“गुना में 10 साल बाद खुला फर्जीवाड़ा: जिंदा महिला को मरा बताने वाले और ट्रक ड्राइवर की मौत को आत्महत्या दिखाने वाले बर्खास्त एसआई रामवीर कुशवाह गिरफ्तार”

जो महिला जिंदा है उसे पुलिस ने 10 साल पहले मरा बता दिया। यह करतूत भी आत्माराम पारदी केस में जेल में बंद और बर्खास्त सब इंस्पेक्टर रामवीर कुशवाह ने की है। 28 अक्टूबर को उसे दोबारा गिरफ्तार कर जेल भेजा दिया गया है। मामला गुना जिले के रुठियाई चौकी का है।

दरअसल, महिला के पति की साल 2015 में जिंदा जलने से मौत हो गई थी। तत्कालीन थाना प्रभारी रामवीर कुशवाह ने बिना जांच यह कहते हुए खात्मा रिपोर्ट लगा दी कि शख्स ने पत्नी के निधन के वियोग में खुदकुशी की है, जबकि उसकी पत्नी जिंदा थी। युवक के पिता ने कोर्ट में याचिका लगाई, तब मामले का खुलासा हुआ।

2015 का मामला चर्चा में, बर्खास्त एसआई गिरफ्तार 2015 का मामला फिर से चर्चा में है, क्योंकि धरनावदा पुलिस ने बर्खास्त SI रामवीर कुशवाह को गिरफ्तार किया है। रामवीर कुशवाह को एक ट्रक ड्राइवर के जलने के मामले में आत्महत्या के लिए उकसाने और लापरवाही बरतने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।

आरोपी रामवीर कुशवाह पर छह और मामले दर्ज हैं, जिनमें आत्माराम पारदी हत्याकांड में इस्तेमाल की गई कार को धोखाधड़ी से खरीदने का मामला भी शामिल है, जिसके लिए वह पहले से ही जेल में है।

चांचौड़ा उप जेल में न्यायिक हिरासत में रहने के दौरान, पुलिस ने न्यायालय से अनुमति प्राप्त कर आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में आरोपी बर्खास्त उपनिरीक्षक रामवीर सिंह कुशवाह की औपचारिक गिरफ्तारी की। उसे मंगलवार को राघौगढ़ कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में चांचौड़ा उप जेल भेज दिया गया।

बर्खास्त सब इंस्पेक्टर रामवीर सिंह कुशवाह उर्फ दाऊ के कारनामे एक एक कर उजागर हो रहे हैं। 10 साल पहले रामवीर सिंह के धरनावदा थाना प्रभारी रहने के दौरान रूठियाई चौकी के पास यूपी के एक ट्रक ड्राइवर की मौत का राजफाश भी हो गया है।

आत्माराम मर्डर केस, धोखाधड़ी समेत अन्य मामलों में फरार रहे एक लाख का इनामी रामवीर जमानत पर बाहर आता, उससे पहले ही उसे पुलिस ने ड्राइवर की मौत के मामले में गिरफ्तार कर लिया है।

बर्खास्त एसआई रामवीर कुशवाह को कड़ी सुरक्षा में लाया गया।

पत्नी के वियोग में सुसाइड बताकर लगाया था खात्मा 21 जून 2015 को जिला अस्पताल में माखन कुशवाह की जलने से मौत हो जाने की सूचना मिलने पर सिटी कोतवाली में मर्ग कायम किया गया था। माखन, पारसमणी ट्रांसपोर्ट कंपनी के कंटेनर क्रमांक एमएच 04 एफयू 8924 का ड्राइवर था। ट्रांसपोर्ट कंपनी के दूसरे कंटेनर के ड्राइवर हरदास ने माखन के हाथ कंटेनर की बैटरी से जलने की सूचना मृतक के परिजनों को दी थी।

22 जून को परिवार वालों को सूचना मिली, जिसके बाद मृतक माखन का छोटा भाई रमन गुना जिला अस्पताल आया, जहां उसे उसका बड़ा भाई माखन मृत अवस्था में मिला। रमन के अनुसार माखन के शरीर का निचला हिस्सा, पैर, तलवे, पेट और एक तरफ का चेहरा जला हुआ था, जबकि पीठ और सिर के बाल नहीं जले थे।

संदेह होने पर रमन जिला अस्पताल से रुठियाई चौकी गया, जहां तत्कालीन थाना प्रभारी रामवीर कुशवाह ने उसे बताया कि माखन ने डीजल डालकर आत्महत्या कर ली। रमन ने सवाल किया कि उसने कंटेनर के टैंक से डीजल कैसे निकाला।

