इंदौर। हाईकोर्ट ने लगाई निगम आयुक्त को फटकार कहा – कार से उतरिए, कागज पर नहीं, जमीन पर दिखना चाहिए काम

आवारा श्वानों की समस्या को लेकर दायर जनहित याचिकाओं पर सोमवार को हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट के आदेश पर निगमायुक्त शिवम वर्मा खुद उपस्थित हुए। उन्होंने कोर्ट को बताया कि श्वानों की संख्या नियंत्रित करने के लिए निगम लगातार काम कर रहा है।

इस पर कोर्ट ने नाराजगी जताई और टिप्पणी की कि कार से उतरिए, काम कागज पर नहीं, जमीन पर दिखना चाहिए। ये याचिकाएं ऐसे खत्म नहीं होंगी। हम निगरानी कर रहे हैं। आम आदमी का सड़क से गुजरना मुश्किल है। इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई होना चाहिए। कोर्ट ने सभी पक्षकारों को सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रख लिया।

याचिकाओं में कहा गया है कि श्वानों के काटने के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। हर माह चार हजार से ज्यादा लोग इनके शिकार हो रहे हैं। सिर्फ एक शासकीय अस्पताल में एंटी रैबीज टीका लगाने की व्यवस्था है। श्वानों के लिए शेल्टर होम नहीं हैं। अगर शेल्टर होम बनाकर किसी एनजीओ को जिम्मेदारी सौंप दी जाए तो शहर में श्वानों की समस्या से मुक्ति पायी जा सकती है। इन याचिकाओं में एक पूर्व पार्षद महेश गर्ग की है और दूसरी वंदना जैन की।

2 साल में ही 21 करोड़ रुपए के इंजेक्शन लगा दिए

हुकुमचंद पॉली क्लिनिक के डॉ. आशुतोष शर्मा का कहना है एक मरीज पर एंटी रैबीज इंजेक्शन का खर्च दो से ढाई हजार रुपए आता है। 2023 में 10 करोड़ 99 लाख 40 हजार रुपए इंजेक्शन पर खर्च हुए थे। 2022 में भी 10 करोड़ 92 लाख 57 हजार 500 रुपए खर्च किए थे। आंकड़ा सिर्फ हुकमचंद अस्पताल का है।

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