराई। डॉ. एमसी मिश्रा 2013 से 2017 तक एम्स के डायरेक्टर रहे हैं। अभी एक हॉस्पिटल में सर्जन हैं।
उनके मुताबिक, एक बात तो साफ है कि सैफ अली खान का काफी कम खून बहा। उतना नहीं, जितना खून से लथपथ होने का दावा किया गया था। घाव भी गहरे नहीं लगे। सिर्फ स्किन पर चाकू या किसी शॉर्प ऑब्जेक्ट के घाव हैं। उस चाकू की धार भी ज्यादा नहीं होगी।
डॉ. एमसी मिश्रा कहते हैं, सैफ अली खान की MLC रिपोर्ट में कंधे, गर्दन, हाथ और पीठ पर घाव के निशान बताए गए हैं। रिपोर्ट देखकर लगता है कि ये सब सुपरफिशियल लैसरेशन इंजरी हैं। सुपरफिशियल मतलब ये घाव सिर्फ स्किन पर हैं। अंदर मसल्स, हड्डी या किसी नस तक नहीं पहुंचे। इनसे किसी नर्व को नुकसान नहीं पहुंचा है।
सर्जरी स्केल पर सैफ को लगी चोट सबसे कम
डॉ. एमसी मिश्रा से हमने पूछा कि सैफ अली खान को लगी चोट को कितना बड़ा मान सकते हैं?
डॉ. मिश्रा कहते हैं, ‘बिल्कुल मिनिमम पर रख सकते हैं। सर्जरी की भाषा में घाव को देखकर सर्जरी स्केल बनाते हैं। उस स्केल पर सैफ अली खान के चोट के निशान को हम 1 नंबर देंगे।
चोट लगने को स्केल पर 1 से 6 तक मापा जाता हैं। इसमें सबसे कम 1 और अधिकतम 6 होता है। 6 नंबर वाली चोट में किसी का बचना मुश्किल होता है। मिनिमम स्केल 1 होता है। इसमें रोगी को टांके लगाकर घर भेजा जा सकता है।
स्पाइनल कॉर्ड के पास घाव की वजह से 5 दिन हॉस्पिटल में रखा
अगर सिर्फ टांके लगाकर इलाज हो सकता था, तो फिर 5 दिन तक किस वजह से इलाज चला। इस पर डॉ. एमसी मिश्रा बताते हैं, ‘बैक साइड वाले घाव की ज्यादा डिटेल नहीं है। न सर्जन रिपोर्ट है, न एक्सरे या सीटी स्कैन की डिटेल है। ये रिपोर्ट सर्जन के पास होगी। इसे हमने नहीं देखा है।’
‘ऐसे में जैसा डॉक्टरों ने मीडिया से कहा था उसके हिसाब से स्पाइनल कॉर्ड पर चोट लगने की बात है। उसकी पड़ताल के लिए अस्पताल में 5 दिन के लिए रखा था। हालांकि, बाद में स्पाइनल कॉर्ड तक चोट न होने का पता चला। इसके बाद उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया।’
MLC के हिसाब से पीठ का घाव कैसा था। डॉ. एमसी मिश्रा कहते हैं, ‘रिपोर्ट में 0.5 से 0.1 सेमी का घाव है। ये घाव सुपरफिशियल है। मतलब ये घाव सिर्फ स्किन तक ही हुआ होगा। उसके नीचे थोड़ी बहुत चर्बी होती है, उसमें हल्की चोट लगी थी।’
अगर चोट की गहराई की डिटेल होती, तो घाव के बारे में ज्यादा बताया जा सकता था। मुझे लगता है कि मेडिको रिपोर्ट में भी अधूरी जानकारी है।
डॉ. एमसी मिश्रा एम्स के पूर्व डायरेक्टर
ऑटो में बहुत कम खून था। ड्राइवर के मुताबिक, इसे उसने कपड़े से साफ कर दिया। ये कितना सच होगा? डॉ. एमसी मिश्रा बताते हैं, ‘मैंने पहले बता दिया कि इसमें ज्यादा ब्लड लॉस नहीं हुआ होगा। कोई भी व्यक्ति खुद अस्पताल पहुंचता है या फिर ऑटो लेकर, इसका मतलब ही है कि चोटें उतनी गंभीर नहीं हैं।’
‘मुझे नहीं लगता है कि इनके केस में ज्यादा ब्लड निकला होगा। वे खुद चलकर गए थे। हॉस्पिटल भी आराम से पहुंच गए। ब्लड प्रेशर बढ़ा नहीं। अगर गहरा घाव होता या नसों में होता, तब ब्लीडिंग ज्यादा होती।’
