
कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बीच दुनियाभर के लोगों को इसकी एक सुरक्षित और कारगर वैक्सीन का इंतजार है। रूस, चीन जैसे देशों में आपातकालीन अप्रूवल के तहत उच्च जोखिम वर्ग के लोगों को वैक्सीन लगाई जा रही है। वहीं, इंडोनेशिया और ब्रिटेन में भी अगले महीने से टीकाकरण की तैयारी है। भारत समेत कई देश कोरोना वैक्सीन पर कामयाबी के करीब हैं। हालांकि अबतक हमारे लिए कोरोना की वैक्सीन उपलब्ध नहीं हो पाई है। सर्दियों में कोरोना का खतरा बढ़ने की संभावना तो है ही, फ्लू और अन्य बीमारियों के बढ़ने की भी आशंका रहती है। कोरोना वैक्सीन उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में फ्लू की वैक्सीन लगाए जाने की भी सलाह दी जा रही है। अब एक शोध अध्ययन के जरिए वैज्ञानिकों ने समझाया है कि फ्लू की वैक्सीन कोरोना के संक्रमण को कम करने में मदद कर सकती है।
फ्लू की वैक्सीन कोरोना के संक्रमण को घटाने में मदद कर सकती है। कोरोना के मरीजों में यह कैसे काम करेगी, वैज्ञानिकों ने इसे भी समझाया है। रिसर्च करने वाली नीदरलैंड्स की रेडबाउंड यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर के इम्यूनोलॉजिस्ट मिहाई नेटी कहते हैं, 2019-2020 की सर्दियों में जिन लोगों को फ्लू की वैक्सीन लगी थी उन पर कोरोना के असर को जाना गया। रिसर्च में सामने आया कि जिन लोगों को फ्लू की वैक्सीन दी गई उनमें कोरोना से संक्रमित होने का खतरा 39 फीसदी तक कम था।
वैज्ञानिकों का कहना है कि फ्लू की वैक्सीन शरीर में इम्यूनिटी बढ़ाती है, जो कई तरह के वायरस से लड़ने की क्षमता देता है। यह खास तरह के साइटोकाइन स्टॉर्म को भी रोकती है। साइटोकाइन स्टॉर्म यानी ऐसी स्थिति, जिसमें कोरोना संक्रमण होने के बाद बीमारी से लड़ने वाला इम्यून सिस्टम यानी प्रतिरोधक क्षमता अतिसक्रिय होने लगती है, बेकाबू होने लगता है और शरीर को नुकसान पहुंचाने लगता है।
सर्दियों में फ्लू की वैक्सीन जरूरी
वैज्ञानिकों का कहना है, सर्दियों में कोरोना और फ्लू दोनों तरह के वायरल संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। वैज्ञानिकों ने ऐसी संभावित स्थिति को ‘ट्विनडेमिक’ नाम दिया है। इनका मानना है कि सर्दी में संक्रमण के खतरे को कम करने के लिए सभी लोगों को फ्लू की वैक्सीन जरूर लगवानी चाहिए। दिल्ली एम्स के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने भी ऐसी ही सलाह दी है।
बता दें कि वायरल फ्लू और कोरोना वायरस के लक्षण आपस में मिलते हैं, इनमें मामूली अंतर होता है। कई बार लोग फ्लू होने पर भी सशंकित हो जाते हैं कि कहीं उन्हें कोरोना तो नहीं हो गया। विशेषज्ञ बताते हैं कि कोरोना के लक्षण ज्यादातर श्वासनली, गले और फेफड़े से जुड़े होते हैं। इसमें डायरिया की भी शिकायत हो सकती है, जबकि खांसी सूखी होती है। वहीं, फ्लू में ज्यादातर लक्षण नाक से जुड़े होते हैं और बलगम आ सकता है। फ्लू में गले में दर्द होना जरूरी नहीं, जबकि इसमें बलगम आ सकता है। शोधकर्ता दोनों में अंतर स्पष्ट करने को लेकर अब भी शोधरत हैं।