
कोरोना महामारी के बढ़ते संक्रमण के बीच कई देशों से अच्छी खबरें भी सामने आ रही हैं। वैक्सीन को लेकर वैज्ञानिकों को मिल रही कामयाबी देखते हुए उम्मीद यही की जा रही है कि आने वाले कुछ महीनों में कोरोना पर काफी हद तक नियंत्रण पा लिया जाएगा। महामारी की गंभीरता और लोगों की जरूरत को देखते हुए रूस और चीन जैसे देशों ने तीसरे चरण का ट्रायल पूरा होने से पहले ही वैक्सीन को मंजूरी दे दी। हालांकि विश्व स्वास्थ्य संगठन की प्रमुख वैज्ञानिक सौम्या स्वामीनाथन के मुताबिक, वैक्सीन की 100 फीसदी सुरक्षा और प्रभावकारिता के बारे में अंतिम चरण के ट्रायल के बाद ही पता चल पाएगा। चीन और रूस में आपातकालीन अप्रूवल के तहत उच्च जोखिम वर्ग के लोगों को वैक्सीन दी जा रही है। वहीं एक अन्य देश में भी अगले महीने से निर्धारित वर्ग के लोगों को वैक्सीन दी जाएगी।
खबरों के मुताबिक, इंडोनेशिया ने पहले चरण में 9.1 मिलियन यानी 91 लाख लोगों को वैक्सीन लगाए जाने की योजना बनाई है। इसी साल नवंबर और दिसंबर के बीच चलाए जाने वाले अभियान के तहत उच्च जोखिम वर्ग के लोगों को वैक्सीन दी जाएगी। इंडोनेशिया स्वास्थ्य मंत्रालय के रोग नियंत्रण और रोकथाम महानिदेशक अचमद युरिएंटो ने इस बात की जानकारी दी है।
पहले चरण में टीकाकरण उन लोगों के समूह पर किया जाएगा, जिनको कोरोना वायरस के संक्रमण का सबसे अधिक खतरा है. इनमें हवाईअड्डे के कर्मचारी, सैनिक और पुलिसकर्मी सहित चिकित्सा और सार्वजनिक सेवा में लगे कर्मचारी शामिल हैं.
18-59 उम्र के लोग होंगे शामिल
अचमद युरिएंटो ने कहा है कि केवल 18 वर्ष से 59 वर्ष की आयु के लोगों को वैक्सीन दी जाएगी, क्योंकि इसी आयुवर्ग पर क्लीनिकल ट्रायल हुए हैं। इस आयु सीमा से बाहर के लोगों पर क्लिनिकल ट्रायल नहीं किया गया है। मालूम हो कि इंडोनेशिया वर्तमान में चीन और दक्षिण कोरिया के साथ वैक्सीन विकास सहयोग पर काम कर रहा है।
जल्द शुरू होगा टीकाकरण
चीन और रूस की ही तरह इंडोनेशिया में भी आपातकालीन अप्रूवल के तहत ही वैक्सीन दी जाएगी। सार्वजनिक उपयोग के लिए अनुमति अंतिम चरण के ट्रायल परिणाम की समीक्षा के बाद दी जाती है। खबरों के मुताबिक, इंडोनेशियाई ड्रग एंड फूड सुपरवाइजरी एजेंसी द्वारा आपातकालीन उपयोग की अनुमति और इंडोनेशियन उलेमा काउंसिल (MUI) द्वारा प्रमाणीकरण मिलने के बाद टीकाकरण शुरू किया जाएगा।