इंदौर। पुलिस अधिकारियो के शासकीय नंबरों का उपयोग कर स्पूफ कॉलिंग, ठग गिरोह ने लोगों को धमकाया; जांच में जुटी क्राइम ब्रांच

इंदौर-देवास के पुलिस अधिकारियों के नाम पर जारी शासकीय फोन नंबरों का उपयोग कर स्पूफ कॉलिंग करके ठग गिरोह ने कई शहरों के लोगों को धमकाया है। खुद को एमजी रोड थाने का टीआई बताकर तो कभी देवास पुलिस का अधिकारी बनकर थाने आकर रिपोर्ट करने को कहा है। ठग गिरोह ने दोनों पुलिस अधिकारियों के नंबर को आधार बनाया है। क्राइम ब्रांच मामले की जांच में जुट गई है।

एडि. डीसीपी क्राइम ब्रांच राजेश दंडोतिया ने बताया कि जयपुर से किसी ने उन्हें भी ऐसी ही शिकायत दर्ज कराई है। एमजी रोड टीआई विजय सिसोदिया और देवास के पुलिस अधिकारी का शासकीय सीयूजी नंबर ठग गिरोह के बदमाशों ने इस्तेमाल किए हैं।

विजय सिसोदिया का नाम लेकर बदमाशों ने कोलकाता, आंध्र प्रदेश, हरियाणा, बिहार और दिल्ली के कुछ लोगों को फोन किए और कहा कि तुम्हारा वारंट निकला है, थाने में आकर बयान देने होंगे। कुछ जागरूक लोगों ने अपने-अपने इलाके के थाना व सायबर पुलिस को इसकी शिकायतें दर्ज करवा दीं, वहीं कुछ लोगों ने इंदौर पुलिस कंट्रोल रूम पहुंचकर तो कुछ ने अधिकारियों से सीधे संपर्क कर शिकायत दर्ज कराई है।

मैंने फोन करने वालों को शिकायत के लिए कहा

टीआई विजय सिसोदिया ने बताया, उन्हें देशभर से कई स्थानों से फोन आए। सभी ने कहा कि आपके नंबर से हमें वाट्सएप कॉल किया जा रहा है। सिसोदिया ने उन्हें समझाया कि ये ऑनलाइन ठग गिरोह के बदमाश हैं। ये स्पूफ कॉलिंग से लोगों को धमकाकर रुपए ऐंठते हैं।

देवास पुलिस को जारी करना पड़ी एक एडवाइजरी

इधर, देवास पुलिस की शिकायत शाखा का अधिकारी बनकर ऐसे ही स्पूफ कॉल इन्हीं राज्यों के आम लोगों को भी किए गए। इसे लेकर देवास पुलिस ने एडवाइजरी जारी की है। उसमें उल्लेख है कि कोई भी पुलिस अधिकारी वाट्सएप कॉलिंग कर किसी भी केस या वारंट में सीधे कॉल कर नहीं बुलाता है। यदि ऐसे कॉल आते हैं तो सतर्क रहें। यदि आपका कोई केस है तो संबंधित थाने में जानकारी देकर पुलिस की लें। किसी के भी कहने पर उनके खाते में रुपए ट्रांसफर न करें।

इसे कहते हैं स्पूफ कॉलिंग

इस तरह के कॉल में सामने वाला किसी ऐसे नंबर का उपयोग करता है, जिससे आप परिचित होते हैं, लेकिन काल करने वाला आपका परिचित नहीं होता। यानी पूरी तरह फर्जी कॉल। इसमें ऑनलाइन ठग गिरोह के बदमाश पुलिस अफसर, सीबीआई, सीआईडी अधिकारियों के ऐसे नंबरों को काॅपी कर लेते हैं, जिन्हें आम लोग पहचानते हैं। फिर फर्जी कॉल कर रुपए ऐंठते हैं।

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