
इंदौर की मशहूर 56 दुकान पहुंचकर दिलजीत दोसांझ ने पोहे खाए। दुकानदारों से दिल खोलकर मिले।
कनसर्ट के लिए इंदौर आए मशहूर सिंगर और एक्टर दिलजीत दोसांझ 56 दुकान पर लोगों को दिल जीत गए। वो पोहा खाने पहुंचे, तो दुकानदार पिता-पुत्र को अपने हाथों से पोहे खिलाए। फूल बेचने वाली कैंसर पीड़ित महिला से भी मुलाकात की, उन्हें गले लगाया और दोबारा मिलने का वादा कर गए।
रविवार सुबह पौने छह बजे उनकी गाड़ी 56 दुकान पर रुकी। बाउंसरों के बीच वे यहां पहुंचे। 56 दुकान पर उनके साथ लोगों ने वीडियो बनाए, सेल्फी ली। इसके बाद वे लाखन सिंह राठौर की ‘चाट पैलेस’ दुकान पर पोहे खाने पहुंचे।
दिलजीत यहां 15 से 20 मिनट रुके। उन्होंने एक प्लेट पोहा खाया। उनके साथ वालों ने भी पोहे का स्वाद चखा। इंदौर का पोहा खाते ही दिलजीत का दिल खुश हो गया और उनके मुंह से निकला ओ, हो, हो…, इसके बाद उन्होंने लाखन राठौर से बात की।
दिलजीत बहुत खुशदिल इंसान हैं, हमें खूब दुआ दी लाखन सिंह राठौर ने चर्चा में कहा, ‘दिलजीत ने कहा कि हमारे यहां के पोहे बहुत स्वादिष्ट हैं। मुझे कहा कि आपका नेचर बहुत अच्छा है। अचानक उन्होंने हमें पोहे खाने के लिए बुलाया। हमने कहा कि हम ले लेते हैं, लेकिन वे बोले कि मैं खिलाऊंगा। उन्होंने मुझे और मेरे बेटे को अपने हाथ से पोहा खिलाया। उन्होंने जाते वक्त भी हमें खूब दुआ दी।’

कैंसर पीड़ित महिला से कहा- आप घबराएं नहीं दिलजीत पोहे खा रहे थे, तभी उनसे मिलने के लिए फैंस भी आ गए। फूलों का व्यापार करने वाली 69 वर्षीय सुगना चौहान भी उनसे बुके लेकर मिलने पहुंचीं। उन्हें देखकर वे रुक गए। इसके बाद उन्होंने सुगना चौहान से बात की।
सुगना चौहान ने बातचीत में कहा, ’56 दुकान पर ‘मां शारदा डेकोरेशन फ्लॉवर’ के नाम से मेरी दुकान है। सुबह 6.30 बजे वे (दोसांझ) वापस जा रहे थे। जाते वक्त उनसे मिलने गई। मुझे देख वे रुक गए। हमारी बातें हुईं। उन्होंने पूछा कि आप इतनी उम्र में काम कर रही हैं।
मैंने उन्हें बताया कि मेरी तबीयत ठीक नहीं रहती है। मैं कैंसर पीड़ित हूं। मैं रोज दुकान खोलती हूं, आज भी जल्दी दुकान खोली है। वे बोले कि वाह आंटी…आपसे मिलकर बहुत खुशी हुई। फिर पूछा कि कितने सालों से हो आप यहां? मैंने बताया कि 40 साल से यहां हूं।’

सुगना बोलीं- दिलजीत को नहीं पहचानती थी सुगना चौहान ने बताया कि वे दिलजीत दोसांझ को नहीं पहचानती थीं। उनके आने पर भीड़ हो गई थी। यहां सेलिब्रिटी आते हैं, तो भीड़ हो जाती है। मुझे लगा कि कोई तो है ये। उन्होंने मुझसे पूछा भी कि पहचानते हो क्या? तो मैंने मना कर दिया। भीड़ देखकर समझ आया कि आप कुछ तो हैं।