टूर एंड ट्रेवल्स धोखाधडी मामले में हुआ नया खुलासा! एडवांस वापस मांगने पर बेटे ने पिता के सुसाइड करने की दी थी धमकी – देखें VIDEO

अमृत टूर एंड ट्रेवल्स का संचालक महेन्द्र मंड, जिसके खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया गया है।

इंदौर समेत तीन शहरों से दुबई टूर कराने के नाम पर हुए 80 लाख रुपए से ज्यादा के फर्जीवाड़े में नया खुलासा हुआ है। यह बात सामने आई कि जब ट्रिप बुक करने वाले आरोपी ने फोन बंद कर रखा है। उसके बेटे को पीड़ित ने कॉल किया तो जवाब दे दिया कि पिता परेशान हैं, ज्यादा दबाव डाला तो वे आत्महत्या कर लेंगे। जब पीड़ितों को लग गया कि यह सब कुछ नौटंकी है तो केस दर्ज करा दिया है।

आरोपी टूर कंपनी संचालक महेंद्र सिंह मंड फरार है। बेटे शैबी से पूछताछ की तैयारी है। मामले की शिकायत तिलक नगर के राजीव जैन ने की थी। उन्होंने ही टूर का जिम्मा लिया था और लोगों से ग्रुप टूर की बुकिंग करवाई थी।

ऐसे 8 पॉइंट में समझिए पूरी धोखाधड़ी

1. दुबई टूर का पूरा सौदा दो एजेंट्स आरोपी महेंद्र सिंह और फरियादी राजीव जैन के बीच का है। बड़े एजेंट महेंद्र सिंह ने कहा था कि दुबई के लिए प्रति व्यक्ति ट्रिप 80 हजार रु. की रहेगी। इसमें वीजा, आने-जाने का टिकट, रहना, खाना और घूमना शामिल रहेगा। बुकिंग के लिए 38 हजार प्रति व्यक्ति एडवांस देना तय हुआ था। लगभग 165-166 यात्रियों ने बुकिंग कराई।

2. ट्रिप रेट तय होने के बाद दुबई के लिए राजीव जैन ने कुल चार ट्रिप बुक की। इंदौर से 1, उदयपुर से 1 और अहमदाबाद से 2 ट्रिप शामिल थीं। 5-12 दिसंबर को इंदौर से 110 लोगों की, दूसरी 6-13 को अहमदाबाद से 14 और 7-14 को फिर अहमदाबाद से 20 लोगों की, और आखिरी चौथी ट्रिप उदयपुर से 30 लोगों की तय हुई। लगभग सभी ने 38 हजार के हिसाब से एडवांस दिया।

3. इंदौर की 110 लोगों की पहली ट्रिप ले जाने की बारी आई तो महेंद्र मंड एजेंसी ने बुकिंग एजेंट जैन को बताया कि दुबई एम्बैंसी बंद है। वीजा नहीं मिल रहा है। जैन ने कहा कि ऐसा था तो पहले पता चल जाना था। ऐनवक्त पर ऐसा नहीं होता। विवाद के बीच पहली ट्रिप कैंसिल हो गई।

4. इसी तरह बाद की ट्रिप भी कैंसिल होते चली गई। अंततः जब उदयपुर की आखिरी ट्रिप भी कैंसिल हुई तो जैन ने आरोपी महेंद्र मंड से रुपए वापस मांगे। आरोपी मंड ने बैंक रसीद भेज दी और कहा कि इसका रुपया जमा कराने वालों के खाते में दो लाख रुपए जमा कर दिए हैं। हालांकि वह भी फर्जी रसीद थी।

5. विवाद के बाद आरोपी महेंद्र मंड ने फरियादी जैन को कहा कि आखिरी रास्ता यह है कि आप एक महीने के बाद नई ट्रिप प्लान करो। मैं सब मैनेज कर दूंगा। तय हुआ कि 166 में से सिलेक्टेड 54 यात्रियों की पहली ट्रिप में दुबई भेजेंगे। इन सब यात्रियों के वीजा के अलावा आने-जाने के टि कट देने पर सहमति बन गई। जब ये ट्रिप भेजने की बात आई तो 54 में से एक महिला यात्री का वीजा फर्जी बन गया। शक होने पर शिकायत की तब सही वीजा बनवाया।

6. 54 यात्रियों के वीजा तो आखिरकार मिल गए लेकिन आने-जाने के हिसाब से 54 लोगों के 108 टिकट पूरे नहीं दिए गए थे। 54 लोगों के बदले आने-जाने के सिर्फ 64 टिकट एजेंसी ने अंततः उपलब्ध कराए। फरियादी जैन का कहना है कि लाज बचाने के लिए ऐनवक्त पर वापसी के 44 टिकिट अपने खर्च पर बनवाए।

7. दुबई पहुंचे सभी 54 यात्रियों के सामने तब नया संकट खड़ा हो गया जब उनके नाम से होटल बुक ही नहीं थी। जानकारी दी कि वह तो पहले ही एजेंसी ने कैंसिल करा दी है। यात्रियों से विवाद शुरू हुआ तो एजेंट जैन ने 18 लाख रुपए परिचितों से भारत से बुलवाए। कुछ रुपए दुबई में एक कपल से भी उधार लिए। सबको ठहराया और घुमाया। करीब 38 लाख रु. खर्च हो गया।

8. जब इस फ्रॉड के मामले में दुबई से आरोपी महेंद्र को फोन किया तो फोन बंद था। बाद में बेटे ने फोन उठाया तो कहा कि पिता डिप्रेशन में है। आत्महत्या कर सकते हैं। इसके चलते फरियादी जैन घबरा गए। अंततः पूरी कहानी घर आकर अपनी पत्नी को सुनाई।

भगवतीबाई का वीजा बना था फर्जी

एफआईआर में राजीव ने पुलिस को बताया है कि जनवरी में 54 यात्रियों का दुबई टूर बनाया गया। आरोपी महेन्द्र ने भगवती पति भूरी लाल जैन का वीजा बना कर भेजा। राजीव के अनुसार जब उन्होंने वीजा की जांच कराई तो इसके फर्जी होने की जानकारी सामने आई। इस बारे में जब महेन्द्र मंड से संपर्क किया तो उसने यह कहते हुए माफी मांगी कि वह सही वीजा बनाकर देगा, लेकिन पुलिस में ना जाए। इसके बाद 54 यात्रियों के सही वीजा दिए गए।

अमृत दूर एंड ट्रेवल्स की वेबसाइट पर इस तरह से सारी जानकारी दी गई है।

दुबई से कॉल किया तो बेटे ने पिता के जहर खा लेने की कहानी गढ़ी

राजीव जैन ने बताया कि उन्होंने दुबई से 9 जनवरी 2024 को महेन्द्र मंड को कॉल किया। तब बेटे शैबी ने कॉल रिसीव किया और कहा कि उनके पिता ने सुसाइड अटेम्प्ट किया है। उन्होंने जहर खा लिया है। दोबारा फोन नहीं लगाने का कहते हुए कॉल काट दिया। शैबी की बात सुन राजीव घबरा गए। वह अगले दिन जैसे-तैसे इंदौर आए। 11 जनवरी को उन्होंने मामले में पत्नी को जानकारी दी।

दोनों अन्नपूर्णा थाने पहुंचे और महेन्द्र मंड के खिलाफ लिखित शिकायत कर दी। इसके बाद एडिशनल डीसीपी अभिनव विश्वकर्मा ने उसकी जांच एसीपी नंदनी शर्मा से कराई। जिसके बाद आरोपी के खिलाफ केस दर्ज किया गया।

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