सूट-बूट पर ठहाके से सड़क पर वाटर कैनन तक: मंत्री विजयवर्गीय का छलका दर्द, ठंड में भीगे कांग्रेसी, नशे में ‘परदेसी’ पढ़ाता टीचर और भजन में गूंजा किसानों का दर्द

मजाक-मजाक में छलका मंत्री विजयवर्गीय का दर्द कभी सीएम पद की दौड़ में शामिल रहे मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का दर्द मजाक में ही सही, एक बार फिर छलक पड़ा। विधानसभा के एक दिन के विशेष सत्र में सदन में उन्होंने सीएम डॉ. मोहन यादव और खुद अपने लिए जो बोला, उस पर जमकर ठहाके गूंजे।

हुआ यूं कि अक्सर कुर्ता-पजामा या फिर धोती-कुर्ता में नजर आने वाले सीएम डॉ. मोहन यादव सूट पहनकर विधानसभा पहुंचे थे। ऐसे में मंत्री विजयवर्गीय जब सदन में बोल रहे थे तो उन्होंने कहा- हमारे सीएम तो सूट-बूट में आए हैं और हम मंत्री-विधायक गरीबों जैसी वेशभूषा में हैं।

कांग्रेस ने मंत्री के इस बयान को अलग ही रंग दे दिया। कांग्रेस विधायक महेश परमार ने कहा कि विजयवर्गीय की दिल की बात जुबां पर आ गई। सीएम, मंत्री और विधायकों का ध्यान नहीं रखते। ऐसे में ये उनकी पीड़ा है।

खरी बात ये है कि जब 2023 के चुनावी नतीजे आए थे तो विजयवर्गीय समेत भाजपा के कई सीनियर नेता सीएम पद की दौड़ में शामिल थे। हो सकता है उन्होंने सूट भी सिलवा लिए होंगे, जो रखे रह गए। दर्द तो होगा ही न।

विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान सदन में मंत्री विजयवर्गीय और सीएम डॉ. मोहन यादव।

भरी ठंड में पुलिस ने कांग्रेस नेताओं को नहला दिया भोपाल में भाजपा दफ्तर घेरने जा रहे कांग्रेस नेता और कार्यकर्ताओं को पुलिस ने कड़ाके की ठंड के बीच ठंडे पानी से नहला दिया। पानी में भीगे कार्यकर्ता ठंड से कांपते नजर आए।

दरअसल, नेशनल हेराल्ड केस को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ता प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के नेतृत्व में भाजपा दफ्तर घेरने के लिए निकले थे। लेकिन पहले से पूरी तैयारी के साथ खड़ी पुलिस ने उन्हें काफी दूर पहले ही रोक लिया।

कार्यकर्ताओं ने आगे बढ़ने की कोशिश की तो पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल कर उन्हें खदेड़ा। इस दौरान कई नेता और कार्यकर्ता वाटर कैनन का प्रेशर नहीं झेल पाए। सड़क पर गिर गए। पानी के प्रेशर से एक नेता जी का तो पजामा ही खिसक गया।

मौके पर जीतू पटवारी और कांग्रेस कार्यकर्ताओं की पुलिस से बहस भी हुई। बाद में पुलिस जीतू पटवारी समेत प्रदर्शन कर रहे कार्यकर्ताओं को बस में बैठकर ले गई। अब लोग कह रहे हैं। कांग्रेस का प्रदर्शन तो ऐसा हो गया कि खाया पिया कुछ नहीं, गिलास तोड़ा बारह आना।

भोपाल में वाटर कैनन के प्रेशर से कई कार्यकर्ता गिर पड़े। एक कार्यकर्ता का पजामा खिसक गया।

नशे में धुत टीचर ने म्यूजिकल अंदाज में ली क्लास शराब जब हलक में जाती है तो अच्छे-अच्छे बहक जाते हैं। होश ही नहीं रहता। मंडला के एक स्कूल में एक टीचर का भी कुछ ऐसा ही हाल दिखा। वह नशे की हालत में ही बच्चों को पढ़ा रहा था।

बच्चों को अ से अनार और ए से एप्पल नहीं, बल्कि ‘तुम तो ठहरे परदेसी साथ क्या निभाओगे’ गाना सिखा रहा था। बीच-बीच में अंग्रेजी भी बोली। कभी बच्चों को सीट डाउन कहा तो कभी स्टैंडअप। तो कभी रामधुन भी गाई। टीचर की इस हरकत का किसी ने वीडियो बना लिया।

टीचर महेश कुमार से पूछा तो उसने बेधड़क कहा- हां मैंने शराब पी है। बीना पीए मेरा दिमाग गोल हो जाता है।

खरी बात ये है कि आप इस वीडियो को देखकर अंदाजा लगा सकते हैं कि हमारे दूरस्थ अंचलों में शिक्षा व्यवस्था का क्या हाल है। जो टीचर शराब के नशे में धुत है, वह बच्चों को क्या पढ़ाएगा। भई ये तो सरासर नौनिहालों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।

मंडला में एक टीचर शराब के नशे में बच्चों को क्लास में पढ़ाते मिला।

गायक ने भजन के जरिए बयां किया किसानों का दर्द प्रदेश में किसानों को मक्का से सही दाम नहीं मिल रहे हैं। ऐसे में बैतूल के रतनपुर में गुरू साहब बाबा मेले में एक भजन गायक ने किसानों का दर्द भजन के जरिए गाकर बयां किया।

महावीर भजन मंडल सोयत जिला सीहोर के कलाकार शंभू चौबे ने गाया- ​​​​​​दद्दा से कह रहे कक्का, कितनी सस्ती कर दी मक्का, लगा है सबको धक्का, कितनी सस्ती कर दी मक्का। किसानों के दर्द पर म्यूजिकल व्यंग्य सुनकर पूरा पंडाल ठहाकों और तालियों से गूंज उठा।

भजन के बोल में किसानों की लाचारी झलक रही थी। बोल कुछ ऐसे थे- भैया मक्का पर भरोसा था पक्का, पर कितनी सस्ती कर दी मक्का… बच्ची की शादी टूट गई है, धोखा दे गई मक्का…

खरी बता ये है कि मक्का का समर्थन मूल्य 2400 रुपए प्रति क्विंटल तय है, लेकिन बाजार में औसतन 1300 रुपए में ही मक्का बिक रही है।

बैतूल में भजन गायक ने मक्का का दाम नहीं मिलने पर किसानों का दर्द बयां किया।

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