रतलाम के बोधि इंटरनेशनल स्कूल की तीसरी मंजिल से 8वीं का एक छात्र कूद गया। शुक्रवार सुबह करीब 10 बजे हुई इस घटना के बाद स्कूल में अफरा-तफरी मच गई। बच्चे को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया। उसकी हालत अब ठीक है।
क्लास रूम की रील बनाकर सोशल मीडिया पर पोस्ट करने को लेकर हुआ यह घटनाक्रम स्कूल में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गया। इसमें बच्चे के प्रिंसिपल रूम में जाने से लेकर गलियारे से भागने और तीसरे माले से कूदना तक शामिल है।
प्रिंसिपल रूम बच्चा करीब 4 मिनट रहा और इस दौरान उसने 52 बार (Sorry) अपनी गलती के लिए माफी मांगी। बच्चे का कहना है कि प्रिंसिपल ने सस्पेंशन के बाद कॅरियर खत्म होने और मेडल छिन जाने की बात कही। कई बार माफी मांगने के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हुई तो मैं काफी डर गया और जो समझ आया, वह कर लिया।
बड़ी बात यह है कि बच्चा जिस वक्त कूदा पिता स्कूल के वेटिंग रूम में बैठे हुए थे। घटनाक्रम के बाद वे दौड़कर मौके पर पहुंचे। प्रिंसिपल रूप से निकलने से लेकर कूदने तक का पूरा घटनाक्रम सिर्फ चार मिनट के भीतर हुआ। ने इस पूरे मामले में अस्पताल में भर्ती छात्र, परिवार, स्कूल प्रबंधन और डॉक्टर से बात की
पहले…दाे तस्वीरों में देखिए घटनाक्रम.

प्रिंसिपल रूम में स्टूडेंट बार-बार सॉरी बोलता रहा। इसके बाद वह बाहर चला गया।

क्लास रूम की रील बनाकर सोशल मीडिया पर डाला छात्र ने 27 नवंबर को क्लास रूम में पढ़ाई के दौरान मोबाइल से वीडियो बनाया था, जिसमें बच्चे बैठे हैं और टीचर पढ़ा रही थीं। रील को छात्र ने अपने इंस्टा अकाउंट से पोस्ट किया। कुछ छात्रों ने इसे देख तो क्लास टीचर को सूचना दी।
क्लास टीचर ने रील का स्क्रीन शॉट लेकर प्रिंसिपल को बताया। इस आधार पर शुक्रवार सुबह छात्र को क्लासरूम से प्रिंसिपल ने बुलाया। परिजनों को भी कॉल कर स्कूल आने को कहा। प्रिंसिपल रूम छात्र 9 बजकर 54 मिनट पर पहुंचा। यहां प्रिंसिपल के साथ ही अन्य टीचिंग स्टाफ भी चैंबर में मौजूद रहे।
प्रिंसिपल का लहजा काफी सख्त था। प्रिंसिपल के साथ ही यहां अन्य टीचिंग स्टाफ ने भी छात्र को फटकारा। प्रिंसिपल ने स्कूल से सस्पेंड करने की बात कही। 9 बजकर 58 मिनट यानी 4 मिनट बच्चा कमरे में रहा। इस दौरान यहां डांट फटकार चली। छात्र डर गया और कान पकड़कर सिर झुका कर सॉरी करने लगा। प्रिंसिपल छात्र को स्कूल से सस्पेंड करने की बात कहती है।
पूरा घटनाक्रम स्कूल लगे सीसीटीवी में कैद हो गया, जिसे प्रबंधन ने खुद को दिया। छात्र काफी डरा हुआ दिखा। छात्र लगातार सॉरी भी बोलता रहा, लेकिन प्रिंसिपल ने उसकी बातों को अनसुना कर दिया। इसके बाद छात्र को प्रिंसिपल के रूम के पास वाले क्लास रूम में बैठा दिया गया।

