
देश कोरोना वायरस संक्रमण की दूसरी लहर से जूझ रहा है. अस्पतालों में बिस्तर नहीं है, तो मेडिकल ऑक्सीजन के मारामारी है, लेकिन संक्रमण के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं. स्वास्थ्य व्यवस्था पर भारी दबाव है और एक्सपर्ट कोरोना के हल्के लक्षणों वाले लोगों को होम आइसोलेशन की सलाह दे रहे हैं. ऐसे में सवाल ये है कि एक व्यक्ति को होम आइसोलेशन में कब तक रखा जाए? इस सवाल का जवाब शुक्रवार को स्वास्थ्य मंत्रालय की कोरोना वायरस पर हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में एम्स के डायरेक्टर रणदीप गुलेरिया ने दिया.
सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि अगर दस दिन होम आइसोलेशन में रहने के बाद मरीज (संक्रमित व्यक्ति) में कोई लक्षण नहीं हैं और तीन दिनों से बुखार नहीं है, तो होम आइसोलेशन खत्म किया जा सकता है.
गुलेरिया ने कहा कि होम आइसोलेशन की अवधि समाप्त होने के बाद फिर से कोरोना टेस्ट कराने की कोई आवश्यकता नहीं है। वहीं, कोरोना मरीजों के लिए इस्तेमाल किए जा रहे रेमडेसिविर इंजेक्शन को लेकर गुलेरिया ने अहम बात कही है। गुलेरिया ने कहा कि मरीज को रेमडेसिविर देने का फैसला एक पेशेवर डॉक्टर द्वारा ही लिया जाना चाहिए और इसे अस्पताल में ही लगाया जाना चाहिए। बता दें कि कोरोना वायरस के मरीजों की संख्या में वृद्धि के बाद रेमडेसिविर की डिमांड भी बढ़ गई है। डिमांड बढ़ने की वजह से इसकी किल्लत भी होने लगी है।
386452 नए केस
देश में पिछले 24 घंटे में कोविड-19 के अब तक के सर्वाधिक 3,86,452 नए मामले सामने आए जिसके बाद कुल संक्रमितों की संख्या बढ़कर 1,87,62,976 हो गयी। इसके साथ ही देश में उपचाराधीन मरीजों की संख्या 31 लाख को पार कर गई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा शुक्रवार सुबह आठ बजे तक के आंकड़ों के मुताबिक, 3498 और मरीजों की मौत हो जाने से संक्रमण के कारण अब तक दम तोड़ चुके लोगों की कुल संख्या बढ़कर 208330 हो गई।