जानिए OCD नामक मानसिक बीमारी के बारे में

कुछ लोगों को किसी काम या आदत की धुन इस कदर सवार होती है कि वह सनक बन जाती है और बीमारी का रूप ले लेती है। इससे उनकी लाइफ पर बुरा असर पड़ता है। ऐसे लोग ऑब्सेसिव कंप्लसिव डिसॉर्डर (ओसीडी) से पीड़ित होते हैं। दिक्कत यह है कि ज्यादातर लोग यह मानने को तैयार नहीं होते कि उन्हें ऐसी कोई समस्या है। हालांकि अगर वे वास्तविकता को स्वीकार कर लें, तो इलाज काफी आसान हो जाता है
क्या है ओसीडी:-
यह एक चिंता करने वाली बीमारी है, जिसमें पीड़ित शख्स किसी बात की जरूरत-से-ज्यादा चिंता करने लगता है। एक ही जैसे अनचाहे ख्याल उसे बार- बार आते हैं और एक ही काम को बार-बार दोहराना चाहता है। ऐसे लोगों को सनक वाले ख्याल आते हैं और अपने बिहेवियर पर कोई कंट्रोल नहीं होता। ऐसे मरीज न खुद को रोक पाते हैं, न ही बेफिक्र रह पाते हैं। जैसे कोर्इ सूर्इ पुराने रेकॉर्ड पर अटक जाती है, वैसे ही ओसीडी से दिमाग किसी एक ख्याल या काम पर अटक जाता है। मसलन, यह कन्फर्म करने के लिए कि गैस बंद है या नहीं, आप 20 बार स्टोव की नॉब चेक करते हैं। तब तक हाथ धोते रहते हैं, जब तक कि वह छिल न जाए या आप तब तक गाड़ी भगाते रहते हैं, जब तक कि आपको यह संतुष्टि न हो जाए कि जिस शख्स ने पीछे से हॉर्न दिया था, वह पीछा तो नहीं कर रहा।

समझें ओसीडी को:-
ऑब्सेशन बिना आपकी चाहत के होता है। इसमें कंट्रोल से बाहर वाले विचार, तस्वीरें और उत्तेजना बार-बार दिमाग में आती रहती है। आप चाहते हैं कि ये ख्याल आपके दिमाग में न आएं, मगर आप इन्हें रोक नहीं पाते। दिक्कत यह है कि ये ख्याल अक्सर निराशाजनक और ध्यान भंग करने वाले होते हैं।
कंपल्शन ऐसा बिहेवियर है, जिसे आप बार-बार दोहराने की जरूरत महसूस करते हैं। आमतौर पर कंपल्शन ऑब्सेशन से छुटकारा पाने की कोशिश के तहत किया जाता है। उदाहरण के तौर पर, अगर आप गंदगी से डरते हैं तो शायद आप बार-बार सफार्इ करने के आदी हो जाएंगे। यानी इससे आपको कोर्इ फायदा महसूस नहीं होता। उलटे ऑब्सेसिव सोच और मजबूती से वापस आती है। ऐसे में कंपल्शन वाला बिहेवियर बेचैनी में बदल जाता है क्योंकि आप ऐसा बार-बार करने लगते हैं और इस पर ज्यादा-से-ज्यादा वक्त लगाने लगते हैं।
लक्षण:-
चेकिंग
जो लोग बार-बार किसी चीज को चेक करें या फिर उसके बारे में सोच, तो आप समझ जाइए ऐसे लोग ओसीडी का शिकार है। जैसे बार-बार गैस चेक करना, लाइट बंद है या नहीं चेक करना, घर का दरवाजा चेक करना, पैसे बार-बार गिनना आदि।

कंटेमिनेशन
उन चीजों का डर जो गंदे हो सकते हैं या साफ करने की मजबूरी। मानसिक संदूषण में यह महसूस करना शामिल है कि आपके साथ गंदगी की तरह व्यवहार किया गया है। ऐसे लोगों को भी ओसीडी जैसे मानसिक रोगों से जोड़ा जाता है।