डॉ. एमसी मिश्रा इसे समझाते हुए कहते हैं, ‘हमारे शरीर में 5 लीटर खून होता है। किसी घाव में कम से कम 2 लीटर खून बह जाए, तब इंसान को बेहोशी आती है। वो चलकर नहीं जा सकता। अगर शरीर से सिर्फ 10% ही खून निकलता है यानी करीब 500 ML, तब वो उसे बर्दाश्त कर लेता है।’
ब्लड डोनेशन के वक्त 400 से 450 ML ब्लड निकाला जाता है। मुझे नहीं लगता है कि सैफ अली खान के केस में इतना भी ब्लड लॉस हुआ होगा।
चाकू का टूटना बताता है कि वो बहुत शॉर्प नहीं था, इसलिए हल्के घाव लगे डॉ. एमसी मिश्रा आगे बताते हैं, ‘इस तरह के घाव में भी दो तरह की चोट होती हैं। ब्लंट, जिसमें चोट अंदर ज्यादा लगती है। उनकी कोहिनी पर लगा घाव ब्लंट ऑब्जेक्ट से हो सकता है। बाकी थोड़ा शॉर्प ऑब्जेक्ट से हुआ होगा। इनके केस में ये कह सकता हूं कि बहुत शॉर्प चाकू नहीं था क्योंकि वो टूट भी गया। चाकू का टूटना बताता है कि वो उतना शॉर्प नहीं था, इसलिए बॉडी के ऊपरी हिस्से पर ही चोट लगी।
सैफ जैसी लंबाई वाला ही इस तरह हमला कर पाएगा सैफ पर हमलावर ने कैसे हमला किया होगा। मेडिको लीगल रिपोर्ट से क्या लगता है कि हमलावर की कद-काठी कैसी होगी? डॉ. एमसी मिश्रा कहते हैं, ‘पीठ पर कैसे चोट लगी, इसमें पहले ये पता चलना चाहिए कि उस समय किस तरह के कपड़े पहने थे। अगर कपड़े थे, तभी कम चोट लगी होगी। चूंकि रिपोर्ट में काफी डिटेल नहीं है और न ही कपड़े की कोई रिपोर्ट मेरे पास है। इसलिए हम MLC के हिसाब से सिर्फ अनुमान लगा सकते हैं।’
‘इसे देखकर कह सकते हैं कि सैफ ने सामने से हमलावर को पकड़ लिया होगा। उसके बाद हमलावर को हाथ छुड़ाने का मौका मिला या फिर हाथ छूटा होगा, तभी उसने सैफ के हाथ, कंधे और गले के पास हमला किया। इसके बाद पीठ पर हमला किया। सैफ अली खान की लंबाई अच्छी है। इस लिहाज से हमलावर की लंबाई भी ठीक होनी चाहिए। तभी वो सामने से पीठ पर हमला कर सकता है।’
सैफ का इलाज करने वाले हॉस्पिटल का बयान लीलावती अस्पताल के COO डॉ. नीरज उत्तमानी के मुताबिक, सैफ को तड़के 3:30 बजे अस्पताल लाया गया था। सैफ पर चाकू से छह वार किए गए थे। दो घाव गहरे हैं, जिनमें एक रीढ़ की हड्डी के पास है। न्यूरोसर्जन डॉ. नितिन डांगे, कॉस्मेटिक सर्जन डॉ. लीना जैन और एनेस्थिसियोलॉजिस्ट डॉ. निशा गांधी के नेतृत्व में डॉक्टरों की एक टीम ने उनका ऑपरेशन किया।
रीढ़ की हड्डी के पास बड़ा घाव है। किस्मत बहुत अच्छी थी कि वे सीरियस इंजरी से बच गए। अगर चाकू 2 मिलीमीटर अंदर चला जाता तो स्थिति गंभीर हो सकती थी। इतने घावों के बाद भी सैफ अस्पताल के अंदर चलकर आए। उन्होंने स्ट्रेचर तक नहीं लिया।
वहीं लीलावती अस्पताल के ट्रस्टी डॉ. प्रशांत मेहता ने बताया कि सैफ को चार गहरे जख्म थे। एक गर्दन और सबसे खतरनाक रीढ़ की हड्डी में। स्पाइनल फ्लूड लीक होने की वजह से हमने सैफ को बेड रेस्ट पर रखा। उन्हें चलाकर देखा। वे फिट थे। हम कुछ देर में उनको स्पेशल रूम में शिफ्ट कर देंगे। (बयान के वक्त सैफ हॉस्पिटल में एडमिट थे)
