इंदौर। अवैध कॉलोनाइजेशन पर प्रशासन का शिकंजा, बिना रेरा अनुमति के प्लॉट बेचने वालों पर कार्रवाई

सड़क पर कैनोपी लगाकर प्रॉपर्टी बेचने वालों पर पहले भी कार्रवाई हुई है। फाइल फोटो

अवैध कॉलोनियां और अधूरे विकास की लगातार शिकायतें मिलने के बाद प्रशासन अलग-अलग तरीके अपना रहा है, ताकि इन पर रोक लग सके। शहरी सीमा से लगे गांवों में एक ओर जहां बिना रैरा अनुमति के प्लॉट बेचने वालों पर कार्रवाई जारी है।

वहीं प्रशासन ने अब खेती की जमीन के छोटे-छोटे टुकड़ों के रूप में खरीदी-बेची जाने वाली कॉलाेनियाें की जानकारी पंजीयन विभाग से निकलवाई है। इंदौर जिले में आसे 140 नाम सामने आए हैं, जिन्होंने खेती की जमीन में से कहीं 4 हजार तो कहीं 2 हजार वर्ग फीट जमीन ही बेच दी।

प्रशासन का मानना है कि इससे अवैध कॉलोनाइजेशन हो रहा है। प्रशासन अब एसडीएम के माध्यम से इनकी जांच करवा रहा है। गड़बड़ी मिलने पर पहले नोटिस जारी होंगे, फिर जरूरत पड़ने पर एफआईआर भी होगी।

अधिकारियों का मानना है कि इससे एक समग्र प्लानिंग और विकास नहीं हाे पाता। ड्रेनेज, सड़क, पानी सहित कई समस्या बाद में रहवासियों को आती है। जिला कॉलोनी सेल प्रभारी और एसडीएम प्रदीप सोनी ने बताया कि कलेक्टर ने सभी एसडीओ, एसडीएम से रिपोर्ट बुलवाई है। अब इसकी पड़ताल कर रहे हैं। नोटिस देकर उन्हें सुनने के बाद आगे की कार्रवाई करेंगे।

हमारा उद्देश्य ऐसे लोगों को हितों की रक्षा करना है, जो जीवनभर की पूंजी प्लॉट खरीदने में लगा देते हैं। कुछ लोग व्यक्तिगत हित देखते हैं और इनके साथ धोखाधड़ी करते हैं, उन्हें तलाशा जा रहा है। कई लोगों ने टेंट लगाकर, बाइक लेकर सड़क किनारे ही प्लॉट बेचने की दुकानें शुरू कर दी हैं।

कैनोपी लगाकर प्लॉट बेच देते हैं, सालों विकास नहीं होता

प्रशासन को शिकायतें मिली कि खेत की जमीन ही दिखाकर कम दाम में प्लॉट देने के वादे करते हैं, फिर सालों विकास नहीं होता, जबकि पैसे पहले जमा करवा लेते हैं। नियम के मुताबिक रैरा कहता है कि कोई भी बिल्डर रैरा अनुमति के बिना प्रमोशन नहीं कर सकता। यह निर्देश पहले भी दिए गए थे। अब पालन हो रहा है। जो ब्रोकर, प्रमोटर कॉलोनी का प्रमोशन करते हैं, तो उनका भी रजिस्ट्रेशन होना अनिवार्य है।

कहां-कितने छोटे खसरे बिके… तहसीलवार जानकारी में अधिकांश हिस्सा ग्रामीण क्षेत्र का

बिचौली हप्सी तहसील क्षेत्र के मोरोद में 5, जामन्या में 5, बिहाड़िया में 7, कैलोद करताल में 5, सनावदिया, उमरियाखुर्द में 3, इंदाैर तहसील के कैलोद करताल में 5, सुखलिया में 5, भानगढ़, निपानिया में 2 के अलावा सांवेर में 15 से ज्यादा रजिस्ट्री छोटे खसरों पर हुई है।

इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में सिमरोल, गवली-पलासिया, काली बिल्लौद, मेठवाड़ा, उषापुरा, रणमल बिल्लौद, भांग्या, जूनी इंदौर तहसील में बिलावली के वार्ड 77 में चार, खुड़ैल, टिगरिया बादशाह, छोटा बांगड़दा, डोंगरगांव, मांगलिया सड़क, हांसाखेड़ी, कस्बा रावेर, पिपलई, पीर कराड़िया, कछालिया, रतनखेड़ी, चंद्रावतीगंज, सोलसिंदा, बूढ़ी बरलई, कायस्थखेड़ी के नाम शामिल हैं।

रिपोर्ट में गड़बड़ियां मिली तो एफआईआर भी करवाएंगे

कई शिकायतें ऐसी मिली हैं, जिसमें डेवलपर बिना रैरा के न केवल अपनी प्रॉपर्टी का प्रमोशन करते हैं, बल्कि एडवांस बुकिंग के नाम पर भी लाखों रुपए ले लेते हैं। इसके अलावा खेत के टुकड़े करके बेचे जा रहे हैं। इन पर कोई नियंत्रण नहीं है। इसलिए डिटेल मांगी है। रिपोर्ट के आधार पर जो भी गलत होगा, उन पर एफआईआर तो होगी, पीड़ितों की राशि भी वापस करवाई जाएगी।

आशीष सिंह, कलेक्टर

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