
ऑस्ट्रेलिया नागरिक पॉल शेपर्ड के साथ 1 करोड़ से ज्यादा की धोखाधड़ी के मामले में अन्नपूर्णा पुलिस द्वारा डेढ़ साल बाद भी जांच नहीं करने पर हाई कोर्ट ने सख्त रवैया अपनाते हुए केस डायरी बुलाई है। इसके साथ शासन को भी निर्देश दिए हैं।
गुरुवार को हाई कोर्ट में केस की सुनवाई थी। फरियादी के एडवोकेट गगन बजाड ने बताया कि फरियादी पॉल शेपर्ड ने आरोपी मयंक सलूजा से डेढ़ साल पहले एक समझौता किया था। दरअसल तब मयंक ने खुद को एक सॉफ्टवेयर डेवलपर के रूप में प्रोजेक्ट किया और मल्टी नेशनल आईटी फर्म के साथ एग्रीमेंट का वादा किया। उसे विश्वास दिलाया कि कंपनी के प्लेटफॉर्म के लिए एक स्पेशल एप डेवलप करने की आवश्यकता है। सलूजा ने अथर्व नाम के एक व्यक्ति से शेपर्ड को मिलवाया। उसने बताया कि वह मयंक के स्कूल का दोस्त है और बहुराष्ट्रीय कंपनी में मैनेजर के रूप में काम करता है.
मयंक ने आश्वासन दिया कि अथर्व इस प्रोजेक्ट में लाइसेंस की व्यवस्था करेगा और फर्म के साथ एक एग्रीमेंट पर साइन करेगा ताकि प्रोजेक्ट को गति मिले। इस पर पॉल शेपर्ड अलग-अलग दौर में शेपर्ड से 1 करोड़ से ज्यादा रुपए लेकिन प्रोजेक्ट को आगे नहीं बढ़ा। शक होने पर शेपर्ड ने मल्टी नेशनल कंपनी से संपर्क किया तो पता चला कि मयंक ने उसके साथ धोखाधड़ी की है। इस पर पुलिस ने मयंक के खिलाफ केस दर्ज किया लेकिन जांच के नाम कार्रवाई नहीं की। हर बार पीड़ित को आश्वासन दिया कि मामला स्काइप से जुड़ा है, वहां से रिपोर्ट आने के बाद ही जांच आगे बढ़ेगी। डेढ़ साल तक पुलिस टालमटोल की तो पीड़ित ने अपने एडवोकेट गगन बजाड के माध्यम से हाई कोर्ट की शरण ली। जिस पर गुरुवार को हाई कोर्ट ने आईओ को तलब नहीं करते हुए केस डायरी ही तलब की है।