“देश में पहली बार बोमा पद्धति से शुजालपुर में 45 ब्लैक बक पकड़े गए; दक्षिण अफ्रीकी टीम की मदद से 21 दिन में 400 ब्लैक बक और 100 नीलगाय होंगे स्थानांतरित”

शुजालपुर के कालापीपल इलाके में दीपावली की सुबह ब्लैक बक को पकड़ने का अभियान शुरू हुआ। बोमा पद्धति का उपयोग करते हुए पहले दिन 45 ब्लैक बक को सुरक्षित पकड़ा गया। इन्हें गांधी सागर बांध के आसपास के क्षेत्रों में छोड़ा जाएगा। यह अभियान किसानों को फसलों के नुकसान से बचाने के लिए चलाया जा रहा है।

कालापीपल इलाके में दीपावली की सुबह ब्लैक बक को पकड़ने का अभियान शुरू हुआ।

यह अभियान सोमवार सुबह 6 बजे से शुरू हुआ। इसमें ब्लैक बक के झुंड को हेलीकॉप्टर की मदद से हांककर बोमा पद्धति के तहत बनाई गई ‘वी’ आकार की ग्रीन मेट की दीवार की ओर ले जाया गया। इस दौरान कोई नीलगाय नहीं पकड़ी गई।

2 तस्वीरें देखिए..

खेत में घूम रहे ब्लैक बक के झुंड को हांका लगाता हेलिकप्टर

हेलिकॉप्टर की आवाज से बोमा की ओर जाते ब्लैक बक।

दक्षिण अफ्रीका से आई है टीम

इस अभियान को दक्षिण अफ्रीका की कंजर्वेशन सॉल्यूशंस टीम और वन विभाग द्वारा संयुक्त रूप से शाजापुर जिले के ग्राम इमलीखेड़ा में चलाया जा रहा है। बीते चार दिनों से हेलीकॉप्टर की अनुपलब्धता के कारण वन्यजीव रेस्क्यू दल और वन विभाग के अधिकारी वन्यजीवों की लोकेशन और अन्य स्थानों के अवलोकन में व्यस्त थे।

दक्षिण अफ्रीका से विशेषज्ञों की देखरेख में कृष्ण मृग को पकड़ा जा रहा है।

देश में पहली बार हो रहा प्रयोग

अधिकारियों के अनुसार, यह देश में अपनी तरह का पहला अभियान है, जिसमें काले हिरणों को खेतों से पकड़कर जंगलों में छोड़ा जा रहा है। इससे किसानों को फसलों के नुकसान से राहत मिलेगी। पहले दिन 45 कृष्ण मृगों को पकड़ने के बाद अभियान को अस्थायी रूप से रोक दिया गया है, जो संभवतः मंगलवार से फिर शुरू होगा।

क्या है पूरी योजना

दक्षिण अफ्रीका की ‘बोमा टेक्नीक’ से ब्लैक बक और नीलगाय को शाजापुर से मंदसौर के गांधीसागर अभयारण्य भेजा जा रहा है। यह पहली बार होगा जब इस तकनीक से काले हिरणों का राजस्व क्षेत्र से रेस्क्यू किया जाएगा। फिलहाल, 400 ब्लैक बक और 100 नीलगाय को स्थानांतरित करने की अनुमति मिल चुकी है। डीएफओ हेमलता शाह ने बताया कि इस प्रक्रिया में एक्सपर्ट की टीम बिना किसी वन्य जीव को नुकसान पहुंचाए, सिर्फ 21 दिन में वन्यजीवों को ट्रांसलोकेट कर देगी।

शाजापुर में नीलगाय और काले हिरण खेतों में फसल को नष्ट कर देते हैं।

पहले जानिए, स्थानांतरण की जरूरत क्यों

शाजापुर में 20 हजार काले हिरण और 2 हजार नीलगाय

शाजापुर जिले में वन विभाग की भूमि न होने के बावजूद काले हिरण और नीलगायों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। वर्तमान में जिले में करीब 20 हजार काले हिरण और दो हजार नीलगाय हैं। ये फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं, जिससे किसान लंबे समय से परेशान हैं। ये वन्य जीव खेतों में घुसकर फसल नष्ट कर देते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार एक काला हिरण करीब 40-50 हिरण के समूह का लीडर होता है।

साल 2022 में तत्कालीन स्कूल शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने इस मुद्दे को विधानसभा में भी उठाया था। किसानों की मांग पर वन विभाग ने इन्हें पकड़कर अन्य सुरक्षित क्षेत्रों में भेजने की योजना तैयार की। शुरुआती चरण में केंद्र सरकार से 400 काले हिरण और 100 नीलगायों को रेस्क्यू करने की अनुमति मिली है।

अब जानिए बोमा पद्धति के बारे में …

क्या है बोमा पद्धति?

दरअसल, बोमा पद्धति में वन्यजीवों को बिना नुकसान पहुंचाए नियंत्रित क्षेत्र में एकत्र किया जाता है। इसके लिए एक प्रक्रिया अपनाई जाएगी, जिसे बोमा कहा जाता है। इसमें वन्य जीव को बिना केमिकल इंजेक्शन लगाए खुले मैदानों या खेतों में हेलीकॉप्टर की मदद से हांक कर पहले से बनी घास और हरी नेट की दीवारों (बोमा) के घेरे में लाया जाता है। इन जानवरों को हांक कर विशेष वाहनों तक जाया जाएगा। इनके माध्यम से सुरक्षित रूप से ट्रांसलोकेट किया जाता है। इस प्रक्रिया में इंसानों का सीधा संपर्क नहीं होता, जिससे जानवर भी तनावमुक्त रहते हैं।

गांव वालों के साथ वन विभाग कर्मचारी कर रहे बैठक

अभियान के तहत विभाग की टीम क्षेत्र के गांवों में किसानों के साथ निरंतर बैठक कर रही है। इमलीखेड़ा में प्रथम चरण में जेठड़ा, डुंगलाय दूसरे चरण व पोलायकलां तहसील के उमरसिंगी में तीसरा चरण होगा। ग्रामीणों के साथ एसडीओ फतेहसिंह मिनामा, रेजर रतनसिंह, डिप्टी रेंजर राजेश जावरिया, कन्हैयालाल, वनरक्षक हरीश सक्सेना, प्रदीप विश्वकर्मा संवाद कर रहे हैं। इस दौरान गांव वालों को ट्रांसलोकेशन के बारे में बताया जा रहा है।

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