
जवाहर मार्ग पर करीब 50 साल पुराना सरदार वल्लभ भाई पटेल रेलवे ओवर ब्रिज (पटेल ब्रिज) जर्जर हो रहा है। शहर के सबसे व्यस्त इलाके सरवटे बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन के साथ सियागंज, रानीपुरा जैसे भीड़ वाले बाजारों के ट्रैफिक की लाइफ लाइन यह ब्रिज ऊपर और नीचे कब्जों के बोझ में दबा है। इसके सरिए भी निकल रहे हैं। इन्हें व्यापारियों ने दुकानों के पतरों और बेतरतीब निर्माण से ढंक दिया है।
इस क्षेत्र के कारोबारियों के अनुसार ब्रिज के रखरखाव की जिम्मेदारी नगर निगम की है। बीते सालों में सियागंज तरफ का पैदल पुल का हिस्सा गिर भी चुका है। रात में अंधेरा रहता है। ब्रिज के बोगदों में बनी अवैध दुकानों में असामाजिक तत्वों का जमावड़ा होने से कारोबारियों के साथ लूट मारपीट की घटनाएं होती हैं।
शहर के ट्रैफिक की लाइफ लाइन है यह ब्रिज
इसी ब्रिज से शहर के पश्चिमी हिस्से से पूर्वी हिस्से की ओर जाने वाला ट्रैफिक गुजरता है। इससे छावनी, सियागंज सहित 20 से ज्यादा बाजारों का जुड़ाव है। इसके अलावा जूनी इंदौर से हाथीपाला होते हुए एबी रोड पर आवाजाही के लिए भी यह अहम कनेक्टिविटी है। राजबाड़ा क्षेत्र, गंगवाल बस स्टैंड को रेलवे स्टेशन, एमवाय अस्पताल, रेसीडेंसी, गीताभवन इलाके को सीधा जोड़ता है।
- आधी सड़क पर कार पार्किंग, फुटपाथ पर ठेले व दोपहिया वाहन
- एक ओर ऑटो रिक्शा तो दूसरी ओर वीडियो कोच का अवैध स्टैंड
- एक ओर ऑटो रिक्शा तो दूसरी ओर वीडियो कोच का अवैध स्टैंड
महावीर चौक वाला हिस्सा खतरे में
सियागंज होलसेल किराना एसोसिएशन के रमेश खंडेलवाल का कहना है कि ब्रिज की भुजा के जवाहर मार्ग वाला हिस्सा पार्किंग बन गया है। इससे यहां दिनभर जाम की स्थिति बनी रहती है। सियागंज का मुख्य किराना बाजार महावीर चौक वाले हिस्से में है। दुकानों तक आवाजाही के लिए दोनों ओर की सर्विस लेन पर अतिक्रमण के कारण पतली-पतली 8 से 10 फुट की गलियां बन गई हैं। ठेले वाले और असामाजिक तत्वों के कारण परेशानी होती है। गोडाउन से माल लेने लोडिंग रिक्शा और बड़े वाहन आते-जाते हैं। इससे यहां ट्रैफिक फंसता है।
समाधान- इसकी मरम्मत करें और रखरखाव पर ध्यान दें
सिविल स्ट्रक्चर इंजीनियरिंग के विशेषज्ञ श्रीनिवास कुटुंबले का कहना है कि ब्रिज का रखरखाव कमजोर है। स्ट्रक्चर को बनाए अभी 50 साल भी नहीं हुए हैं। यह अधिक समय नहीं है। इसकी स्ट्रक्चर की जांच करवा लें, इसके आधार पर इसका सुधार कार्य करके इसकी उम्र बढ़ाई जा सकती है। वर्तमान इंजीनियरिंग में बहुत से विकल्प हैं, जिससे इसे मजबूत किया जा सकता है। अब भी लापरवाही की तो इसे तोड़कर बनाना ही एक विकल्प रहेगा। इससे जनता को बड़ी परेशानी होगी।