“न्यायालय परिसर में पत्रकार पर हमला और गवाही रोकने के दोषी 5 वकीलों को सजा; परिषद ने एडवोकेट एक्ट के तहत उनकी सनद निलंबित की — ऐतिहासिक कार्रवाई”

जबलपुरः मध्यप्रदेश राज्य अधिवक्ता परिषद ने ऐतिहासिक कदम उठाते हुए उज्जैन के पाँच वकीलों की वकालत करने की सनद तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दी है। यह कार्रवाई अदालत के उस फैसले के बाद की गई, जिसमें उज्जैन के वरिष्ठ पत्रकार घनश्याम पटेल पर न्यायालय परिसर में हमला कर गवाही रोकने और सामूहिक लूट-डकैती की वारदात को अंजाम देने के आरोप में इन अधिवक्ताओं को दोषी ठहराया गया था।

अदालत का फैसला

इंदौर के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्रीकृष्ण डागलिया ने 28 अगस्त 2025 को सुनाए फैसले में धर्मेंद्र शर्मा, सुरेंद्र शर्मा, शैलेंद्र शर्मा और भवेंद्र शर्मा को सात-सात साल सश्रम कारावास, जबकि 90 वर्षीय अधिवक्ता पुरुषोत्तम राय को तीन साल साधारण कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने इन्हें भारतीय दंड संहिता की धारा 307/34 के तहत हत्या के प्रयास और आपराधिक साजिश का दोषी माना।

परिषद का आदेश

वरिष्ठ पत्रकार द्वारा की गई शिकायत पर राज्य अधिवक्ता परिषद ने मामले को गंभीर कदाचार मानते हुए अधिवक्ता अधिनियम-1961 की धारा-35 के तहत निलंबन आदेश जारी किया। परिषद अध्यक्ष एडवोकेट राधेलाल गुप्ता और कार्यकारी सचिव गीता शुक्ला द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, पाँचों दोषी अधिवक्ता अब किसी भी न्यायालय, ट्रिब्यूनल या सक्षम प्राधिकारी के समक्ष वकालत नहीं कर सकेंगे।

ऐतिहासिक मिसाल

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार यह फैसला अधिवक्ता परिषद द्वारा पेशेवर आचरण और न्यायिक मर्यादा बनाए रखने की दिशा में ऐतिहासिक मिसाल है। माना जा रहा है कि देश में पहली बार किसी एक ही प्रकरण में पांच वकीलों को गवाह की हत्या के प्रयास जैसे गंभीर अपराध में दोषी पाए जाने और फिर उनकी सनद निलंबित किए जाने की घटना सामने आई है।

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