इस पर रामवीर ने जवाब दिया कि माखन ने डीजल टैंक में शर्ट भिगो ली थी। इसके बाद, रमन ने पेट्रोल पंप पर खड़े कंटेनर का डीजल टैंक देखा, तो पाया कि उसके ढक्कन पर ताला लगा था, जबकि डीजल नोजल में जाली लगी थी, जिसमें उंगली भी नहीं जा सकती थी।

जब रमन ने यह बात रामवीर को बताई, तो वह भड़क गया। बाद में रामवीर सिंह ने माखन की पत्नी उषा की मृत्यु के वियोग में आत्महत्या करने की रिपोर्ट तैयार कर एसडीएम से खात्मा स्वीकृत करा लिया। बता दें कि माखन कुशवाह की मौत के पांच साल बाद उसकी पत्नी ने भी दूसरी शादी कर ली थी।

ट्रक ड्राइवर माखन कुशवाह का शव जली हुई अवस्था में यहीं पर मिला था।

पिता ने जांच के लिए लगाई 2019 में याचिका मृतक माखन उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले के ग्राम नाराहट का रहने वाला था। उसके वृद्ध पिता गोपाल ने माखन की मौत के दोषियों पर कार्रवाई करने के लिए तत्कालीन पुलिस अधीक्षक से लेकर पुलिस मुख्यालय तक तमाम शिकायतें की। लेकिन कुछ हासिल नहीं हुआ। साल 2019 में उन्होंने हाईकोर्ट में मामले की जांच के लिए याचिका दायर की।

हाईकोर्ट के निर्देश पर तत्कालीन एसपी राहुल कुमार लोढ़ा ने मर्ग की फिर से जांच कराई तो खुलासा हुआ की माखन की आत्महत्या का कारण बताते हुए जो रिपोर्ट रामवीर सिंह ने एसडीएम कोर्ट में दाखिल की थी, वह मनगढ़ंत और असत्य थी। जांच में माखन की पत्नी उषा बाई जीवित पाई गई। आरोपी रामवीर के रुतबे और प्रभाव के चलते बाद में ये जांच भी ठंडे बस्ते में चली गई।

इसके बाद गोपाल ने फिर हाईकोर्ट में केस की स्टेटस रिपोर्ट मंगवाई। तत्कालीन एसडीओपी ने मामले की सतही तौर पर जांच करते हुए रामवीर सिंह को क्लीन चिट देने की कोशिश की और पूरा दोष घटना के समय रुठियाई चौकी में तैनात रहे प्रधान आरक्षक हरिमोहन सिंह परिहार पर मढ़ दिया।

तब तक हरिमोहन सिंह की मृत्यु हो चुकी थी। इस रिपोर्ट को 2021 में तत्कालीन एसपी ने हरी झंडी दे दी। लेकिन मृतक के परिजन इससे संतुष्ट नहीं थे वह न्याय की लड़ाई लगातार लड़ते रहे।

 

कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच बर्खास्त एसआई रामवीर कुशवाह को कोर्ट लाया गया।

शिकायत के बाद फिर हुई जांच गोपाल कुशवाह द्वारा लगातार की जा रही शिकायतों के चलते जनवरी 2023 में पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट राघौगढ़ के कोर्ट से आदेश लेकर पुलिस ने फिर से जांच शुरू की। इस बार भी जांच शुरू हुई, लेकिन तत्कालीन SDOP ने भी जांच को गति नहीं दी।

इधर रामवीर सिंह आत्माराम मर्डर केस में हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत ले आया। उसने अन्य केसों में फरार होने के बाद भी जब जमानत के जश्न मनाते हुए वीडियो वायरल किए और खुलेआम घूमकर सीधे सरकार को चुनौती दी तो पुलिस मुख्यालय से मिले निर्देश के बाद रामवीर के विरुद्ध दर्ज आपराधिक मामलों की जांच में तेजी आ गई।

एंट्री के लिए चौकी में बंद कर की थी मारपीट माखन की मौत के मामले की जांच राघौगढ़ एसडीओपी द्वारा की जा रही है। अभी तक की गई जांच में पाया गया है कि माखन 18 जून 2015 को कंटेनर लेकर ग्वालियर से देवास की ओर निकला था, जिसकी 21 जून 2015 को जली हुई अवस्था में अस्पताल में मौत होने की रिपोर्ट मिली थी।

