इंदौर। पटवारी ने फिर सार्वजनिक रूप से मधु वर्मा के पैर छू कर लिया आशीर्वाद

पटवारी ने फिर सार्वजनिक रूप से मधु वर्मा के पैर छू कर लिया आशीर्वाद!

– सम्मान पाकर सहमे “मधु”!

पटवारी को दिया जीत का आशीर्वाद!

– बाद में मीडिया के सामने निकाली “कड़वाहट“!

– इंदौर. परवान चढ़ते जा रहे विधानसभा चुनाव में लगातार रोचक नजारे देखने को मिल रहे हैं. नामांकन दाखिल करने के दौरान आज एक ऐसा ही घटनाक्रम दिखाई दिया, जहां राऊ से कांग्रेस प्रत्याशी जीतू पटवारी ने एक बार फिर सार्वजनिक रूप से भाजपा के प्रतिद्वंद्वी मधु वर्मा के पैर छू लिए! अचानक हुए इस घटनाक्रम से मधु वर्मा पहले तो कुछ असहज हुए, लेकिन बाद में पटवारी को आशीर्वाद देते हुए बोले, “जनता भी तुम्हें आशीर्वाद जरूर देगी!”

राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी यह घटना जैसे ही सोशल मीडिया के जरिए शहर में साझा की जाने लगी, भाजपा का एक तबका सक्रिय हो गया! बहुत संभव है कि आनन-फानन में बनी रणनीति के बाद मधु वर्मा के बयानों में कड़वाहट आ गई! इसके बाद उन्होंने जीतू पटवारी की विनम्रता को प्रायोजित करार दे दिया! अब राऊ की जनता मधु यानी शहद के, कड़वाहट भरे बयान पर आश्चर्य व्यक्त कर रही है!

मधु वर्मा के बदले हुए बयान का असर यह हुआ कि एक बार फिर जीतू पटवारी के बड़प्पन की चर्चा शुरू हो गई! वहीं आशीर्वाद देकर मुकरने वाले मधु वर्मा जनता के बीच अपनी छोटी सोच को लेकर, चर्चा का विषय बन गए! खास बात तो यह भी है कि यह पहला अवसर नहीं है जब चुनाव शुरू होने के बाद जीतू पटवारी ने मधु वर्मा के सार्वजनिक रूप से पैर छुए हैं! पूर्व में भी वे एक दो अवसरों पर मधु वर्मा को अपने पिता तुल्य बताते हुए, उनसे इस उम्र में की सेवा के संघर्ष से मुक्त होने की प्रार्थना कर चुके हैं! तो पटवारी ने बयान दिया था कि मैं मधु वर्मा जी का बहुत सम्मान करता हूं और अब उम्र के इस पड़ाव पर उन्हें कष्ट नहीं दूंगा. वह घर बैठकर मार्गदर्शन देंगे और मैं पुत्र धर्म निभाकर जनता की सेवा करूंगा.

दरअसल, राऊ विधायक और पूर्व मंत्री जीतू पटवारी ने पिछले 20 सालों में अपनी विधानसभा को एक परिवार की तरह पोषित और पल्लवित किया है. अनेक सार्वजनिक आयोजनों में वे एक ही बात हजारों बार दोहरा चुके हैं, “मेरी विधानसभा, मेरा परिवार”. इस सोच के पीछे पटवारी बार-बार यह भी बताने में पीछे नहीं हटते की राऊ की इस संस्कृति के पीछे छोटों का स्नेह और बड़ों का आशीर्वाद ही सबसे बड़ा कारण है.

दो बार के विधायक और पूर्व मंत्री अपने विधानसभा क्षेत्र में आसानी से देखे जा सकते हैं. बड़ी बात यह भी है कि पटवारी की साइकिल लगातार चलती रहती है. अपनी राजनीतिक व्यस्तताओं से समय निकालकर वह आमतौर पर जनता के बीच घूमते हुए देखे जा सकते हैं. विधानसभा परिवार का कोई भी सदस्य कभी भी उनसे संपर्क कर सकता है और अपने सुख-दुख में भागीदार बन सकता है.

विधानसभा को परिवार मानने की इस परंपरा का सबसे बड़ा फायदा यह भी होता है कि राजनीतिक प्रतिस्पर्धा से यह विधानसभा क्षेत्र काफी दूर रहा है. चुनावी हार-जीत के बावजूद जब भी क्षेत्र के विकास का कोई मुद्दा सामने आता है, पटवारी अपने विपरीत विचारधारा वाले नेताओं से भी राय-मशविरा करते हैं. कुछ माह पूर्व उन्होंने भाजपा के तमाम बड़े नेताओं को पत्र लिखकर अपने विधानसभा क्षेत्र के अधूरे कामों को बताने का अनुरोध किया था! लेकिन, बुधनी से भी विकसित इस विधानसभा को लेकर एक भी जवाब भाजपा नेताओं की तरफ से नहीं मिला था. तब भी पटवारी की यह पहल पूरे देश में चर्चा का विषय बनी थी.

राऊ विधानसभा परिवार की चर्चा आज पूरे देश में केवल इसीलिए है, क्योंकि यहां दुश्मनी के लिए दूर-दूर तक कोई जगह नहीं है. तभी तो मध्य प्रदेश के अलावा देश के कई राज्यों में अपने विधानसभा और लोकसभा क्षेत्र को परिवार बताने का चलन अब काफी बढ़ गया है. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक अब जनता को अपना परिवार बताने लगे हैं.

बहरहाल, सक्रिय चुनावी दौर में दाखिल हो चुका मध्य प्रदेश का चुनाव आज फिर जीतू पटवारी के सार्वजनिक आचरण से राजनीतिक संस्कारों का ऐसा पर्याय बन गया, जिसकी चर्चा फिर से दूर-दूर तक होने लगी है।

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