CBI अफसर से लेकर IAS तक, फर्जी पहचान से ग्वालियर का मनोज बनाता रहा लोगों को शिकार मेट्रिमोनियल साइट्स के जरिए की करोड़ों की ठगी

ग्वालियर में एक 12वीं फेल ठग ने पुलिस के बड़े-बड़े अफसरों को हैरत में डाल दिया है। वह मेट्रिमोनियल वेबसाइट से लड़कियों के नंबर निकालकर उनसे संपर्क करता था। फिर खुद को सीबीआई अधिकारी, गृह मंत्रालय में अफसर या फिर कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त होने का बताकर लड़कियों के परिवार पर इम्प्रेशन डालता था। लग्जरी कार से उनके घर पहुंचता था। कार में हूटर, अधिकारी के पद की नेम प्लेट लगी होती थी।

आरोपी ने खुद को कैबिनेट मंत्री का दर्जा मिलने के पोस्टर भिंड में लगवा दिए थे।

जाल में फंसाने के बाद नौकरी, सरकारी ठेका या मंत्रालय में बड़े काम की डील का झांसा देकर लाखों रुपए की ठगी करता था। हाल ही में उसने फूड इंस्पेक्टर बनवाने के नाम पर 9 लाख रुपए और कार फाइनेंस करवाई थी। यही नहीं 9 महीने पहले खुद को कैबिनेट मंत्री दर्जा प्राप्त बताकर भिंड में सड़कों पर पोस्टर लगवा दिए थे। उस समय भाजपा नेता की शिकायत पर उस पर FIR हुई थी।

भिंड में फर्जी नंबर प्लेट के साथ आरोपी मनोज श्रीवास उर्फ मोहित पकड़ा गया था।

कभी मंत्री का भतीजा तो कभी फर्जी अफसर

4 जुलाई को पुलिस ने स्टेशन ग्वालियर के बजरिया स्थित एक मॉल से एक फरियादी की सूचना पर शातिर ठग को पकड़ा था। आरोपी ने सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इंवेस्टिेगेशन (CBI) का अधिकारी बनकर फूड इंस्पेक्टर बनवाने का झांसा दिया और 9 लाख रुपए ठगे थे। ठगने वाले से उसकी पहचान मेट्रिमोनियल वेबसाइट पर उसकी बहन के जरिए हुई थी।

ग्वालियर के जनकगंज इलाके में केंद्रीय मंत्री का भतीजा और सीबीआई अफसर बनकर ठगी करने वाले मनोज श्रीवास उर्फ मोहित सिंह शेखावत के कारनामे अब धीरे-धीरे खुलने लगे हैं।

आरोपी के ग्वालियर में पकड़े जाने के बाद यूपी के आगरा से एक परिवार ने भी पुलिस से संपर्क किया है। उन्होंने बताया है कि मनोज ने उनसे भी आगरा में भी सीबीआई अफसर होने का झांसा देकर शादी की बात की थी। चार लाख रुपए वह वहां से भी ठग चुका था।

फर्जी CBI अधिकारी बनकर मनोज ने मोहित नाम से फर्जी आईडी कार्ड बनाकर ठगा

कैबिनेट मंत्री बनवाने के लगवाए थे पोस्टर

सीएसपी मनीष यादव ने बताया कि आरोपी को पूछताछ के लिए तीन दिन की रिमांड पर लिया है। आरोपी के खिलाफ भिंड में भी कैबिनेट मंत्री बनने का मामला दर्ज है। वहां पर उसने खुद के मंत्री बनने के होर्डिंग भी लगा दिए थे।

पता लगा है कि सितंबर 2024 में भिंड के गोहद में आरोपी मनोज श्रीवास पूरे गोहद में अपने पोस्टर लगवा दिए थे। जिसमें मध्य प्रदेश राज्य राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग और दिव्यांगजन वित्त एवं विकास निगम में कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्रदान होना बताया गया था।

पोस्टर में एक तरफ मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, दूसरी तरह केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर के फोटो लगे थे। जब यह पोस्टर भाजपा नेताओं ने देखे तो तत्काल मामले की शिकायत की। जिस पर कलेक्टर भिंड के आदेश पर आरोपी पर मामला दर्ज हुआ था।

 

GAD में पदस्थ IAS के नाम से फर्जी आदेश

9 महीने पहले भिंड में सोशल मीडिया पर सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) में पदस्थ आईएएस शैलबाला मार्टिन के नाम से एक आदेश वायरल हुआ था। इसमें लिखा था कि राज्य सरकार ने डॉ. मनोज सिंह को मप्र राज्य राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग और दिव्यांगजन वित्त और विकास निगम में कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्रदान किया है।

मनोज‎ सिंह के नाम से मालनपुर क्षेत्र में ‎अचानक होर्डिंग लग गए। इनमें कैबिनेट ‎मंत्री का दर्जा मिलने पर बधाई दी जा रही थी। जो आदेश सोशल मीडिया पर सामने आया, उसमें‎ कई अशुद्धियां थी। इस लेटर की शुरुआत में‎ ‘वल्लभ’ भवन को ‘वल्लाभ’ भवन लिखा है।

इसके ‎अलावा लेटर में शब्दों का क्रम भी सही ढंग से ‎नहीं था। नियमानुसार किसी भी आयोग में अध्यक्ष‎ की नियुक्ति की जाती है, लेकिन सीधे कैबिनेट मंत्री का दर्जा जैसी बात कहीं नहीं लिखी होती है। उस आदेश में सीधे तौर पर लिखा था। जिस पर वह पकड़ा गया था।

गाड़ियों पर फर्जी नेम प्लेट लगाकर लोगों पर रौब झाड़ता था।

युवतियों के रिश्ते देखकर करता था संपर्क

आरोपी मेट्रिमोनियल साइट से शादी के लिए आने वाले युवतियों के विज्ञापनों से उनके नंबर लेता था। इसके बाद वह उनके परिजनों से संपर्क करता था। फिर लग्जरी कार से उनके घर जाता था। अफसर का कार्ड और मंत्री का रिश्तेदार बताने से लोग झांसे में आ जाते थे।

गाड़ियों पर कभी किसी मंत्रालय की नेम प्लेट रहती थी तो कभी मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष के नाम की नेम प्लेट रहती थी। अपने जाल में बड़े घर की लड़कियों के परिजन को फंसाकर ठगी का ताना बाना बुनता था।

12वीं फेल है, इंटरनेट से सीखा तरीका पुलिस रिमांड पर आरोपी मनोज श्रीवास उर्फ मोहित सिंह शेखावत ने बताया है कि वह 12वीं फेल है। उसके बाद भी उसने इंटरनेट पर वीडियो देख-देखकर ठगी करना सीखा। यू-ट्यूब पर क्राइम सीरियल देखता था।

इंटरनेट पर ही उसने सीबीआई और अन्य मंत्रालयों के फर्जी आईडी कार्ड बनाने के लिए प्रारूप सर्च किए और अपना कार्ड बनवा लिया। उसकी कार और ठिकाने से पुलिस को कई फर्जी वाहन नेम प्लेट भी मिली हैं।

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