हमलावर को बंद करने के बाद पुलिस या गार्ड को सूचना ना देना चौंकाता है सैफ अली खान की स्टाफ नर्स और FIR कराने वाली एलियामा फिलिप ने पुलिस को बयान दिया है। जिसमें कहा है कि आरोपी हमलावर को उन लोगों को कमरे में बंद कर दिया था। ऐसे में कोई भी पीड़ित पहला काम क्या करता है। इस बारे में हमने UP के पूर्व DGP विक्रम सिंह से बात की।
वो कहते हैं,’कोई भी घटना होने के बाद अगर आरोपी या हमलावर को आपने बंद कर दिया है। या वो पकड़ा जा सकता है, तब सबसे पहले पुलिस को सूचना देनी चाहिए थी। अगर पुलिस को फोन नहीं किया तो कम से कम सिक्योरिटी गार्ड को बुलाना था। ये ना करना चौंकाता है।’
‘इसके पीछे वजह भी है, क्योंकि जब दोबारा दरवाजा खोला गया तो हो सकता है कि हमलावर फिर से अटैक कर देता। दूसरी बात घायल होने के बाद एंबुलेंस या पुलिस की तुरंत मदद लेनी चाहिए थी। ये भी नहीं किया गया।’
‘जहां तक ऑटो ड्राइवर की बात है तो वो इस घटना की अहम कड़ी है। घटना के बाद अस्पताल जाने के बीच उसकी भूमिका खास रहती है।’
पुलिस को सैफ को अस्पताल ले जाने वाले ऑटो ड्राइवर का बयान भी लेना चाहिए था। साथ ही ऑटो से फोरेंसिक सैंपल लेना भी जरूरी है।
विक्रम सिंह यूपी के पूर्व DGP
जांच पर मुंबई पुलिस के दावे 16 जनवरी की रात हुई घटना से लेकर शरीफुल की गिरफ्तारी और उसे दूसरी बार पुलिस रिमांड में लेने तक क्या-क्या हुआ, हमने इसकी पड़ताल मुंबई पुलिस के रिकॉर्ड के जरिए की है।
16 जनवरी की सुबह 8:50 बजे FIR 16 जनवरी की रात एक्टर सैफ अली खान पर उनके फ्लैट में हमला हुआ था। सुबह 8:50 बजे मुंबई के बांद्रा थाने में FIR दर्ज कराई गई थी। ये रिपोर्ट सैफ की स्टाफ नर्स एलियामा फिलिप ने कराई थी। रिपोर्ट में लिखा है कि हमलावर के बाएं हाथ में लकड़ी जैसा कुछ था। दाहिने हाथ में लंबा और पतला हेक्सा ब्लेड जैसा हथियार था। हाथापाई के दौरान उसने हमला किया, तो मेरी बीच वाली एक उंगली में चोट लगी।
FIR में ये भी लिखा है कि हमलावर ने उसी लकड़ी और हेक्सा ब्लेड जैसे हथियार से सैफ पर हमला किया था। इसमें 5 जगह चोट लगने की जानकारी दी गई है।
19 जनवरी की दोपहर 12:02 बजे शरीफुल अरेस्ट पुलिस की रिपोर्ट में दावा है कि शरीफुल इस्लाम शहजाद की उम्र करीब 30 साल है। वो बांग्लादेश का रहने वाला है। उसे 19 जनवरी की दोपहर 12:02 बजे गिरफ्तार किया गया। उसका मोबाइल फोन और सिमकार्ड जब्त कर लिया गया। इनकी जांच से पता चला कि शरीफुल बांग्लादेशी है।
चोरी या बरामदगी वाले कॉलम में पुलिस ने लिखा है…नहीं। जांच के लिए पुलिस ने क्राइम के दौरान इस्तेमाल कपड़े, बैग और हथियार जब्त किए हैं। इसके साथ ही घायल गवाहों यानी सैफ अली खान और एलियामा फिलिप के कपड़ों को जांच के लिए लिया है।
24 जनवरी को शरीफुल की रिमांड मिली मुंबई पुलिस ने आरोपी शरीफुल को कोर्ट में पेश कर 7 दिनों की पुलिस रिमांड मांगी। इस पर कोर्ट ने 5 दिन की रिमांड मंजूर कर ली। 29 जनवरी को रिमांड खत्म होगी। इस दौरान मुंबई पुलिस ने जांच को लेकर जो अपडेट दी थी और जिस आधार पर रिमांड मांगी थी, हमने उनकी पड़ताल की। इससे मुंबई पुलिस की जांच से जुड़ी अहम जानकारियां मिलीं हैं। साथ ही कई सवाल भी उठ रहे हैं।
