
नाक-कान-गला रोग विशेषज्ञों की राष्ट्रीय वार्षिक कॉन्फ्रेंस AOICON-2018 के मामले में 6 साल बाद जिला एवं सत्र न्यायालय ने एसोसिएशन के तीन पदाधिकारी डाॅक्टरों के खिलाफ धोखाधड़ी, विश्वासघात करने की धाराओं में केस दर्ज करने के आदेश तिलक नगर पुलिस को दे दिए हैं। इंदौर में हुई इस कॉन्फ्रेंस में देशभर से नाक, कान, गला विशेषज्ञ शामिल हुए थे।
डाॅक्टरों ने पैसे देकर रजिस्ट्रेशन करवाया था। मेडिकल उपकरण और दवाइयां बनाने वाली कंपनियाें ने आयोजन प्रायोजित किया था। इस मामले में आर्गनाइजिंग कमेटी ने दो बैंक खाते खुलवाए। फीस में जो पैसा मिला था, उसे संस्था के अधिकृत बैंक खाते में जमा नहीं करते हुए दूसरे खाते में जमा करवाया। जब एसोसिएशन की नई कार्यकारिणी गठित हुई तो ऑडिट करवाने की मांग की।
हर साल होती है कॉन्फ्रेंस- इंदौर में विभिन्न विशेषज्ञों की राज्य स्तरीय और राष्ट्रीय स्तर की कांफ्रेंस का आयोजन होता है। जिसमें देश से ही नहीं बल्कि विदेशों से भी डॉक्टर्स शामिल होते है। जिस शहर में यह आयोजन होता है, वहां के एसोसिएशन और राष्ट्रीय एसोसिएशन के पास आयोजन को करवाने की जिम्मेदारी होती है। जिसके लिए उपसमितियों का गठन भी किया जाता है।
पुलिस ने कार्रवाई नहीं की तो कोर्ट पहुंचे शिकायतकर्ता
मामले में पुलिस से भी शिकायत हुई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद जिला कोर्ट में निजी परिवाद दायर किया गया। एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष डाॅ. प्रकाश तारे व राहिल निदान ने तीन डॉक्टरों के खिलाफ केस दर्ज करने के लिए परिवाद दायर किया। प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी कोर्ट के समक्ष इस मामले की सुनवाई हुई। कोर्ट ने डाॅक्टरों के खिलाफ केस दर्ज करने के आदेश जारी किए हैं। केस दर्ज करने के बाद जानकारी कोर्ट को भी देने के लिए कहा है।
आरोप- फीस का कोई हिसाब-किताब नहीं दिया
डॉ. तारे ने आरोप लगाया कि आयोजन में फीस के रूप में ही करोड़ों रुपए संस्था को मिले थे। आयोजन समाप्त होने के बाद तत्कालीन आयोजकों ने नए खाते को बंद कर दिया। राशि कहां गई, यह नहीं बताया। ऑडिट रिपोर्ट तक नहीं दी गई। कॉन्फ्रेंस के लिए 34 करोड़ रुपए इकट्ठा हुए थे। 60 लाख जीएसटी चुकाया गया था। ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर को 3 करोड़ रुपए दिए थे।
कॉन्फ्रेंस में खर्च का कोई हिसाब नहीं दिया
कॉन्फ्रेंस पर खर्च का कोई हिसाब नहीं दिया। 8-8 लाख के 12 चेक विड्रा किए गए, उसका कोई हिसाब नहीं दिया गया। 2 नए अकाउंट खोले गए, जबकि एसोसिएशन का आधिकारिक अकाउंट था।
डॉ. प्रकाश तारे, पूर्व अध्यक्ष व शिकायतकर्ता
कोई अनियमितता नहीं हुई, मामला झूठा है
मामला पूरी तरह झूठा है। अभी कोेर्ट में विचाराधीन है। हमें न्यायालयीन प्रक्रिया पर पूरा विश्वास है। पूरी कमेटी ने मेहनत से आयोजन को करवाया और किसी भी तरह की आर्थिक अनियमितता नहीं हुई।
– डॉ. संजय अग्रवाल, कॉन्फ्रेंस के ऑर्गनाइजिंग कमेटी सदस्य