सुबह 9.59 बजे स्कूल पहुंचे पिता, वेटिंग रूम में बैठाया स्कूल की तरफ से सुबह पौने 10 बजे पिता को फोन कर बुलाया, लेकिन कोई कारण नहीं बताया। पिता 15 मिनट में सुबह 9.59 सेकेंड पर स्कूल पहुंचे। स्कूल के वेटिंग रूम में उन्हें बैठाया। शोर मचने पर सुबह 10.03 बजे पिता व स्कूल की दीदी (बाई) अचानक से दौड़े। बाहर बेटा जमीन पर घायल पड़ा दिखा।
पता चला वह तीसरी मंजिल से कूदा है। स्कूल स्टाफ पिता की कार से ही सागोद रोड पर स्थित एक प्राइवेट अस्पताल लेकर पहुंचे। यहां पर प्राथमिक उपचार के बाद 80 फीट रोड स्थित एक अन्य प्राइवेट हॉस्पिटल रैफर कर दिया गया।

बच्चा बोला- टीचर ने कहा तुम ऐसे ही रहोगे बच्चे ने बताया कि सुबह असेंबली के बाद प्रिंसिपल मैडम ने कहा- 8वीं क्लास को छोड़कर बाकी सब बच्चे क्लासरूम में चले जाएं। मुझे उनसे कुछ बात करना है। बच्चों के जाने के बाद तीन-चार टीचर मेरे पास आए और बोले- तुम फोन लेकर आए थे। मैंने कहा- हां, गलती से लेकर आ गया था। इसके बाद उन्होंने प्रिंसिपल मैडम के पास जाने को कह दिया।
मैंने टीचर से कहा- अगली बार से ऐसा नहीं करूंगा, तब एक टीचर ने कहा कि अगली बार तुम्हारा आता ही नहीं है, तुम ऐसे ही रहोगे। वे मुझे प्रिंसिपल मैम के पास ले गए।
मैने प्रिंसिपल मैम को कहा- सॉरी मैम…। अब से मैं ऐसा कुछ नहीं करूंगा। प्रिंसिपल मैम ने कहा कि तुम्हारा कुछ नहीं हो सकता। तुम्हें रेस्टिकेट कर देंगे। तुम्हारे पेरेंट्स को बुलाएंगे। तुम्हें घर भेज देंगे।
तुम्हारे पापा आ रहे हैं, फिर तुमसे बात करते हैं एक टीचर ने कहा- स्पोर्ट्स में अच्छा खिलाड़ी है। स्टेट में जा चुका है। गोल्ड मेडल जीत चुका है, तब मैडम ने कहा कि कोई बात नहीं, हमें कोई फर्क नहीं पड़ता कि वह नेशनल में गया है या नहीं। इसे रेस्टिकेट करेंगे। इसके जो भी मेडल हैं, वह रख लेंगे। बाद में उन्होंने मुझे एक क्लास में भेज दिया। बोला कि अभी तुम्हारे पापा आ रहे हैं, फिर तुमसे बात करते हैं।
मैं, डर गया था। मुझे लगा कि प्रिंसिपल मैम सच में ऐसा करेंगी। मुझे स्कूल से बाहर कर देंगे। दूसरे स्कूल में एडमिशन नहीं मिलेगा। इस कारण डर गया। मैं भाग कर गया और कूद गया। मैंने सुसाइड अटेंप्ट किया। मुझे किसी ने धक्का नहीं दिया, अपनी मर्जी से कूदा था।
मैडम ने कहा- तुम्हारा अब कुछ नहीं हो सकता पापा स्कूल आए हैं। मैंने पापा को नहीं देखा था। मेरे दिमाग में यही चल रहा था कि मुझे यहां से निकाल देंगे और कहीं फिर एडमिशन नहीं मिलेगा। इसलिए लगा अब मैं कूद ही जाता हूं। मैंने मैम को कई बार सॉरी भी बोला।
मैंने यह भी कहा कि अगली बार से कुछ भी ऐसा नहीं करूंगा, भले आप मुझे चांटा मार लो, पर मुझे सस्पेंड मत करो। मैडम ने यही कहा- तुम्हारा अब कुछ नहीं हो सकता। अब तुम किसी स्पोर्टस में नहीं जा पाओगे। पापा को बुलाएं और तुम अब अपने घर चले जाओगे।

