गुड़ी पड़वा कब है , कैसे मनाते हैं गुड़ी पड़वा जानें( डाँ. अशोक शास्त्री )

गुड़ी पड़वा कब है , कैसे मनाते हैं गुड़ी पड़वा जानें( डाँ. अशोक शास्त्री )
मालवा के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य डाँ. अशोक शास्त्री ने एक विशेष चर्चा मे बताया कि पौरााणिक दृष्टि से सबसे महत्‍वपूर्ण माना जाने वाले चैत्र मास का आरंभ हो चुका है और चैत्र मास के शुक्‍ल पक्ष की प्रतिपदा से हिंदू नववर्ष की शुरुआत होती है और महाराष्‍ट्र में इस तिथि को उगादि कहते हैं और इस दिन यहां गुड़ी पड़वा का त्‍योहार मनाया जाता है । गुड़ी पड़वा नई फसल के आगमन की खुशी मनाने का त्‍योहार है और कई राज्‍यों में इसे फसल दिवस के रूप में मनाते हैं । डाँ. अशोक शास्त्री के अनुसार इस साल गुड़ी पड़वा 13 अप्रैल को है और गोवा महाराष्‍ट्र के साथ ही अन्‍य दक्षिण भारत के कुछ राज्‍यों में इस दिन को विशेष धूमधाम के साथ मनाया जाता है । वहीं उत्‍तर भारत में इस दिन से नवरात्र का आरंभ होता है और 9 दिन तक मां दुर्गा की उपासना का पर्व चलता है। मान्‍यता है कि इस दिन ब्रह्माजी ने सृष्टि की रचना की थी ।
ज्योतिषाचार्य डाँ. अशोक शास्त्री ने गुडी पडवा का महत्व बताते हुए बताया कि इस दिन सृष्टि के रचयिता ब्रह्माजी ने संसार की रचना की थी और बुराइयों का अंत किया था । इस दिन ब्रह्माजी की विशेष रूप से पूजा की जाती है । मान्‍यता है कि इस दिन अपने घर को सजाने और गुड़ी फहराने से घर में सुख समृद्धि आती है और बुराइयों का नाश होता है।
गुड़ी पड़वा का शुभ मुहूर्त
गुड़ी पड़वा की तिथि : 13 अप्रैल 2021
प्रतिपदा का आरंभ : 12 अप्रैल सोमवार को सुबह 8 बजे से
प्रतिपदा तिथि का समापन : 13 अप्रैल, मंगलवार को सुबह 10 बजकर 16 मिनट तक।
ज्योतिषाचार्य डाँ. अशोक शास्त्री ने बताया कि गुडी पडवा की पूजा आरंभ करने से पहले पूरे घर की अच्छी प्रकार से साफ सफाई की जाती है और सूर्योदय से भी पूर्व स्नान किया जाता है । इसके बाद घरों मे मुख्य द्वार को तोरण यानी आम के पत्तों के वंदनवार से सजाया जाता है । उसके बाद गुडी बनाई जाती है और इसे घर के एक हिस्से मे शुभ दिशा देखकर लगाया जाता है ।
डाँ. अशोक शास्त्री के मुताबिक गुडी का अर्थ होता है विजय पताका और इसे विजय प्रतिक के रुप मे लगाया जाता है । माना जाता है कि इस दिन शालिवाहन ने मिट्टी के सैनिकों की सेना तैयार की थी और इससे शत्रुओं का पराभाव किया था । डाँ. शास्त्री के अनुसार इसी के प्रतीक के रुप मे महाराष्ट्र मे यह त्यौहार गुडी पडवा के रुप मे मनाया जाता है जबकि आंध्रप्रदेश , कर्नाटक , और तमिलनाडु मे इसे उगादि के रुप मे मनाया जाता है । महाराष्ट्र मे इस दिन घरों मे पारंपरिक व्यंजन जैसे पूरन पोली , श्रीखंड , केशरिया भात ( मीठे चावल ) , आदि बनाए जाते है । इस दिन लोग नए वस्त्र पहनकर खुशियां मनाते है और रिश्तेदारों को अपने घर आमंत्रित करते है । ( डाँ. अशोक शास्त्री )

ज्योतिषाचार्य
डाँ. पं. अशोक नारायण शास्त्री
श्रीमंगलप्रद् ज्योतिष कार्यालय
245 , एम. जी. रोड ( आनंद चौपाटी ) धार , एम. पी.
मो. नं. 9425491351

–: शुभम् भवतु :–

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