“ब्राह्मणों पर टिप्पणी से उपजे विवाद के बीच आईएएस संतोष वर्मा फिर चर्चा में; न्यायालयीन दस्तावेज़ों में महिला जज ने उनके आचरण को पूर्वाग्रहपूर्ण बताया”

ब्राह्मणों को लेकर विवादित टिप्पणी देने वाले आईएएस संतोष वर्मा का विवादों से पुराना नाता है। इससे पहले वे एक पूर्व महिला जज और एक युवती पर भी गंभीर एवं निराधार आरोप लगा चुके हैं। न्यायालयीन दस्तावेजों में भी यह उल्लेखित है कि वर्मा की कार्यशैली पूर्वाग्रहपूर्ण रही है और वे अनर्गल आरोप लगाने की प्रवृत्ति रखते हैं।

महिला जज पर लगाए थे झूठे आरोप

आईएएस संतोष वर्मा।

कुटुंब न्यायालय, इंदौर में लंबित एक भरण-पोषण प्रकरण के दौरान आईएएस वर्मा ने पीठासीन महिला जज के खिलाफ गंभीर और झूठे आरोप लगाए थे। इस पर जज द्वारा 10 अगस्त 2018 को प्रिंसिपल रजिस्ट्रार, इंदौर को पत्र लिखा गया था, जिसमें स्पष्ट उल्लेख था कि संतोष वर्मा द्वारा पीठासीन अधिकारी पर मिथ्या, अनर्गल और आधारहीन आक्षेप लगाए गए हैं।” जज ने लिखा था कि ऐसी स्थिति में यदि कोई भी आदेश पारित किया जाता है तो वर्मा पक्ष पूर्वाग्रह का आरोप लगा सकता है, इसलिए प्रकरण को दूसरे न्यायालय में स्थानांतरित किए जाने का निवेदन किया गया था। वर्मा द्वारा हाई कोर्ट में दायर याचिका क्रमांक 2644/2018 भी खारिज कर दी गई थी। इससे स्पष्ट हुआ कि वे पूर्व में भी न्यायालय पर गलत आरोप लगाते रहे हैं।

सत्र न्यायाधीश की सख्त टिप्पणी

1 सितंबर 2021 को वर्मा द्वारा एमजी रोड थाने के अपराध क्रमांक 155/2021 में दर्ज प्रकरण में जमानत आवेदन लगाया गया था, जिसमें संबंधित युवती और शासन ने कड़ा विरोध किया।

3 सितंबर 2021 को सत्र न्यायाधीश विकास शर्मा ने जमानत आवेदन खारिज कर कड़ी टिप्पणी की। उन्होंने लिखा था-“क्या यह प्रकरण कानून का राज ध्वस्त करने के असफल प्रयास का उदाहरण है? क्या न्यायिक प्रशासन को चुनौती देना न्यायिक द्रोह की श्रेणी में आ सकता है? जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों से अपेक्षा है कि वे न्यायालयों के प्रति सम्मान बनाए रखें।”

शिकायतकर्ता युवती पर भी कराई एफआईआर

आईएएस संतोष वर्मा विवाद के बाद आरोप लगाने वाली महिला को ट्रोल किया गया था।

आईएएस वर्मा से विवाद के बाद संबंधित युवती के खिलाफ भी वर्मा द्वारा फर्जी वोटर आईडी और पासपोर्ट आवेदन में गलत जानकारी देने की शिकायत कराई गई। इस पर लसूडिया पुलिस ने 5 मार्च 2021 को धारा 420, 467, 468, 471 के तहत एफआईआर दर्ज की। जिला अदालत ने युवती की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की थी, लेकिन हाई कोर्ट से उसे राहत मिल गई। मामला अभी पुलिस विवेचना में है। युवती के आरोप और इस मामले के बाद युवती को भी सोशल मीडिया पर काफी ट्राेल किया गया था। इंदौर के अधिवक्ताओं ने सोशल मीडिया पर अपना गुस्सा निकाला था।

एससी-एसटी एक्ट का भी दुरुपयोग युवती की ओर से वर्मा की मां द्वारा किए गए जातिसूचक टिप्पणी संबंधी आरोपों की जांच भी हुई थी, जिसमें एससी-एसटी एक्ट के तहत कोई अपराध सिद्ध नहीं हुआ। जांच में शिकायत बेबुनियाद पाई गई।

सोशल मीडिया में महिला के साथ उस विवाद को काफी ट्रोल किया गया था।

समझौते के बाद भी चल रहे विवाद सूत्रों के अनुसार, वर्मा और युवती के बीच आपसी समझौता हो चुका है, हालांकि कुछ मामलों में समझौता लंबित है। ब्राह्मणों पर वर्मा की हालिया विवादित टिप्पणी के बाद जिला न्यायालय के वकीलों ने कड़ा विरोध जताया। इसी दौरान युवती सोशल मीडिया पर आईएएस वर्मा के समर्थन में दिखी, जिसके बाद वह अभिभाषक समुदाय के निशाने पर आ गई। पूर्व अभिभाषक संघ अध्यक्ष दिनेश पांडे ‘गुरु’ सहित कई वकीलों ने युवती को “अवसरवादी”, “मौकापरस्त” बताते हुए पोस्ट कर विरोध दर्ज किया।

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