
ससुराल से घर लौट रहे सरकारी टीचर को लुटेरों ने घेरा और एक फायर कर दिया। टीचर का जबड़ा क्षत-विक्षत होकर लटक गया। दांत-दाढ़ तो उड़ ही गए। जिस हालत में अस्पताल लाए गए, वे न कुछ खा सकते थे, न पी सकते थे। 3 महीने दूध और जूस पर जिंदा रहे। चेहरा बिगड़ने से मनोस्थिति ऐसी हो गई कि टीचर से पत्नी-बच्चे अस्पताल में मिलने आते तो कह देते- यहां मत आया करो, अच्छा नहीं लगता। ठीक होकर जल्दी ही घर आऊंगा।
लंबी कोशिश के बाद डॉक्टरों ने पैर की हड्डी से चेहरे पर नया जबड़ा फ्रेम कर दिया है। अब वे स्कूल भी जाने लगे हैं, अभी नकली दांत लगने बाकी हैं। इलाज पर करीब 19 लाख रुपए खर्च हो चुके हैं।
लूट की घटना 13 अक्टूबर 2023 को टीचर संजय राठौर के साथ आलीराजपुर रोड पर हुई थी। वे 5 किमी दूर गोडगांव के सरकारी स्कूल में टीचर हैं। बाइक से मनावर स्थित ससुराल से घर लौट रहे थे। सूने रास्ते में बदमाशों ने घेरकर लूट की। जाते-जाते एक फायर कर दिया। वारदात में 3 बदमाश शामिल थे। पुलिस 6 महीने बाद भी इनको अरेस्ट नहीं कर सकी है।
3 महीने हो गए तब पहली बार अन्न मुंह में गया…
संजय के भाई शैलेंद्र कहते हैं कि जबड़े में गोली लगने से भाई के सारे दांत और दाढ़ उड़ गए। दाढ़ी लहूलुहान होकर लटक गई। इंदौर में भर्ती हुए तो इंफेक्शन रोकने के लिए ICU ट्रीटमेंट देना पड़ा। एक हफ्ते में जब घाव में सुधार दिखा तो जबड़े को नए सिरे से बनाकर लगाने का प्लान किया।
परिवार को कहा कि जबड़े को ठीक करने के लिए पैर की हड्डी लगानी पड़ेगी। मांसपेशियां, स्किन और खून की नली भी वहीं से ट्रांसफर की जाएंगी। पत्नी ने सहमति दे दी। राहत की बात यह थी कि हमले में सिर में अंदरूनी चोट नहीं थी, इसलिए जबड़े को नए सिरे से रिक्रिएट करना जल्दी शुरू कर दिया गया।
पत्नी से कहते थे कि बच्चों को अस्पताल मत लाया करो

सरकारी टीचर को लुटेरों ने घेरकर फायर कर दिया था। चेहरे के नीचे गोली लगने से जबड़ा क्षत-विक्षत होकर लटक गया था। घटना में दांत-दाढ़ उड़ गए थे।
एक हफ्ते आईसीयू में रहने के बाद ट्यूब से पानी-जूस पीने लगे। तब पत्नी और बच्चे भी अस्पताल देखने आए। वे कहते थे कि आप लोग अस्पताल मत आया करो। मुझे अच्छा नहीं लगता है। बहुत जरूरी हो तभी बच्चों को आने देना। बिगड़ा हुआ चेहरा देखकर उनका मनोबल गिरेगा। ठीक होकर जल्दी ही घर आता हूं। पैर की हड्डी से जबड़ा फिट कर दिया गया
पत्नी ने बताया कि घर लौटने के बाद 15 दिन तक ट्यूब से ही उन्हें डाइट देनी पड़ी। चम्मच से धीरे-धीरे डाइट शुरू की। 3 महीने हो गए तब पहली बार अन्न के रूप में कोई दाना उन्हें दिया। इसमें भी पतला दलिया और बिस्किट का चूरा देना शुरू किया। अब वे 12 से 13 बार चम्मच से डाइट लेते हैं, तब पूरा आहार हो पाता है। दांत लग जाएंगे तो शायद सबकुछ ठीक हो जाए।
अब उन्होंने कुछ दिनों पहले फिर से नौकरी जॉइन कर ली है। अभी उनके दांत नहीं लगे हैं। इंफेक्शन से बचने के लिए स्कूल में मुंह पर रुमाल बांधकर रखते हैं।
डॉक्टरों का कहना है कि होंठ का कुछ हिस्सा बनाया जाना है। इसके बाद नकली दांत लगाए जाएंगे। यह प्रोसेस होने के बाद पहले की तरह भोजन कर सकेंगे।
2 पॉइंट्स में समझिए – हड्डी से जबड़ा रिक्रिएट करने की तकनीक
1. पैर की हड्डी क्यों?
पैर में 2 तरह की हड्डी होती है। एक टिबिया, दूसरी फिबुला। बाएं पैर के दाईं ओर रहने वाली हड्डी टिबिया होती है, यही शरीर का वजन उठाती है। इसी पैर में बाईं ओर जो हड्डी रहती है, वो होती है फिबुला, जो सिर्फ टिबिया का सपोर्ट करती है। शरीर का वजन उठाने के लिए टिबिया में पर्याप्त कैपेसिटी होती है। ऐसे में सपोर्टर फिबुला के रहने या नहीं रहने से बहुत फर्क नहीं पड़ता है।
2. जबड़े में कैसे फिट?
फिबुला हड्डी का 40 सेंटीमीटर हिस्सा साइड से निकाला गया। मशीन से काटकर जबड़े का आकार दिया। दांत फिट करने के लिए सांचा देकर जगह छोड़ी गई। माइक्रोस्कोप से हड्डी और चेहरे की बारीक नसों को आपस में जोड़ा गया, ताकि हड्डी सड़े नहीं और ब्लड सर्कुलेशन के सहारे शरीर से जुड़ जाए। भीतरी हिस्सों से जोड़ने के लिए टाइटेनियम और स्टील प्लेट से जोड़ा गया।

3 बदमाशों ने की थी वारदात, पुलिस आज तक नहीं पकड़ सकी
टीचर को बाइक सवार 3 बदमाशों ने सूने रास्ते में रोककर वारदात की थी। कट्टा दिखाकर एटीएम कार्ड, पर्स, मोबाइल और बाइक छीन ली थी। घटना को 6 महीने हो गए हैं। पुलिस एक भी आरोपी को गिरफ्तार नहीं कर सकी है। परिवार का कहना है कि पुलिस आरोपियों को जल्द गिरफ्तार करे। साथ ही सरकार हमारी मदद करे।
