इंदौर। 8 हजार वर्ग किमी में रीजनल डेवलपमेंट पर जोर, ग्रीन प्रूफिंग जरूरी, 20 साल की चुनौतियों पर भी करना होगा विचार; 5 एक्सपर्ट ने दिए सुझाव

इंदौर में मास्टर प्लान के साथ रीजनल डेवलपमेंट प्लान पर भी काम हो रहा है। रीजनल डेवलपमेंट में 8 हजार वर्ग किमी का एरिया प्लानिंग के लिए प्रस्तावित है। इंदौर देश के लिए सफाई में रोल मॉडल है। अब इसे ग्रीन एरिया (हरियाली) बढ़ाने पर काम करना होगा। मेट्रो का काम चल रहा है। इंदौर में टू-व्हीलर, फोर-व्हीलर बड़ी संख्या में हैं। यहां का बस ट्रांसपोर्ट सिस्टम अच्छा है, लेकिन अब देखना होगा कि मेट्रो चलने के बाद कितना ट्रैफिक बस और मेट्रो में कन्वर्ट होता है।

यह कहना है देश के अलग-अलग शहरों में मास्टर प्लानिंग पर काम करने वाले सीनियर एक्सपर्ट का, जो दो दिन से इंदौर में थे। कलेक्टर आशीष सिंह की कवायद के बाद टीएंडसीपी ने एक्सपर्ट को मदद के लिए बुलाया था। इनमें अवनीश पाटिल (सिटी टाउन प्लानर महाराष्ट्र), आर. श्रीनिवास टीसीपीओ, डॉ. ए. पन्नीरसेल्वम (ली एसोसिएट्स), जसवंत सिंह (पूर्व सीटीपी हरियाणा), प्रो. निखिल रंजन मंडल (एसपीए भोपाल) इंदौर आए थे। एक दिन पहले टीएंडसीपी के जॉइंट डायरेक्टर शुभाशीष बैनर्जी के साथ ये एक्सपर्ट शहर के अलग-अलग स्थानों पर पहुंचे। शुक्रवार को इन्होंने सुझाव प्रशासन के सामने रखे।

सैटेलाइट टाउन का विकास करना होगा, ग्रीन प्रूफिंग जरूरी

आर.श्रीनिवास ने कहा 20 साल बाद डेवलपमेंट इंदौर तक नहीं रहेगा। इंदौर के साथ रीजनल प्लान 8 हजार वर्ग किमी में प्रपोज है। देखना होगा कि इंदौर के साथ आसपास के क्षेत्रों की कनेक्टिविटी कितनी है। इंदौर तो बढ़ ही रहा है, लेकिन आसपास के सैटेलाइट टाउन का भी विकास जरूरी है। इंदौर रीजन डीएमआईसी कॉरिडोर के पास पड़ता है। जब वह चलने लगेगा तो उसका इंदौर के परिक्षेत्र पर क्या प्रभाव होगा, यह समझना जरूरी है। इंदौर अन्य शहरों के लिए रोल मॉडल है। यहां के स्वच्छता के कामों को अन्य शहरों को भी सीखना चाहिए। रामसर साइट के पास का विकास चिंताजनक है।

यह देखना होगा यहां अनावश्यक डेवलपमेंट न हो। गंदा पानी तालाब में न मिले। इंदौर में ग्रीन कवर कम है, यह बढ़ाना होगा। अभी तापमान 45 डिग्री पहुंच रहा है, जो गलत है। इसके लिए कूलिंग एक्शन प्लान बनाना पड़ेगा। ग्रीन प्रूफिंग करना होगी, ताकि तापमान सहनीय हो।20 साल बाद इंदौर का और ज्यादा विस्तार होगा।

20 साल की चुनौतियों पर भी करना होगा विचार

डॉ. ए. पन्नीरसेल्वम ने कहा जो इंदौर की प्लानिंग हो रही है, उसमें 20 साल में क्या चुनौतियां होंगी, उस पर विचार करना है। अब तक जो काम हुआ है, वह अच्छा हुआ है। समस्याएं हर शहर में होती है। वाटर बॉडी कितनी है, किस स्थिति में है, ग्रीनरी कितनी है, ट्रांसपोर्ट की समस्याएं कैसी हैं। इन पर भी चिंतन जरूरी है।

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