
एक प्रॉपर्टी ब्रोकर ने अपने ही घर में 53 लाख रुपए की चोरी कर ली फिर चोरी की झूठी रिपोर्ट दर्ज करवा दी। बाद में चोरी किए रुपयों से अपनी देनदारियां चुका दीं। चोरी प्रोफेशनल तरीके से न होने पर पुलिस को शंका हुई। जब सख्ती से पूछताछ की तो उसने चोरी करना कबूल कर लिया। पुलिस ने 19 लाख रुपए व जेवर रिकवर कर लिए हैं।
एडिशनल डीसीपी अभिनय विश्वकर्मा ने बताया कि द्वारकापुरी निवासी अनमोल पाटिल ने घर से 46 लाख नकद व जेवर सहित 53 लाख की चोरी होने की शिकायत 21 दिसंबर को दर्ज कराई थी। उसने बताया था कि मां राधाबाई और दादी निर्मला को लेकर वह मां के मायके (खंडवा के एक गांव) गया था। पिता संजय पाटिल घर में अकेले थे। उनकी अचानक तबीयत खराब हुई तो वे अस्पताल भर्ती हो गए। इसी बीच किसी ने ताला तोड़कर घर में चोरी कर ली।
ऐसे पकड़ी गई आरोपी की झूठी कहानी
घटना की जांच करने पर पुलिस को कई चौंकाने वाले बिंदु मिले। इसमें चोरों के प्रोफेशनल न होने की जानकारी पता चली। वहीं, घटना स्थल के आसपास के कैमरे में भी कोई संदिग्ध घटना स्थल के आसपास या फरियादी के बताए समय के आधार पर नजर नहीं आया।
एडीसीपी ने संदेह होने पर यह पता किया कि फरियादी के यहां 53 लाख रुपए थे भी या नहीं। इनकी डिटेल निकलवाई तो पता कि संजय पाटिल का रियल एस्टेट का कारोबार है। संजय ने दर्जनभर से ज्यादा लोगों से रुपए लेकर कई सौदे कर रखे हैं। किसी से कर्ज ले रखा है तो किसी की संपत्तियां खरीदकर उन्हें टोकन देकर उनकी संपत्तियां भी बेच दी हैं।
शिक्षक का घर बेचकर राशि हड़पने के लिए नौटंकी
संजय पाटिल ने कुछ दिन पहले रिटायर्ड शिक्षक परशुराम सागौरे के मकान का सौदा किया था। इस सौदे में 45 लाख रुपए उसे मिले थे। इसके बाद आरोपी ने 1 लाख की टोकन मनी लेकर 46 लाख में इसी घर का सौदा किसी और से कर दिया। इन रुपयों से अपनी देनदारियां चुकाई और शेष राशि रख ली। परशुराम को रुपए न लौटाना पड़ें, इसलिए चोरी की झूठी कहानी बनाई।
इन बिंदुओं पर हुई जांच तो फर्जी साबित हो गई चोरी
• आरोपी संजय ने जिस ढंग से घर के नकूचे व कब्जे तोड़े थे, उसमें पुलिस को प्रोफेशनल चोरों जैसा तरीका नहीं दिखा। दरवाजे के दोनों तरफ तोड़फोड़ के निशान मिले। अंदर से निशान मिलने पर मामला संदिग्ध लगा।
• घटना स्थल पर फरियादी बेटे द्वारा बताए गए समय पर आसपास के कैमरे खंगाले। कोई संदिग्ध नजर नहीं आया।
• तकनीकी जांच में भी पुलिस को घटना स्थल के आसपास कोई अंजाना फोन नंबर चलता हुआ नहीं मिला।
• बेटे, पत्नी और मां को बाहर भेजकर खुद बीमार होने की नौटंकी की। पड़ोसियों को भी चोरी में शामिल करने का प्रयास किया।
• पड़ोसी, फरियादी, बेटे व घर वालों के बयानों में विरोधाभास होने पर चोरी फर्जी साबित हो गई।
• देनदारियों और लोगों से रुपए लेने वाले बिंदु पर संदेह हुआ। सख्ती की तो खुद ही चोरी कबूल ली।