
इंदौर में कांग्रेस प्रत्याशी रहे अक्षय कांति बम की नाम वापसी और फिर बीजेपी में एंट्री को लेकर कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि सब कुछ अचानक हुआ, कुछ भी प्लान नहीं था।
विजयवर्गीय एक टीवी चैनल से चर्चा कर रहे थे। जिसका वीडियो उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर शेयर किया है। वे बम के बीजेपी में आने और इस घटनाक्रम के प्री-प्लांड होने के विपक्ष के आरोपों पर जवाब दे रहे थे।
मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा- ‘कुछ भी प्लान नहीं था। अचानक सब कुछ हुआ। मैं फॉर्म वापस करवाने गया भी नहीं था। मैं रास्ते में मिला था, क्योंकि कांग्रेस के कुछ कार्यकर्ताओं ने उन्हें घेर लिया था। इसलिए मैं रास्ते में पहुंचा। हम लोगों ने बात की।
विजयवर्गीय ने कहा- सेल्फी खींची ये बात सही है और हमने ट्वीट कर दिया। पर वो ट्वीट इतना बड़ी चर्चा में आ जाएगा इसकी कल्पना मुझे भी नहीं थी। ठीक है, राजनीति में कुछ करते हैं तो कुछ न कुछ तो होता है। उसमें हुआ है। मैं ऐसा कह सकता हूं कि हमें सफलता मिली है।’

29 अप्रैल को वापस लिया था नामांकन
बता दें इंदौर लोकसभा सीट से कांग्रेस प्रत्याशी अक्षय बम ने नामांकन वापसी के अंतिम दिन 29 अप्रैल को नाटकीय घटनाक्रम के तहत कलेक्टर ऑफिस पहुंच कर अपना फॉर्म वापस ले लिया था। उनके साथ मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के खास और दो नंबर विधानसभा से विधायक रमेश मेंदोला और उनकी टीम थी। फॉर्म उठाने के कुछ देर बाद ही मंत्री विजयवर्गीय ने बम के साथ सेल्फी सोशल मीडिया पर पोस्ट की थी तो जमकर वायरल हुई।

ताई ने कहा था, इस घटनाक्रम की कोई जरूरत नहीं थी
बम के बीजेपी में इस तरह आने पर बीजेपी नेत्री और पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन (ताई) ने भी हैरानी जताई थी।
ताई ने कहा था कि इस घटनाक्रम की कोई आवश्यकता नहीं थी, क्योंकि दीवार पर लिखा हुआ है कि इंदौर में भाजपा को कोई भी नहीं हरा सकता। ताई ने आगे कहा कि कांग्रेस उम्मीदवार (बम) को ऐन चुनाव से पहले ऐसा नहीं करना चाहिए था। उसने एक तरह से अपनी पार्टी (कांग्रेस) से भी धोखा किया, लेकिन मैं ऐसे शब्दों का इस्तेमाल क्यों करू।
मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने अक्षय बम के साथ सेल्फी लेकर उसे सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट किया था।
ताई ने कहा कि इंदौर लोकसभा सीट के इतिहास में पहली बार चुनावी पाला बदलने के बाद शहर के कुछ पढ़े-लिखे लोगों ने उन्हें फोन करके नाराजगी जताई। फोन करने वालों ने मुझसे कहा कि अब वे EVM पर NOTA का विकल्प चुनेंगे, क्योंकि भाजपा ने जो किया, वह उन्हें अच्छा नहीं लगा।

अक्षय बम ने इंदौर-2 से विधायक रमेश मेंदोला के साथ कलेक्टर ऑफिस पहुंच नामंकन वापस लिया था। मेंदोला पूरे समय बम के साथ थे, और ये बात किसी से छुपी नहीं है कि विधायक मेंदोला किसके समर्थक हैं।
ऑपरेशन सूरत-2 का था प्लान
बम की नाम वापसी होते ही भाजपा ने ऑपरेशन सूरत-2 पर काम शुरू कर दिया था। प्लान था कि गुजरात की सूरत लोकसभा सीट की तरह बचे हुए उम्मीदवारों के नामांकन वापस कराकर इंदौर में निर्विरोध जीत हासिल की जाए। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के नेतृत्व में दोपहर 3 बजे तक माथापच्ची चलती रही लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। 23 में से 9 ही उम्मीदवारों ने नाम वापस ले लिया था।
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने बम को बताया था खोटा सिक्का
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी ने इंदौर में अक्षय कांति बम का नाम लिए बिना कांग्रेस पर हमला बोला था, उन्होंने कहा था कि आपका सिक्का खोटा निकला तो लोग नोटा पर क्यों वोट डालें? कांग्रेस धरातल की ओर जा रही है। जीतू पटवारी कांग्रेस को समापन की ओर बढ़ा रहे हैं।