
नगर निगम के फर्जी बिल घोटाले में पूर्व अपर आयुक्त ड्रेनेज देवेंद्र सिंह और रोहन सक्सेना के भी फर्जी साइन की फाइलें मिली हैं। निगम में पांचों फर्म के फर्जी बिल के भुगतान का मामला सिर्फ 20 फाइलों का नहीं है, बल्कि 186 फाइलों का है, जिनमें से 80 फीसदी फर्जी ही निकली हैं। इनमें ट्रेंचिंग ग्राउंड की 4 करोड़ की फाइलें भी शामिल हैं। जब यह बिल लगे तब अभय राठौर ट्रेंचिंग ग्राउंड में ही पदस्थ था। वर्ष 2018 के पहले तक वह ड्रेनेज विभाग में कार्यपालन यंत्री रहा। ज्यादातर फाइलों पर 2018-19 के पहले के फर्जी वर्कऑर्डर मिले हैं। इस दौरान ड्रेनेज विभाग में तीन अपर आयुक्त रहे, लेकिन उनमें से किसी ने भी इस ओर ध्यान नहीं दिया।
5 फर्मों को 10 साल में हुए भुगतान की पड़ताल
एफआईआर करवाने के बाद निगमायुक्त शिवम वर्मा ने 28 करोड़ के भुगतान के लिए जमा 20 फाइलों की जांच के लिए समिति गठित की और समिति ने इन्हीं पांचों फर्मों के दस सालों में हुए भुगतान की भी पड़ताल की। यह सारे काम वर्ष 2015 से 2018 के बीच हुए हैं। पुलिस ने अभय राठौर को सह आरोपी बनाया है। वह खुद वर्ष 2008 से 2018 तक ड्रेनेज विभाग में कार्यपालन यंत्री था। इसी दौरान पांच अपर आयुक्त बदल गए। इसके बाद वर्ष 2018 में ट्रेंचिंग ग्राउंड भेजा तो वहां के भी 4 करोड़ के बिल फर्जी निकले।
बड़े कामों के सभी बिल फर्जी तरह से लगाए
यह फर्में छोटे-मोटे काम तो करती थीं लेकिन बड़े कामों के सभी बिल फर्जी तरह से लगाए गए। ऑडिट विभाग में इन्हें पास भी करवा लिया गया और लेखा शाखा में इनका भुगतान भी हो गया। एक फाइल 150 पेज से ज्यादा की होती है। इसमें 12 से 15 अधिकारियों के साइन और हैंडराइटिंग होती है। इन 20 फाइलों में सभी पेज पर एक ही हैंडराइटिंग मिली है। इसके अलावा आवक-जावक नंबर जब ड्रेनेज विभाग ने जांचें तो उन तारीखों पर ऐसा कोई काम होना पाया ही नहीं गया। ई-नगर पालिका लागू होने के पहले के वर्कऑर्डर यूज किए क्योंकि बाद में यह इतना आसान नहीं होता।
बड़ा सवाल : सिर्फ 2015 तक की फाइलें ही क्यों देखी जा रही
निगम की समिति को 20 फाइलों की जांच के लिए कहा। उन्होंने इन फर्मों को 10 साल में हुए भुगतान का रिकॉर्ड निकलवाया, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि यह फर्में इसके भी पहले से काम कर रही हैं। इसलिए सिर्फ 2015 तक की ही फाइलें क्यों देखी जा रही हैं, बल्कि पहले का रिकॉर्ड भी देखा जाना चाहिए। आशंका है कि ड्रेनेज विभाग के पूर्व के अन्य अपर आयुक्तों और अधिकारियों के भी फर्जी साइन कर भुगतान लिया गया हो।
हस्ताक्षर जांच का मैकेनिज्म ही नहीं
जांच समिति अध्यक्ष सिद्धार्थ जैन ने बताया फाइलों पर उन अधिकारियों के हस्ताक्षर किए गए जो वहां पदस्थ ही नहीं थे। हैंडराइटिंग भी एक ही व्यक्ति की है। ऑडिट और लेखा शाखा के अधिकारियों और कर्मचारियों ने माना है कि साइन उनके ही हैं तो एसओपी के आधार पर जांच की गई कि कहां गड़बड़ हुई। अफसरों, कर्मचारियों ने कहा साइन उनके नहीं हैं। ऐसे में हमारे पास उनके हस्ताक्षर की जांच करने का मैकेनिज्म नहीं है। इसलिए रिपोर्ट में भी विशेषज्ञ से जांच करवाने की अनुशंसा की।
अभय राठौर की डमी फर्मों के फरार ठेकेदारों पर 5-5 हजार का इनाम
इंदौर| नगर निगम में फर्जी बिलों से हुए 107 करोड़ के घोटाले के सरगना अभय राठौर की डमी फर्मों के फरार दो ठेकेदारों पर भी पुलिस ने 5-5 हजार का इनाम घोषित किया है। गिरफ्तार 7 आरोपियों में से तीन का दोबारा रिमांड लिया है, वहीं 4 आरोपियों को जेल भेज दिया है। इधर, आरोपी ईई अभय राठौर का पता नहीं चला है। उसके साथ फरार ठेकेदार मौसम व्यास और इमरान खान की तलाश में उनके अलग-अलग ठिकानों पर दबिश दी है। एमजी रोड टीआई विजय सिसौदिया ने बताया घोटाले में मास्टरमाइंड राठौर की तलाश जारी है।
उसके साथ दो नई फर्म फार्मा क्रिस्टल इंटरप्राइजेस के आरोपी इमरान खान और ईश्वर इंटरप्राइजेस के आरोपी मौसम व्यास पर भी इनाम घोषित किया है। इनकी तलाश में भी कई ठिकानों पर दबिश दी है, लेकिन तीनों का कोई पता नहीं चला है। इनकी चल-अचल संपत्तियों की जानकारी निकलवाई है। इनके घरों पर व परिचितों के यहां पुलिस टीमें लगातार सर्चिंग करवा रही हैं। राठौर ने इन दोनों फरार आरोपियों के साथ डमी फर्में तैयार कर करीब 4 करोड़ से ज्यादा का और घोटाला किया है।
ये गए जेल, ये हैं रिमांड पर
आरोपी ठेकेदार रेणु वडेरा, ठेकेदार मोहम्मद साजिद और मोहम्मद जाकिर, डेटा एंट्री ऑपरेटर चेतन भदौरिया को जेल भेज दिया है। सब इंजीनियर उदय भदौरिया, लिपिक राजकुमार साल्वी और ठेकेदार राहुल वडेरा का दोबारा रिमांड लिया है। इनसे अभी और फाइलों को लेकर पूछताछ की जा रही है।