इधर उपलब्धियों का संसार, उधर खामियों का बाजार…
मध्यप्रदेश विधानसभा सत्र का पहला दिन 10 मार्च 2025, सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के लिए खुशियों भरा रहा। सरकार ने राज्यपाल के अभिभाषण के जरिए जहां किसानों के लिए किए गए कार्यों का विस्तार से ब्यौरा दिया। तो विपक्ष ने सदन के बाहर सरकार को किसान विरोधी ठहराने का पुरजोर प्रयास किया। तो कांग्रेस का मंच टूटने से कई नेता घायल हो गए। संक्षिप्त में यही कहा जा सकता है कि सरकार के पास किसानों के लिए किए गए कार्यों की उपलब्धियों का पूरा संसार जमा था, तो कांग्रेस के पास किसान विरोधी सरकार हैसटैग के साथ उन सभी खामियों का बाजार था जो सरकार को कटघरे में खड़ा करने को लालायित थे। हालांकि कांग्रेस का दिन मंच टूटने और कार्यकर्ताओं के घायल होने से निराशा से भर गया, तो मोहन सरकार का दूसरा ब॒जट पेश होने की खुशी से भाजपा उत्साहित नजर आती रही।
मोहन सरकार ने किसानों के लिए साल भर किए गए कार्यों का लेखा-जोखा राज्यपाल के अभिभाषण के जरिए सामने रखा। बताया गया कि मोदी के ‘ज्ञान’ में नारी की भागीदारी का जिक्र आया था। इसलिए मोहन सरकार ने किसान कल्याण मिशन का गठन कर दिया। इसमें किसानों की उपज को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा में लाना है। बताया गया कि मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के जरिए प्रदेश के 80 लाख से अधिक किसानों को हर साल 6 हजार रुपये दिए जा रहे हैं। किसानों से गेंहू 2600 रुपए प्रति क्विंटल, धान उत्पादक किसानों को उपार्जन प्रक्रिया पूरा करने पर 4 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर प्रोत्साहन, सोयाबीन 4 हजार 892 रुपए प्रति क्विंटल के समर्थन मूल्य मूल्य पर खरीदी की जानकारी दी गई। मोहन सरकार द्वारा शुरू की गई रानी दुर्गावती श्री अन्न योजना के तहत कोदो-कुटकी के उपार्जन के लिए महासंघ का गठन किया है। इन्हें 3900 रुपए प्रति हेक्टेयर राशि सरकार देगी। तीन साल में किसानों को 30 लाख सोलर पंप दिए जाएंगे। 5 रुपये में बिजली का स्थायी कनेक्शन किसानों को दिया जाएगा। उद्यानिकी का रकबा 20 लाख से बढाकर 30 लाख हेक्टेयर कर मध्यप्रदेश को अव्वल बनाने का संकल्प लिया है। सिंचाई का रकबा चार साल में 50 लाख हेक्टेयर से बढाकर 100 लाख हेक्टेयर करने की बात सरकार कर रही है। माइक्रो सिंचाई में 7 लाख हेक्टेयर के साथ प्रदेश अव्वल है। मध्यप्रदेश को डेयरी कैपिटल के रूप में विकसित करने का लक्ष्य है। गौ, गौशाला की पूरी चिंता सरकार कर रही है। तो सरकार ने खुद को किसान हितैषी साबित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। सरकार इसके लिए मोदी के नेतृत्व में समावेशी विकास के लिए केंद्र सरकार की नीतियों और योजनाओं के प्रति कृतज्ञ नजर आई।
वहीं कांग्रेस ने सरकार को किसान विरोधी बताते हुए विधानसभा का घेराव और प्रदर्शन किया। यह बात और है प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस का मंच टूटा और नेता घायल हो गए। कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक का ट्वीट आया कि किसान कांग्रेस के कार्यक्रम में मंच टूटने से जो नेता घायल हुए थे, भगवान की कृपा से सभी अब स्वस्थ हैं। इस दुर्घटना में राजीव सिंह जी को सबसे अधिक चोट आई। उनका ऑपरेशन कर डॉक्टरों ने पुष्टि की है कि वे अब पूरी तरह खतरे से बाहर हैं। खैर किसानों को लेकर कांग्रेस के मप्र प्रभारी हरीश चौधरी ने कहा कि प्रदेश ही नहीं देश के किसानों की स्थिति बेहद दयनीय है। किसानों पर लगातार अत्याचार हो रहे हैं। किसान अपनी जायज मांगों को लेकर प्रदेश से लेकर देश भर में आंदोलन कर रहा है। किसानों पर दमन इस कदर बरपाया जा रहा है कि कभी उन्हें कुचला जा रहा है तो कभी उनके रास्तों पर कीले बिछायी जा रही है। कांग्रेस पार्टी किसानों के लिए न्याय दिलाने के लिए अपनी लड़ाई निरंतर जारी रखेगी। पटवारी ने कहा कि किसानों को गेहूं के दाम 2700 रू., धान के दाम 3100 रू. और सोयाबीन के 6000 रू. देने का सरकार ने किसानों से वादा किया था, किसानों से भाजपा सरकार ने जो वादे किये थे उन वादों से वह पूरी तरह मुकर गई है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि किसान दर-दर की ठोकरें खाने पर मजबूर हैं, किसानों को उचित समर्थन मूल्य नहीं दिया जा रहा और भाजपा सरकार इंवेट, विज्ञापनबाजी और दिखावे में मसगूल है। भाजपा सरकार की तानाशाही और किसान विरोधी रवैये के खिलाफ कांग्रेस का यह संघर्ष जारी रहेगा। जब तक किसानों को न्याय नहीं मिलता, तब तक कांग्रेस सड़कों से लेकर सदन तक लड़ाई लड़ेगी।
तो फिर बात वही कि किसानों को लेकर जहां मोहन सरकार के पिटारे में उपलब्धियों का संसार गिटार बजा रहा है। सत्तापक्ष किसानों के संग कभी ढोलक बजा रहा है तो कभी नाचकर खुशियां मना रहा है। तो कांग्रेस के विपक्षी नजरिए में किसान त्राहिमाम त्राहिमाम कर कराह रहा है और सरकार झूठ का राग अलाप रही है। कांग्रेस खामियों के बाजार की पोटली को सिर पर रखकर सरकार को वाटर कैनन की बौछारें पीकर और आंसू गोले खा-खाकर कोसने में लगी है। अभी चुनाव आने में चार साल हैं, तब तक ऐसे दृश्य देखने को मिलते रहेंगे। विधानसभा सत्र के समय उपलब्धियों-खामियों के तराने गूंजते रहेंगे…।
कौशल किशोर चतुर्वेदी
कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। दो पुस्तकों “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।
वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।