
कांग्रेस लीडर नवजोत सिंह सिद्धू के फिर से भाजपा में शामिल होने की खबरें आने लगी हैं. किसान बिल की हिमायत में भाजपा की पठानकोट में ट्रैक्टर के दौरान बीजेपी के नेता मास्टर मोहनलाल ने बड़ा बयान दिया है. मास्टर मोहनलाल ने कहा है कि ही चुनाव नजदीक आएंगे वैसे ही सिद्धू भ्रम दूर करते हुए भाजपा का दामन थाम लेंगे. उन्होंने कहा की सिद्धू बड़े ईमानदार नेता हैं और सिद्धू की भाजपा मां पार्टी है इसलिए वो जल्द ही बीजेपी में शामिल होंगे.
उन्होंने दावा किया कि सिद्धू जल्द बड़ा फैसला लेंगे और भाजपा का दामन थामेंगे। उन्होंने कहा कि सिद्धू 2022 का चुनाव भाजपा से लड़ेंगे। मीडिया से बातचीत में कहा कि वे तो हमेशा से भाजपा के अकेले पंजाब में चुनाव लड़ने के हिमायती रहे हैं। सिद्धू भी इस बात पर जोर दे रहे हैं। अब समय आ गया कि भाजपा के साथ सिद्धू आएं।
बता दें, लंबे अंतराल के बाद फिर से सक्रिय हुए नवजोत सिंह सिद्धू इन दिनों एक बार फिर चर्चाओं में हैं। सिद्धू प्रदेश कांग्रेस प्रभारी हरीश रावत के प्रयासों के बाद राहुल गांधी की मोगा मेंं खेती बचाओ रैली मेंं शामिल हुए। वहां उन्हें भाषण देने का मौका मिला, लेकिन उन्होंने कृषि कानूनों के खिलाफ बोलने के साथ-साथ अपनी ही पंजाब सरकार को भी घेरा। इसके बाद सिद्धू को किसी भी मंच से बोलने का मौका नहीं मिला। इस पर सिद्धू बाद में राहुल की ट्रैक्टर यात्रा में शामिल नहीं हुुुुए।
ये है सिद्धू का राजनीतिक सफर:-बता दें, क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू ने वर्ष 2004 में सियासत में कदम रखा था। उन्होंने भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की, लेकिन जीत दर्ज करते ही वह 1988 के गैर इरादतन हत्या के मामले में घिर गए। यह केस दोबारा खुला। दिसंबर 2006 में उन्हें मामले में तीन साल कैद की सजा सुनाई गई। इस पर सिद्धू ने जनवरी 2007 लोकसभा से इस्तीफा दे दिया और सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी सजा पर रोक लगा दी। फरवरी 2007 में सिद्धू ने एक बार फिर भाजपा के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। इसके बाद 2009 में भी सिद्धू ने जीत दर्ज कर हैट्रिक लगाई।
वर्ष 2014 में सिद्धू को भाजपा ने लोकसभा चुनाव में टिकट नहीं दिया। उनके स्थान पर अरुण जेटली ने चुनाव लड़ा, लेकिन जेटली कैप्टन अमरिंदर सिंह से चुनाव हार गए। इसके बाद सिद्धू की भाजपा से नाराजगी शुरू हो गई। हालांकि भाजपा ने सिद्धू को अप्रैल 2016 में राज्यसभा भेज दिया, लेकिन खुश नहीं थे। आखिरकार उन्होंने राज्यसभा सदस्यता से इस्तीफा दे दिया और जुलाई 2016 में भाजपा छोड़ दी। इसकेे बाद उन्होंने अपनी पार्टी आवाज-ए-हिंद बनाई। हालांकि बाद में उन्होंने कांग्रेस का दामन थाम दिया।
कांग्रेस का दामन थामने के बाद सिद्धू ने कांग्रेस के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ा और बड़े अंतर से जीत दर्ज की। कैप्टन अमरिंदर सिंह सरकार में उन्हें स्थानीय निकाय मंत्री बनाया गया, लेकिन बाद में उनके विभाग में फेरबदल कर दिया गया। इससे सिद्धू नाराज हो गए और वर्ष 2019 में उन्होंने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद सिद्धू हर मंच पर चाहे वह सोशल मीडिया हो गया फिर सार्वजनिक मंच सभी जगह खामोश हो गए। इस बीच, सिद्धूू ने फिर राजनीतिक सक्रियता बढ़ाई है।