
नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का आंदोलन आज 23वें दिन भी जारी है। हाड़ कंपा देने वाली सर्दी में भी हजारों की संख्या में किसान दिल्ली की सीमाओं पर विरोध प्रदर्श कर रहे हैं। इस बीच शुक्रवार की सुबह सिंधु और टिकरी बॉर्डर पर विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों के बीच ट्रॉली टाइम्स नाम के अखबार की 2,000 प्रतियां बांटी गईं। द्वि-साप्ताहिक (महीने में दो सप्ताह) प्रकाशित होने वाले इस समाचार पत्र के पहले पेज का शीर्षक ‘जुड़ांगे, लड़ांगे, जीतेंगे’ था।
ट्रैक्टर की ट्रॉली में आया आइडिया
ट्रैक्टर की ट्रॉली में आया आइडिया
समाचार पत्र के पहले पेज पर संघ नेताओं और प्रदर्शनकारी किसानों द्वारा लिखित राय, तस्वीरें, कार्टून, कविताएं, समाचार रिपोर्ट प्रकाशित किया गया था। दि इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक यह समाचार पत्र चार पन्नों का था। इसे हिंदी और पंजाबी भाषा में प्रकाशित किया गया था। बता दें कि ट्रॉली टाइम्स नामक अखबार को किसान आंदोलन में शामिल 46 वर्षीय एक पटकथा लेखक सुरमीत मावी ने शुरु किया है।
सुरमीत मावी और गुरदीप सिंह ने मिलकर शुरू किया अखबार
किसान आंदोलन के दौरान ही उन्हें अपने अन्य साथी और पंजाबी किसान नरिंदर भिंडर की ट्रॉली के अंदर बैठे-बैठे अखबार का आइडिया आया। किसानों को जागरुक करने के लिए उन्होंने हिंदी और पंजाबी दो भाषाओं में अखबार की शुरुआत की है। बता दें कि सुरमीत मावी भी अन्य किसानों की तरह सिंधु बॉर्डर पर नए कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं। दि इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक सुरमीत मावी ने बरनाला स्थित फोटोग्राफर गुरदीप सिंह धालीवाल के साथ ट्रॉली टाइम्स की शुरुआत की।
किसानों के अखबार से मिलेगा बोलने का मंच
किसानों के अखबार से मिलेगा बोलने का मंच
सुरमीत मावी ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि उन्हें अखबार शुरू करने की प्रेरणा किसानों के बीच मिली। उन्होंने कहा, किसानों को सरकार के सामने अपनी बात रखने के लिए मंच आसानी से नहीं मिलता। इस समाचार पत्र के माध्यम से उन्हें एक ऐसा मंच देने की कोशिश की गई है जिससे किसान अपनी बातों को सरकार तक पहुंचा सकें, साथ ही सरकार की योजनाएं और विचार किसानों तक आसानी से पहुंच सके। उन्होंने यह भी कहा कि अखबार किसानों की बुद्धि को प्रदर्शित करने का एक तरीका है।