
पुलिस गिरफ्त में वारदात का मास्टरमाइंड और उसका साथी।
इंदौर में एकतरफा प्यार में युवती को संक्रमित खून का इंजेक्शन लगाने की कहानी में नया मोड़ आया है। शुरुआत में किसी भिखारी का संक्रमित खून लेकर इंजेक्शन लगाने की कहानी फर्जी निकली। यह खून सरकारी टीबी अस्पताल से चुराया गया था। इसमें वहीं काम करने वाली महिला कर्मचारी का हाथ है, जो बार-बार बयान बदल रही है। केस में आरोपियों की संख्या बढ़कर 7 हो गई है। मास्टरमाइंड सहित 5 आरोपी पुलिस कस्टडी में हैं। दो अन्य फरार हैं।
वारदात का 32 वर्षीय मास्टरमाइंड किशोर कोरी दो बच्चों का पिता है। पत्नी अभी गर्भवती है। पहले से ही 12 आपराधिक केस भी दर्ज हैं। केस में पुलिस ने सरकारी टीबी अस्पताल में ठेके पर काम कर रही महिला सफाईकर्मी, उसके पति और दो अन्य को गिरफ्तार किया है। जिनकी भूमिका इंजेक्शन और ब्लड लाकर देने में थी। जिन लोगों ने बीच सड़क पर युवती को घेरकर इंजेक्शन लगाया था, वे दोनों फरार हैं। घटना 12 मार्च 2024 को हुई थी।
हमने पड़ताल की है कि सनकी और शादीशुदा आशिक उस युवती से क्यों बदला लेना चाहता था? किस 10 साल पुरानी फिल्म देखकर षड्यंत्र रचा? सरकारी अस्पताल से लाया गया खून का सैंपल किसका था? किन लोगों के जरिए पूरी वारदात कराई? सात में से 5 की गिरफ्तारी के बावजूद कहानी अधूरी क्यों है? जानिए अब तक जांच में सामने आई बातें?

युवती से क्यों बदला लेना चाहता था सनकी शादीशुदा शख्स ?
किशोर कोरी 32 साल का है और आदतन अपराधी है। उसके खिलाफ 12 केस हैं। वह युवती से एकतरफा प्यार करने लगा। वह दो बच्चों का पिता है। जब युवती ने मना किया तो पहले ब्लैड से हमला कराया। इसके लिए कुछ युवतियों को सहारा लिया। इसके बावजूद आरोपी ने सनक नहीं छोड़ी। उसने फिर बदला लेने की साजिश रची। इस बार उसने फिल्मी स्टाइल में संक्रमित खून का इंजेक्शन देने का प्लान बनाया था।
10 साल पुरानी कौन सी फिल्म देखकर षड्यंत्र रचा?
2015 में एक सुपरहिट तमिल फिल्म रिलीज हुई थी आई (I), यहीं से उसने यह साजिश रची। इसमें हीरो से नाराज कुछ लोग उसके दोस्त की मदद से एक संक्रमित इंजेक्शन लगाते हैं। इससे हीरो के पूरे शरीर में फफोले हो जाते हैं, वह बूढ़ा होने लगता है।
इसी को देखकर आरोपी किशोर ने अपने दोस्त संजय कोरी को कहा कि मुझे संक्रमित ब्लड और इंजेक्शन चाहिए। वह उस युवती से बदला लेना चाहता है। इस पर दोस्त संजय ने कहा कि काम हो जाएगा, लेकिन 15 हजार रुपए लगेंगे। काम दूसरे से करवाना पड़ेगा। इस पर किशोर राजी हो गया।
सरकारी अस्पताल से लाया गया खून का सैंपल किसका ?
इंजेक्शन के लिए ब्लड और सीरिंज का जुगाड़ करने का जिम्मा संजय ने अपने दोस्त शैलेंद्र को दिया। शैलेंद्र ने सफाई कर्मचारी लोकेश कंडोर से कहा। बोलो- तुम्हारी पत्नी सरकारी मनोरमाराजे टीबी अस्पताल में है। उससे कहकर ब्लड और सीरिंज का इंतजाम कर दो। बिल्कुल वेस्ट वाला चाहिए। इसके बदले में रुपए मिलेंगे। लोकेश मान गया और पत्नी से संक्रमित ब्लड के साथ सीरिंज लाने को कह दिया।
अस्पताल में सफाई करने वाली पत्नी संगीता को यह पता था कि टीबी अस्पताल में हर सैंपल की कोडिंग होती है। एक भी सैंपल इधर-उधर हुआ तो चोरी पकड़ी जाएगी। संगीता ने चालाकी दिखाते हुए उस ब्लड सैंपल को चुराया, जिस व्यक्ति की पहले ही मौत हो चुकी थी।
सूत्रों के अनुसार उपचार के दौरान जिस व्यक्ति की मौत हो जाती है, यदि उसका ब्लड सैंपल लिया हुआ है तो बाद में लैब में जांच के लिए नहीं भेजा जाता। मेडिकल वेस्ट मानकर बाहर करा दिया है। उसी में से एक ब्लड सैंपल को संगीता ने पति के कहने पर चुराया।

