महू में रविवार को उपद्रवियों ने जमकर तोड़फोड़ की और आगजनी की घटना को अंजाम दिया था।
इंदौर के महू में उपद्रव शांत हुआ ही था कि सोमवार रात को कुछ बदमाशों ने चौपाटी पर खड़े ठेलों में आग लगा दी। लोगों ने पानी डालकर आग पर काबू पाया। वहीं, रविवार को हुए उपद्रव के बाद हालात सामान्य हो चुके थे। दूसरे दिन शहर में भारी पुलिस बल तैनात रहा। अब पुलिस ठेलों में आग लगाने वाले बदमाशों की तलाश कर रही है।
इधर, भारतीय क्रिकेट टीम के चैंपियंस ट्रॉफी जीतने के बाद जुलूस निकालने के दौरान हुए पथराव और आगजनी को लेकर अब तक तीन एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। 12 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस लगातार गश्त कर रही है और सीसीटीवी फुटेज के जरिए आरोपियों की तलाश जारी है। सोमवार को मौके पर पहुंचा। लोगों से बातचीत की। इस दौरान घटनाक्रम की 3 वजहें सामने आईं।
पहला- सोशल मीडिया पर तेजी से अफवाहें फैली।
दूसरा- प्रतिबंधित इलाके में टुकड़ों में जुलूस निकाला गया।
तीसरा- उपद्रव के बहाने पुरानी रंजिश को हवा दी गई।
महू के शहर काजी और जामा मस्जिद के इमाम मो. जावेद का दावा है कि ये इलाका प्रतिबंधित है, क्योंकि पहले ही यहां जुलूस नहीं निकालने को लेकर बात हो चुकी थी। फिर भी यहां से जुलूस निकाला गया। अगर निकालना था तो अनुमति ली जाना चाहिए थी।
दूसरी ओर, कलेक्टर आशीष सिंह का कहना है कि जो लोग वहां से गुजरे वह अलग-अलग टुकड़ों में थे। यह कोई समाज या संस्था का जुलूस नहीं था। इसे जुलूस नहीं कहा जा सकता है। यह क्षेत्र प्रतिबंधित नहीं है। पहले कभी ऐसा कोई आदेश या नोटिफिकेशन जारी किया गया हो, यह बात मेरे संज्ञान में नहीं है।
एएसपी रुपेश द्विवेदी ने बताया कि एक दर्जन से ज्यादा आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। जल्द ही बाकी को भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
अब वो तीन दावे, जिससे तनाव की स्थिति बनी
पहला: सुतली बम मस्जिद में फेंका गया सबसे पहले शहर इमाम मो. जावेद से बात करने की कोशिश की। पहले वे तैयार नहीं हुए। काफी देर बाद सामने आए और पूरे घटनाक्रम की वजह सोशल मीडिया को बताया। उन्होंने दावा किया कि जो सुतली बम मस्जिद में फेंका गया वह पैनिक का मुख्य कारण है। पथराव का भी मैं चश्मदीद हूं। विरोधियों ने पत्थर फेंके तो जवाब में भी फेंके गए।
जो कुछ मीडिया को करना था सब कर दिया। देशभर में मुस्लिमों के खिलाफ ऐसा माहौल बनाया कि हमें भारत की जीत की खुशी नहीं है। हमारे साथ क्या हुआ, यह सच कोई बताने को तैयार नहीं है।
जब उनसे कहा गया कि आपने पूरे मीडिया पर सवाल उठाए हैं, इसे साबित कीजिए। इस पर उन्होंने स्पष्ट किया कि मेरा आशय सोशल मीडिया से था, जिसने माहौल को भड़काने का काम किया।
शहर इमाम मो. जावेद का कहना है…
अब जो कुछ होना था वो हो गया। हम तो अमन-चैन और भाईचारा चाहते हैं। हम सबसे पहले हिंदुस्तानी हैं। हम चाहते हैं कि फिर शांति व्यवस्था कायम हो और मोहम्मद और मुकेश (हर समाज) साथ में भारत की जीत का जश्न और त्योहार खुशी से मनाएं।
दूसरा: पुलिस पहले ही सख्ती करती तो हालात नहीं बिगड़ते प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि रविवार को चैंपियन ट्रॉफी में भारत फाइनल में न्यूजीलैंड से खेलेगा यह तो हर शख्स जानता था। जब भारत के पक्ष में जीत दिखाई देने लगी तो लोग बाहर निकलकर जोरदार जश्न मनाने की तैयारी में थे। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सेमीफाइनल के बाद फाइनल में भारत की जीत को देखते हुए महू के कई लोगों ने काफी संख्या में पटाखे खरीद लिए थे।
दो दिन पहले राऊ पटाखा बाजार से भी कई लोगों ने पटाखे खरीद लिए थे। हालांकि तब भी लोगों की मंशा सिर्फ जोरदार जश्न मनाने की थी। फिर रात को जैसे ही भारत जीता तो लोग बाहर आकर पटाखे फोड़ने लगे। पुलिस ने यहां पहले सख्ती कर दी होती तो ऐसे हालात नहीं बनते।
तीसरा: पुरानी तनातनी भी बनी तनाव का कारण लोगों का कहना है कि जहां-जहां तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाएं हुईं, वहां लोगों में तनातनी की स्थिति पहले से थी। रस्सी बम फूटने के बाद सीधे दोनों पक्ष आमने-सामने हो गए। जिन लोगों के वाहनों, घरों और दुकानों का नुकसान हुआ है, उनमें कुछेक ऐसे हैं जिनकी कुछ लोगों से अनबन रही है। यहां आतिशबाजी के दौरान रस्सी बम फोड़ा तो वह मस्जिद की ओर गिरा। बस यहीं से अंदर के लोग घबराकर बाहर निकले और दोनों पक्ष आमने-सामने हो गए। इस दौरान पुलिस बल नहीं होने से पथराव, आगजनी शुरू हो गई।