हंसी-मजाक में वीडियो बनाया था क्लासरूम का वीडियोछात्र ने बताया कि दोस्तों के कहने पर मस्ती में क्लासरूम का वीडियो बना लिया था। हंसी-मजाक में वीडियो बना लिया था। पहली बार ही मोबाइल लेकर स्कूल में आया था। गुरुवार को घर से स्कूल जाने के लिए निकला था, लेकिन स्कूल नहीं गया। तीन-चार दोस्तों के साथ था। वे मुझे अपने घर ले गए थे। सभी ने स्कूल से बंक मारने का कहा था। दोस्तों ने कहा- चलो कहीं घूमते हैं, क्या करेंगे स्कूल जाकर।

पिता बोले- बुलाने का कोई कारण हमें नहीं बताया पिता का कहना है कि स्कूल से सुबह फोन आया कि आप स्कूल आ जाइए। बुलाने का कोई कारण हमें नहीं बताया गया। पूछने पर इतना कहा- बच्चे के बारे में बात करना है। मैं स्कूल आया और वेटिंग रूम में बैठ गया। बेटे से मुलाकात नहीं हो पाई। संभवत: उनसे मुझे देखा होगा। करीब 4 मिनट बाद बाहर शोर सुनाई दिया, बाहर आकर देखा तो बेटा घायल हालत में जमीन पर पड़ा था। तत्काल उसे कार से अस्पताल लेकर पहुंचा।
पिता का कहना है कि हमें बताया गया कि बेटा स्कूल में मोबाइल लेकर आया, और रील बनाई। अगर बेटा मोबाइल लेकर गया था तो पहले हमसे बात करना थी। प्रिंसिपल रूप में जो हुआ, सीसीटीवी में सब दिख रहा है। बेटा काफी डरा हुआ दिख रहा है। मोबाइल तो उसके पास था। वह स्कूल भी रोज आता था, लेकिन मोबाइल कब लेकर आया, यह नहीं मालूम।
बेटे की बात करते हुए पिता रो पड़े से बात करते समय पिता के आंसू निकल आए। पिता का कहना था कि वह नॉर्मल था। इतना बड़ा कदम उठाना संभव नहीं था। वह स्पोर्ट्समैन है। नेशनल खिलाड़ी है। माइंड भी कूल है। कई रेस हार कर भी आया, बावजूद वह कभी निराश नहीं हुआ। वह नॉर्मल कंडीशन में इस तरह का कदम नहीं उठा सकता। कुछ तो हुआ ही होगा।

