इंदौर। सी-21 मॉल अवैध, हाईकोर्ट ने महापौर, निगमायुक्त, सिटी इंजीनियर, पिंटू छाबड़ा को जारी किया नोटिस; चार सप्ताह में मांगा जवाब

इंदौर। एबी रोड पर बना सी-21 माल अवैध साबित हो गया है। यहां 2.52 लाख स्क्वेयर फीट पर निर्माण की अनुमति थी लेकिन मालिक पिंटू छाबड़ा ने 5.59 लाख स्क्वेयर फीट बना दिया। मामले में हाईकोर्ट ने महापौर, निगमायुक्त, सिटी इंजीनियर, पिंटू छाबड़ा, पत्नी प्रभजोत कौर को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है।

मामले में आरटीआई एक्टिविस्ट परमानंद सिसौदिया ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी। सिसौदिया ने अपनी याचिका में कहा था कि पिंटू उर्फ गुरजीतसिंह पिता भगतसिंह छाबड़ा, प्रभजोत कौर छाबड़ा ने निवासी योजना क्र. 74 ने 2006 से 2008 के बीच आईडीए और टीएनसीपी से भ्रष्ट साठगांठ करके चाय व्यापारियों को रियायती दर पर आवंटित 17 भूखंडों को अवैध रूप से हथियाकर इनका संयुक्तीकरण करवाकर 9554.02 वर्गमीटर यानी 1 लाख 02 हजार 849.03 वर्गफीट का एबी रोड के मुख्य मार्ग के कार्नर का एक ही रिक्त भूखंड होना बताकर वर्ष 2006 में ही यहां शॉपिंग कॉम्पलैक्स व मल्टीप्लैक्स के कमर्शियल निर्माण की टीएनसीपी और नगर निगम से निर्माण अनुज्ञा क्र. 13800 (15 नवम्बर 2006) को प्राप्त कर ली थी। इसमें 40 प्रतिशत कवरेज एवं 2.0 एफएआर देकर 15 मीटर तक की ऊंचाई में बी+1, बी+2, बी+3, जी+3 तक के निर्माण की अनुज्ञा प्राप्त करके भवन का निर्माण 2003 में शुरू कर 2006 में संपन्न कर लिया था।

आश्चर्यजनक ये है कि इनमें से 8 भूखंडों के विक्रय पत्रों के निष्पादन ही आईडीए ने मार्च 2007 में किया। इससे साफ जाहिर है कि टीएनसीपी के संयुक्तीकरण आदेश व निगम द्वारा जारी भवन निर्माण अनुज्ञा में ये 8 भूखंड पिंटू के पास उपलब्ध ही नहीं थे। तो फिर उपलब्ध 9 भूखंडों को पूरे 17 भूखंड होना बताकर 1 लाख 02 हजार 849. 03 वर्गफीट कैसे बता दिया गया?

भ्रष्ट अफसरों ने ऊंचाई में भी खेल खेला
टीएनसीपी, नगर निगम और आईडीए के भ्रष्ट अफसरों ने केवल यही खेल नहीं खेला, उन्होंने ऊंचाई में भी खेल किया। उन्होंने स्वीकृत 15 मीटर ऊंचाई को रिवाईज अनुज्ञा के नाम पर वर्ष 2007 में 24 मीटर करके 50 प्रतिशत कवरेज और 2.5 एफएआर पुन: दो बार फिर भवन अनुज्ञाएं जारी कर दी। ये नियमित रूप से भी संभव नहीं है। नतीजा ये कि इन कुख्यात भूमाफिया दंपत्ति ने योग्य पात्रता 2,52 लाख वर्गफीट के स्थान पर 5.59 लाख वर्गफीट का निर्माण कर लिया।

जो आज भी संपूर्ण व्यवस्था को मुंह चिढ़ा रहा है। तत्कालीन निगमायुक्त मनीषसिंह, उनके बाद प्रतिभा पाल, तत्कालीन महापौर मालिनी गौड़, वर्तमान पुष्यमित्र भार्गव के संरक्षण में तत्कालीन अपर आयुक्त संदीप सोनी ने अपने आदेश क्र. 2153 (7 नवम्बर 2022) से लगभग मात्र 2, 50, 073 रुपए का समन शुल्क लेकर इस जानलेवा भवन का कंपाउंडिंग कर दिया है।

सिसौदिया ने बताया कि 17 वर्ष बाद हाईकोर्ट के समक्ष रखे गए मामले में अपने अधिवक्ता विवेक दलाल के माध्यम से गत 13 अगस्त को महापौर, निगमायुक्त, सिटी इंजीनियर, पिंटू छाबड़ा, पत्नी प्रभजोत कौर को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है।

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