साइबर फ्रॉड या संदिग्ध लेन-देन के नाम पर पूरे बैंक खाते फ्रीज करने की प्रथा पर इंदौर हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला दिया है। अब बैंक साइबर पुलिस या किसी जांच एजेंसी के कहने मात्र से पूरा खाता फ्रीज नहीं कर सकेंगे। केवल संदिग्ध (विवादित) राशि को ही अधिकतम तीन महीने के लिए एफडी बनाकर रोका जा सकेगा।

यदि तीन महीने के भीतर जांच एजेंसी आरोप सिद्ध कर कानूनी प्रक्रिया पूरी नहीं करती है, तो खाताधारक उस रोकी गई राशि को भी निकाल सकेगा। यह आदेश जस्टिस प्रणय वर्मा की एकल पीठ ने कमाठीपुरा निवासी व्यापारी संतोष गौड़ की याचिका पर दिया।
बिना सुनवाई कार्रवाई से ठप हो गया कारोबार याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अमित कुमार जैन के अनुसार, संतोष गौड़ का बैंक ऑफ इंडिया, रामबाग शाखा में खाता है। बेंगलुरु पुलिस ने 60 हजार रुपए के संदिग्ध ट्रांजेक्शन की शिकायत पर ई-मेल भेजकर खाता फ्रीज करने को कहा था।
बैंक ने बिना विधिक प्रक्रिया अपनाए और खाताधारक का पक्ष सुने पूरा खाता फ्रीज कर दिया। इससे व्यापार ठप हो गया। कोर्ट ने इसे अनुचित मानते हुए तत्काल खाता खोलने के आदेश दिए और भविष्य के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए।
इंदौर से ही 3700 बैंक खाते फ्रीज कराए गए, इनमें 11 करोड़ होल्ड संदिग्ध लेन-देन के नाम पर बड़ी संख्या में खाते फ्रीज हैं। इंदौर क्राइम ब्रांच ने ही देशभर में 2200 से अधिक बैंक खाते फ्रीज करा रखे हैं। एडीसीपी राजेश दंडोतिया के अनुसार, इनमें 5 करोड़ से अधिक राशि होल्ड है। वहीं इंदौर साइबर सेल ने 1500 से अधिक बैंक खातों को फ्रीज कराया है। साइबर एसपी सव्यसाची सराफ के मुताबिक इन खातों में 6 करोड रुपए से अधिक राशि होल्ड है।
50 व्यापारियों के खाते हुए थे फ्रीज बीते वर्ष इंदौर के 50 से अधिक कारोबारियों के खाते संदिग्ध लेन-देन के आधार पर फ्रीज कर दिए गए थे। व्यापार प्रभावित होने से विरोध प्रदर्शन हुए थे। बाद में जांच के बाद खाते पुनः चालू किए गए थे।
क्या बदलेगा इस फैसले से?
आम खाताधारकों और व्यापारियों को राहत जांच एजेंसियों पर समयबद्ध कार्रवाई का दबाव बैंकों की मनमानी पर अंकुश व्यापार और दैनिक लेन-देन बाधित होने की समस्या में कमी
कोर्ट की नई गाइडलाइन… 3 माह में फ्रॉड साबित नहीं हुआ तो राशि निकाल सकेंगे
- पूरा खाता फ्रीज नहीं किया जाएगा, केवल विवादित राशि रोकी जाएगी।
- रोकी गई राशि तीन महीने तक ही एफडी के रूप में रख सकेंगे।
- जांच एजेंसी को 3 महीने में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता या अन्य संबंधित कानूनों के तहत सक्षम अधिकारी से आदेश लेना होगा।
- निर्धारित अवधि में कार्रवाई पूरी नहीं होने पर खाताधारक विवादित राशि भी निकाल सकेगा।