गुरुग्राम में एमसीए पास युवक ने अपनी गर्लफ्रेंड के साथ क्वालिटी टाइम स्पेंड करने के लिए 5 महीने से ज्यादा समय तक लग्जरी अपार्टमेंट रेंट पर लिया। चेक आउट करते समय युवक फर्जी यूपीआई एप से फर्जी पेमेंट करके चलता बना।
आरोपी हिमांशु ने चेक आउट के दौरान फर्जी यूपीआई एप से पेमेंट किया था- फाइल फोटो।
होटल के अकाउंट में जब यह पेमेंट नहीं पहुंची तो मामला उजागर हुआ। होटल लाइम ट्री के डायरेक्टर की शिकायत पर एफआईआर दर्ज कर सेक्टर 53 पुलिस ने आरोपी को अरेस्ट किया।
पूछताछ में आरोपी ने खुलासा किया कि उसने यूट्यूब से सीखकर फर्जी फोनपे एप डाउनलोड किया था। इसके बाद उसने सात बार में 6.17 लाख रुपए की फर्जी ट्रांसजेक्शन की। आरोपी की पहचान सोहना के 26 वर्षीय हिमांशु के तौर पर हुई।

पुलिस गिरफ्त में आरोपी हिमांशु।
पांच प्वाइंट में समझिए हिमांश ने कैसे किया फर्जीवाड़ा…
- फेक फोनपे ऐप्लिकेशन का इस्तेमाल: यूट्यूब पर एक वीडियो से सीख कर अपने मोबाइल में फर्जी PhonePe ऐप इंस्टॉल किया। इस ऐप में सिर्फ QR स्कैनर काम करता था, बाकी सभी फीचर्स निष्क्रिय रहते थे। जिससे पेमेंट ट्रांसफर का भ्रम बनाया जाता था।
- फर्जी ट्रांजेक्शन स्क्रीनशॉट बनाना: फेक ऐप से QR कोड स्कैन करने के बाद वह स्क्रीनशॉट लेता था, जिसमें पेमेंट सफल दिखाई देता था। इसमें फर्जी यूटीआर नंबर, ट्रांजेक्शन आईडी और समय जैसी डिटेल्स शामिल होती थीं, जो असली जैसी लगती थीं।
- व्हाट्सएप पर स्क्रीनशॉट भेजना: होटल मैनेजर या स्टाफ को व्हाट्सएप के जरिए यह फर्जी स्क्रीनशॉट भेजता था और कहता था कि पेमेंट हो चुका है। इससे होटल वाले को लगता था कि राशि उनके अकाउंट में आ गई है।
- फेक मैसेज भी भेजा: इस फर्जी एप द्वारा एक मैसेज उस नंबर भेजा जाता था, जो बैंक से लिंक होता है। ऐसे में होटल डायरेक्टर और स्टाफ को ट्रांजेक्शन पर शक नहीं हुआ। जिसके कारण आरोपी आसानी से चेक आउट करके चला गया।
- बैंक ट्रांसफर न होने पर भी भ्रम बनाया: होटल के बैंक अकाउंट, पाइन लैब एग्रीगेटर या किसी भी वैध पेमेंट गेटवे में एक भी रुपया नहीं पहुंचा। जब हिमांशु को कॉल की गई तो उसने अपने बैंक अकाउंट से रुपए ट्रांसफर होने के फर्जी मैसेज भेजें।

पांच महीने तक होटल में रुका
शिकायतकर्ता तपेश कुमार ने बताया कि वह लाइम ट्री होटल्स सर्विस अपार्टमेंट कंपनी के निदेशक हैं। उनका एक होटल डीएलएफ फेज-5 में है। सोहना का रहने वाला हिमांशु नाम का शख्स उनके सर्विस अपार्टमेंट में 4 अक्टूबर 2025 से 7 अक्टूबर 2025 तक और फिर 15 अक्टूबर 2025 से 24 फरवरी 2026 तक ठहरा था।
हिमांशु ने रहने के दौरान कई बार भुगतान के लिए फर्जी UPI ऐप का इस्तेमाल किया। उसने वॉट्सएप के माध्यम से सफल भुगतान की स्क्रीनशॉट भेजीं, लेकिन कंपनी के बैंक खाते या पाइन लैब एग्रीगेटर स्टेटमेंट में कोई राशि जमा नहीं हुई।

ऐसे चढ़ा पुलिस के हत्थे…
- पता फर्जी, लोकल कनेक्शन मिला: हिमांशु ने होटल में दिया गया पता फर्जी बताया, लेकिन वह सोहना का मूल निवासी था। पुलिस ने लोकल जांच, होटल के रिकॉर्ड, वॉट्सएप नंबर और अन्य डिजिटल ट्रेल्स से उसकी लोकेशन ट्रेस की।
- साइबर क्राइम सेल की मदद से ट्रेसिंग: जांच अधिकारी ने साइबर क्राइम सेल से संपर्क किया। फर्जी यूटीआर नंबर, ट्रांजेक्शन आईडी, इस्तेमाल मोबाइल नंबर और ऐप के डेटा की ट्रेसिंग की गई। आरोपी के फोन में फेक फोन-पे ऐप भी था, जो सबूत बना।
- डीएलएफ फेज-5 से गिरफ्तारी: जांच के आधार पर पुलिस टीम ने 25 फरवरी 2026 को डीएलएफ फेज-5, गुरुग्राम से हिमांशु को काबू कर लिया। उसके कब्जे से वारदात में इस्तेमाल एक मोबाइल फोन बरामद हुआ। गुरुवार को उसे कोर्ट में पेश कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