अन्य लक्षण:-
डर से जुड़ी चीजों को को महसूस करना जैसे, घर में कोई बाहरी व्यक्ति घुस आया है।
ऐसे लोगों को किसी और को नुकसान पहुंचने का डर भी रहता है।
धर्म या नैतिक विचारों पर पागलपन की हद तक ध्यान देना।
किसी चीज को भाग्यशाली या दुर्भाग्यशाली मानने का अंधविश्वास।
चीजों को बेवजह बार-बार जांचना, जैसे कि ताले, उपकरण और स्विच आदि।
बेकार की चीजें इकट्ठा करना जैसे कि पुराने न्यूजपेपर, खाने के खाली डिब्बे, टूटी हुई चीजें आदि।
इलाज
मनोचिकित्सा
ऐसे व्यवहार में थेरेपी आपके सोच पैटर्न को बदलने में काफी मदद कर सकती है। आपकी ओर से एक्सपोजर और काम को रोकथाम में ये सहायक है। आपका डॉक्टर आपको चिंता पैदा करने या मजबूरियों को सेट करने के लिए डिजाइन की गई स्थिति में डाल देगा। आप अपने OCD विचारों या काम को कम करना सीखेंगे।

आराम करना
ध्यान, योग और मालिश जैसी सरल चीजें तनावपूर्ण ओसीडी लक्षणों में मदद कर सकती हैं। ऐसे में आप उन चीजों को भूलने का काम कर सकेंगे। इससे आप बार-बार किसी चीज को लेकर ज्यादा सोचने में ध्यान नहीं लगाएंगे।
ऐसे होता है इलाज:-
स्टेज 1 री-लेबल : यह स्वीकार करना कि आपके रुटीन और संबंधों में दखल दे रहे ऑब्सेसिव विचार और काम ओसीडी का नतीजा हैं। उदाहरण के लिए, अपने आपको यह कहना सिखाएं कि मुझे नहीं लगता कि मेरे हाथ गंदे हैं। मुझे अपने हाथ गंदे होने का ऑब्सेशन है।
स्टेज 2 उत्तरदायी ठहराना : खुद को यह अहसास कराना कि आपकी परेशानियों की वजह ओसीडी है, जिसके लिए शायद आपके दिमाग में बायोकेमिकल इम्बैलेंस जिम्मेदार है। खुद से कहें, यह आप नहीं कर रहे, बल्कि आपका ओसीडी आपसे करवा रहा है। खुद को बार-बार यह याद दिलाएं कि ओसीडी की वजह से आपको आने वाले ख्याल बेमतलब हैं। दिमाग झूठे मेसेज भेज रहा है।
स्टेज 3 ध्यान केंद्रित करना : अपना ध्यान कहीं और लगाकर ओसीडी के ख्यालों को नजरअंदाज करने की कोशिश करें। ऐसा रोजाना कम-से-कम कुछ देर के लिए जरूर करें। खुद से कहें, मैं ओसीडी के लक्षणों से गुजर रहा हूं, इसलिए मुझे किसी दूसरे काम पर ध्यान देने की जरूरत है।
स्टेज 4 फिर से मूल्यांकन करना : ओसीडी के ख्यालों को अहमियत न दें। ये महत्वपूर्ण नहीं होते। खुद से कहें, यह सिर्फ मेरा बेवकूफाना ऑब्सेशन हैं। इसका कोर्इ मतलब नहीं। इस पर ध्यान देने की कोर्इ जरूरत नहीं। याद रखें, आप इन ख्यालों को आने से नहीं रोक सकते, लेकिन आपको इस पर ध्यान देने की जरूरत भी नहीं होती। आप अगले बिहेवियर की तरफ बढ़ना सीख सकते हैं।

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