
- फर्जी प्रमाण पत्र पेश करने पर एमपीसीए ने अंडर-19 के दावेदार को किया था आजीवन प्रतिबंधित
हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने क्रिकेट खिलाड़ी मयंक अवस्थी को बड़ी राहत दी है। छात्र ने अंडर-19 में खेलने के लिए मध्यप्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (एमपीसीए) को 19 की उम्र साबित करने के लिए 2017-18 में जन्म प्रमाण पत्र दिया था। यह प्रमाण पत्र उसने भोपाल की नगर निगम से जारी होना बताकर पेश किया था।
एमपीसीए ने नियमानुसार जन्म प्रमाण की जांच कराने के लिए इसे भोपाल नगर निगम को भेजा। वहां से जानकारी एमपीसीए को मिली कि उक्त जन्म प्रमाण पत्र नगर निगम का नहीं है। उसमें जो जावक क्रमांक है वह निगम ने कभी जारी ही नहीं किया। इस पर एमपीसीए ने खिलाड़ी पर आजीवन प्रतिबंध लगा दिया था। इस आजीवन प्रतिबंध को उसने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।
जस्टिस प्रणय वर्मा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई थी। छात्र की ओर से दायर की गई याचिका में उल्लेख किया गया कि एमपीसीए ने नियमों से विपरीत जाकर आजीवन प्रतिबंध लगाया है। जन्म की तारीख और समय सही है। भोपाल नगर निगम ने ही उसे जारी किया था, लेकिन वहां एंट्री क्यों नहीं हुई इसकी उन्हें जानकारी नहीं है। वहीं एमपीसीए का नियम है कि वह गलत दस्तावेज होने पर दो साल का प्रतिबंध लगा सकता है। आजीवन प्रतिबंध लगाने का नियम नहीं है।
उल्लेखनीय है कि हाई कोर्ट में इस तरह के करीब 10 खिलाड़ियों ने याचिका दायर कर रखी थी। हाई कोर्ट के इस आदेश से याचिकाकर्ता अन्य उम्र समूहों की प्रतियोगिताओं में भाग ले सकेगा। वहीं अन्य खिलाड़ियों को इस आदेश से लाभ मिलेगा। एमपीसीए के अधिवक्ता अजय बागड़िया का कहना है कि आदेश के अध्ययन करने के बाद तय किया जाएगा कि इसकी अपील की जाए या नहीं?
एमपीसीए का तर्क: तो अन्य खिलाड़ी का हक मारा जाता
एमपीसीए की ओर से कहा गया कि हमारी हर खिलाड़ी के लिए एक जैसी प्रक्रिया है। उम्र सत्यापन के लिए दस्तावेज भी अधिकृत ही मान्य किए जाते हैं। फर्जी जन्म प्रमाण पत्र के आधार पर याचिकाकर्ता को खिलाया जाता तो किसी अन्य हकदार खिलाड़ी का हक मारा जाता। ऐसे में एमपीसीए द्वारा जो निर्णय लिया गया था वह बिलकुल सही था। हाई कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद खिलाड़ी के पक्ष में फैसला दिया। कोर्ट ने माना कि जन्म का समय और तारीख सही है। इस आधार उसे एमपीसीए की खेल गतिविधियों में भाग लेने दिया जाए।