इस मामले में गहनता से जांच की गई। महत्वपूर्ण गवाहों के कोर्ट में बयान कराए गए हैं। वारदात के पूरे समय घटनास्थल पर आरोपियों की मौजूदगी पाई गई।

गवाहों के बयान, विभिन्न सबूतों तथा रामवीर सिंह द्वारा तैयार की गई मर्ग रिपोर्ट के असत्य साबित हो जाने से अभी तक की जांच में यह सामने है कि रुठियाई चौकी में मृतक माखन के कंटेनर को अवैध रूप से रोका गया था।

उससे पैसे छुड़ाए गए तथा उस पर केस बनाने की धमकी देकर और रुपए मंगाने के लिए उसके साथ मारपीट की गई थी। इस अपराध में स्वयं की संलिप्तता को छुपाने के लिए आरोपी रामवीर सिंह कुशवाह और प्रधान आरक्षक हरिमोहन सिंह परिहार ने न केवल वारदात के सबूत मिटाए, बल्कि झूठी रिपोर्ट्स भी तैयार की।

साथ ही, दूसरे ड्राइवर हरदास के जरिए मृतक के परिजनों को झूठी सूचना दी। इस अपराध की जांच अभी जारी है, जिसमें आरोपियों की संख्या बढ़ने और कई चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं।

कोर्ट से वापस ले जाते समय भी सुरक्षा के साथ बर्खास्त एसआई रामवीर कुशवाह को ले जाया गया।

वो दो सवाल जिनके जवाब नहीं मिले

  1. मृतक की शिनाख्त कैसे की?: सबसे बड़ा सवाल यही है कि मृतक माखन कुशवाह की शिनाख्त पुलिस ने कैसे की। क्योंकि रूठियाई चौकी में दर्ज रोजनामचे के अनुसार पुलिस ने जब 20 जून को बॉडी को अस्पताल भिजवाया, तब उसे अज्ञात ही लिखा था। थाना प्रभारी ने जब मौके का निरीक्षण किया, उसकी रिपोर्ट रोजनामचे में दर्ज की, तब भी उन्होंने अज्ञात व्यक्ति ही लिखा। जिला अस्पताल के वार्ड बॉय की सूचना पर कोतवाली थाने में जो मर्ग दर्ज किया गए, वह भी अज्ञात ही था।
  2. पत्नी वियोग में सुसाइड की बात कहां से आई?: 22 जून को थाना प्रभारी हवाले से बताया गया कि मृतक का नाम माखन कुशवाह है और उसने पत्नी के वियोग में आत्महत्या की है। सोशल मीडिया पर 21 जून को यह बात सामने, जबकि मृतक माखन का भाई 22 जून को गुना अस्पताल पहुंचा। उसने भी पत्नी के मर जाने की कोई बात पुलिस को नहीं बताई। तो आखिर, पुलिस ने ये जानकारी कैसे दी कि माखन की पत्नी की मौत हो चुकी है, इसलिए उसने पत्नी के वियोग में सुसाइड किया। जबकि माखन की पत्नी आज भी जिंदा है।

फोरेंसिक से मौका निरीक्षण क्यों नहीं कराया? जब भी कोई संदिग्ध मौत होती है, तो पुलिस FSL से मौके का निरीक्षण कराती है। वहां से जरूरी साक्ष्य एकत्रित करती है। इसके बावजूद भी इस मामले में में फॉरेंसिक की टीम को मौके पर नहीं बुलवाया गया। केवल थाना प्रभारी ने मौके का निरीक्षण किए। रोजनामचे के अनुसार वो लगभग पांच घंटे मौके पर रहे। इस दौरान वहां से केवल एक बोतल जप्त की, जिसमें से डीजल की दुर्गंध आ रही थी।

पुलिस ने इस मामले में घटनास्थल पेट्रोल पंप के CCTV भी नहीं निकलवाए। न ही कोई वीडियो जप्त की। जब भी कोई असामान्य मौत होती है, तो बॉडी के फोटोग्राफ लिए जाते हैं, लेकिन इस मामले में ऐसा भी नहीं किया गया। वहीं मृतक के मोबाइल की CDR भी नहीं निकलवाए गई। यह पता करने का प्रयास ही नहीं किया गया कि माखन की किससे और कब बात हुई थी।

इस मामले में राघौगढ़ SDOP दीपा डोडवे ने बताया कि माखन कुशवाह को सुसाइड के लिए उकसाने और लापरवाही के मामले में आरोपी रामवीर कुशवाह को गिरफ्तार किया गया है। आगे की जांच जारी है।

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