क्राइम स्पॉट के आसपास CCTV फुटेज की जांच अधूरी 24 जनवरी को मुंबई पुलिस ने कोर्ट में शरीफुल की दोबारा रिमांड मांगी। इसके 5वें पॉइंट में लिखा है कि क्राइम स्पॉट एरिया और बाकी जगहों पर CCTV फुटेज हासिल करने का काम अभी अधूरा है। इसके अलावा गिरफ्तार आरोपी के चेहरे की पहचान के लिए साइंटिफिक तरीके से काम नहीं किया गया है।
इससे सवाल ये उठता है कि करीब एक हफ्ते की जांच में घटनास्थल के आसपास के CCTV फुटेज की जांच पूरी ही नहीं हुई। इस मामले में ये बेहद जरूरी मानी जाती है। CCTV फुटेज से अपराध करने के तरीके से लेकर इसमें कितने लोग शामिल थे, इसका पता लगाना आसान हो जाता।
पुलिस ने ये भी कहा है कि जांच के दौरान पता चला कि गिरफ्तार आरोपी के साथ और भी लोग थे। CCTV फुटेज की जांच की होती तो पता चल जाता कि आरोपी का साथी कोई बाहरी है या नहीं।
आरोपी ने हथियार कहां से खरीदे, नहीं पता पुलिस ने कोर्ट में बताया है कि आरोपी स्पष्ट जवाब नहीं दे रहा है। उसने अपराध में इस्तेमाल हथियार कहां से और किससे खरीदे, ये पता नहीं चल पाया है। उसकी जांच अभी बाकी है।
सैफ के कपड़े और साइंटिफिक रिपोर्ट आना बाकी, जूतों की जांच भी जरूरी पुलिस ने रिपोर्ट में माना है कि आरोपी हमलावर के जूते इस केस में अहम हो सकते हैं। जूतों की बरामदगी जरूरी है। ये भी माना है कि घायलों के कपड़े और खून के सैंपल लिए गए हैं। फिंगरप्रिंट भी लिए गए हैं। उनकी साइंटिफिक और केमिकल जांच रिपोर्ट आनी बाकी है।
फिंगर प्रिंट मैच न होने की खबरें, CM बोले- कन्फ्यूजन न फैलाएं मुंबई पुलिस ने सैफ के घर से 22 जनवरी को 200 से ज्यादा फिंगरप्रिंट और बाकी सैंपल लिए थे। इन्हें जांच के लिए CID की लैब भेजा गया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इनमें से 19 फिंगरप्रिंट हमले के आरोपी शरीफुल इस्लाम के फिंगरप्रिंट से मैच नहीं हुए।
महाराष्ट्र के CM और गृह मंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आरोपी के फिंगर प्रिंट्स मैच न होने के सवाल पर कहा कि जो बातें पुलिस ने नहीं कहीं, उन्हें बताकर मीडिया कन्फ्यूजन क्रिएट न करे। पुलिस की जांच सही दिशा में बढ़ रही है। मैंने मुंबई पुलिस कमिश्नर से कहा है कि मीडिया को केस की जानकारी दी जाए।
फोरेंसिक लैब का दावा- CCTV में दिखा शख्स और अरेस्ट आरोपी अलग सैफ अली खान पर हमले के बाद पुलिस ने संदिग्ध आरोपी का CCTV फुटेज जारी किया था। तीन दिन बाद 19 जनवरी को मुंबई पुलिस ने बताया कि सैफ पर हमला करने वाला मोहम्मद शरीफुल इस्लाम शहजाद है और उसे गिरफ्तार कर लिया गया है। उसकी फोटो भी जारी की थी।
इसी दौरान सोशल मीडिया पर बातें होने लगीं कि CCTV फुटेज में दिखे शख्स और शरीफुल का चेहरा मैच नहीं करता। इसका पता लगाने के लिए फोरेंसिक एक्सपर्ट की मदद ली। फोरेंसिक एक्सपर्ट डॉ. आदर्श मिश्रा ने सैफ पर हमले के आरोपी शरीफुल और उनके अपार्टमेंट में लगे CCTV कैमरे में दिखे संदिग्ध की फोटो का एनालिसिस किया।
फोटोग्राफ रिकग्निशन एनालिसिस करने पर दोनों फोटो में बहुत फर्क नजर आया। चेहरे के शेप से लेकर, आंख और होंठ की बनावट तक मेल नहीं खाती है। यानी दोनों फोटो एक शख्स की नहीं हैं।