संगीता बार-बार बयान बदलती रही
दरअसल, संगीता हॉस्पिटल की नियमित कर्मचारी नहीं है। वह आउटसोर्स वाली एंजिल सिक्योरिटी कंपनी (UDS) के लिए सफाई का काम करती हैं। गिरफ्तारी के बाद संगीता को पुलिस अस्पताल लाई तो वह बयान बदलती रही। कभी कहा कि कभी खून का सैंपल ट्रे में से उठाया था। कभी कहा कि उसे नर्स ने फेंकने को कहा था तो वहां से उठा लाई, लेकिन क्रॉस करने पर पलट गई।
अब जो खुलासा किया, उससे पुलिस अफसर दंग रह गए। उसने कहा कि तीन-चार महीने पहले अस्पताल में एक मरीज की मौत हो गई थी। मौत से पहले उसका ब्लड सैंपल पहले लिया गया था। हालांकि, मौत के कारण उसे लैब नहीं भिजवाया गया और बायो मेडिकल वेस्ट के रूप में फिंकवाया गया था।
संगीता इसी सैंपल को वापस उठा लाई और पति लोकेश को दे दिया था। वह यही नहीं बता सकी कि यह सैंपल किस मृत मरीज का था और तारीख क्या थी। इसके बाद पति लोकेश ने संजय को दिया और संजय ने उसे एक फ्रिज में रख दिया। फिर युवती को दो लोगों के जरिए लगवाने के बात सामने आई है जो कि फरार हैं।

भिखारी का बयान देकर गुमराह किया
12 मार्च की वारदात को लेकर पुलिस ने 15 मार्च को मुख्य आरोपी किशोर कोरी और उसके साथी संजय कोरी को गिरफ्तार किया। संजय ने तब नीचे की चैन की जानकारी छिपाते हुए कहा था कि उसने भूतेश्ववर महादेव के पास एक भिखारी से उसका खून लिया है। आकाश और रोहन के जरिए युवती को इंजेक्शन लगवाया था।
पुलिस ने उसकी निशानदेही पर भिखारी से बात की। उसने अपने साथ ऐसी किसी घटना से मना कर दिया। इस पर शक बढ़ा। सख्ती करने पर आरोपी संजय ने कबूला कि साथी शैलेंद्र, सफाईकर्मी दंपती लोकेश और संगीता भी शामिल हैं। इसके बाद पुलिस ने इन तीनों को गिरफ्तार किया। उसके बाद खुलासा हुआ कि खून भिखारी का नहीं बल्कि संगीता ने एमआरटीबी अस्पताल से लाकर दिया था।

ब्लड सैंपल पर नाम-पते होते हैं : सुपरिटेंडेंट
एडमिट पेशेंट्स के रोज कई खून के सैंपल जांच के लिए लैब भेजे जाते हैं। एक बार में 10-12 पेशेंट्स के सैंपल लेकर ट्रे में रख दिए जाते हैं। इनमें से एक पेशेंट की अलग-अलग जांचों के दो-तीन सैंपल भी होते हैं। यह काम हॉस्पिटल का स्टाफ करता है। इसमें लगाई जानी वाली पर्ची में मरीज का नाम सहित खास जानकारी होती है।
– डॉ. संजय अवासिया, सुपरिटेंडेंट MRTB अस्पताल इंदौर
मृत व्यक्ति का सैंपल मेडिकल वेस्ट है : डिप्टी सुपरिटेंडेंट
बायो वेस्ट का काम सिस्टमैटिक है। जिस भी सीरिंज से सैंपल लिया जाता है, तत्काल नर्स उसकी निडिल और पिस्टन (वायल) अलग करती है। यूज्ड निडिल को शॉर्प वेस्ट में और वायल को मेडिकल वेस्ट में डलवाते हैं। खून का सैंपल अलग टेस्ट ट्यूब में रहता है। अगर सैंपल के बाद मरीज की मौत हो गई तो ब्लड सैंपल भी मेडिकल वेस्ट में डलवाते हैं। वेस्ट को हॉस्विन कंपनी की गाड़ी लेने आती है। अभी तक किसी भी मरीज का सैंपल गायब होने की जानकारी नहीं है।
– डॉ. पूनम यादव, डिप्टी सुपरिटेंडेंट MRTB अस्पताल इंदौर