घर से स्कूल के लिए निकला था पिता का कहना था कि गुरुवार को भी वह स्कूल के लिए घर से निकला था, लेकिन स्कूल से पता चला है कि वह स्कूल नहीं आया था। अगर वह तीन मंजिल तक दौड़ लगाकर गया तो हर जगह स्टाफ मौजूद रहता है। सीसीटीवी भी लगे हैं। स्कूल के खिलाफ जांच होना चाहिए।
अभी तक तो ठीक हॉस्पिटल तक पहुंच गया अगर कुछ हो जाता तो क्या होता। उसके क्या पोस्ट क्या मुझे नहीं मालूम। स्कूल वालों के अगर मोबाइल से जुड़ी बात बतानी होती तो पहले ही बता देना थी।
दो मिनट पहले चैंबर में बुला लेते तो ये नहीं होता पिता ने कहा- बेटा नर्सरी से उसी स्कूल में जा रहा है। पहली बार ही ऐसा हुआ। बच्चे की मानसिकता क्या है, स्कूल के प्रिंसिपल व सारे टीचर को समझना चाहिए। वह बच्चा कैसा है। सीसीटीवी के बारे में बाद में पता चला। मैडम ने मुझे बुलाया तब बच्चा चैंबर में था और मुझे बैठाकर रखा।
बच्चे को इतना प्रताड़ित किया कि बच्चे को कुछ नहीं दिखा और दौड़ते हुए सीढ़ी चढ़ गया। मैं वहीं मौजूद था। मेरे सामने ही वह बोलते तो मैं मानता। आज मेरे बच्चा का सब कुछ खत्म हो गया। नेशनल प्लेयर में क्या बचा उसका। उसकी लाइफ में क्या बचा। दोनों पैर टूट गए, जो बच्चा दौड़ता था, नेशनल लेवल तक जाकर गोल्ड मेडल लेकर आ रहा है।
दो मिनट पहले चैंबर में बुला लेते तो आज मेरा बच्चा हॉस्पिटल में नहीं होता। मैं पुलिस प्रशासन से चाहता हूं कि स्कूल में ताला लगा दिया, ताकि दूसरे बच्चे आराम से अपनी जिंदगी जीएं। अपने परिवार के बीच रहें। उनके पेरेंट्स भी कम से कम शांति से रहें।
उनकी वर्डिंग भी ऐसी कि तुम लोगों का कुछ नहीं हो सकता है। क्या करेंगे दूसरा चांस नहीं मिलेगा। क्या चाहते हैं वह लोग। मेडलिस्ट बच्चे से मेडल छीन लेंगे। नेशनल मेडलिस्ट बच्चे से मेडल छिन लेंगे तो ऑप्शन क्या बचेगा।
मुझे न्याय मिलना चाहिए, स्कूल में ताला लगे मुझे न्याय मिलना चाहिए। स्कूल पर ताला लगना चाहिए, ताकि दूसरे बच्चे कम से कम अपनी जान से हाथ नहीं थोए। आज मेरा बच्चा मेरे बाल-बाल बच गया, कल से उठाकर खत्म हो जाता है। यह तो मेरी किस्मत अच्छी थी या मेरे पुण्य थे कि आज मेरा बच्चा मेरे पास है। अगर उसे कुछ हो जाता तो क्या होता। आज मैं बैठ कर रोता।
मां बोली- 7 साल से स्केटिंग कर रहा बेटा मां ने बताया कि मेरा बेटा नॉर्मल था। पहले कभी भी किसी प्रकार की कोई बात सामने नहीं आई। 7 साल से वह स्केटिंग खेल रहा है। इंस्टाग्राम आईडी के बारे में जानकारी नहीं है। 7 दिसंबर को विशाखापट्टमन में नेशनल टूर्नामेंट खेलने जाना था। वहां पर 8 दिसंबर से 14 दिसंबर तक स्केटिंग का नेशनल टूर्नामेंट है

समझाइश के तौर पर सस्पेंशन की बात कही- प्रिंसिपल रतलाम के बोधि इंटरनेशनल स्कूल की प्रिंसिपल डॉली चौहान ने कहा- बच्चा मोबाइल लेकर आया था। इंस्टा पर लाइव क्लासेस का वीडियो अपलोड किया था। समझाइश के लिए असेंबली के बाद उसे बुलाया गया था। उसे डर था कि पेरेंट्स को पता नहीं चले।

शायद पेरेंट्स को पता नहीं था कि यह मोबाइल लेकर आया था। उसे समझाइश दी गई थी। इसके बाद स्पोर्ट्स टीचर को कहा था कि छात्र रिलैक्स हो जाए, तब क्लास में भेज देना। संभवत: पिता से आई कॉन्टैक्ट होने के बाद ही यह घटनाक्रम हुआ हो।
