बैंक अकाउंट किराए पर लेकर 300 करोड़ से ज्यादा की ठगी करने वाले दो बदमाश शुभम नामदेव और विशाल पटोले एक साल बाद भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर ही हैं। दोनों ने कई जरूरतमंदों, स्टूडेंट्स और प्रोफेशनल्स को अपने जाल में फंसाकर उनके अकाउंट किराए पर लिए और धोखाधड़ी की।
पहले मई और फिर सितंबर 2024 में इन दोनों की नामजद शिकायत पर पुलिस ने एफआईआर तो दर्ज कर ली, लेकिन जांच नहीं की। एक साल तक फाइल को क्राइम ब्रांच ने लटकाए रखा। हालांकि, पुलिस इनके 5 साथियों को दो माह पहले 24 मार्च 2025 को गिरफ्तार कर चुकी है। इससे पहले पुलिस ने 2 आरोपियों को पकड़ा था।
एक साल के दौरान क्राइम ब्रांच के 5 अफसरों की टेबल पर यह फाइल भटकती रही, लेकिन जांच आगे नहीं बढ़ सकी। जब इसकी शिकायत सीनियर अफसरों तक पहुंची तो उन्होंने इसकी गोपनीय जांच शुरू करा दी। लेकिन, जांच पूरी हो पाती इससे पहले जांच अफसर का तबादला हो गया।
पुलिस सूत्रों का कहना है कि कुछ पुलिसकर्मी आरोपी शुभम नामदेव और विशाल के संपर्क में थे। इसलिए क्राइम ब्रांच जो भी कार्रवाई करती उसकी सूचना पहले ही शुभम तक पहुंच जाती और वह लोकेशन बदलने में कामयाब हो जाता था।
यही कारण था कि डिजिटल धोखाधड़ी के अलग-अलग मामलों में पंजाब, छत्तीसगढ़ और गुजरात की पुलिस भी दोनों की तलाश में इंदौर आई, लेकिन वे हाथ नहीं लगे। पढ़िए यह रिपोर्ट…

कमीशन देकर किराए पर लेते थे खाते
बैंक खाते किराए पर लेकर ऑनलाइन ठगी करने वाली गैंग का करीब एक साल पहले खुलासा हुआ था। इसके बाद इंदौर क्राइम ब्रांच ने ऑनलाइन ठगी के बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए मास्टरमाइंड शुभम नामदेव के साले अमन और उसके साथी कुलदीप सहित 7 को गिरफ्तार किया था। ये सभी आरोपी डॉ. मोहन सोनी के साथ हुई 3 करोड़ से ज्यादा की ठगी में शामिल थे।
शुभम और उसका गिरोह ऑनलाइन ठगी, डिजिटल अरेस्ट और डिजिटल फ्रॉड के लिए बैंक खाते उपलब्ध कराता था। ठगी की रकम इन खातों में ट्रांसफर की जाती थी और खाता धारकों को कुछ कमीशन दिया जाता था। खाते अधिकांश छात्रों और जरूरतमंदों के होते थे।
जांच में सामने आया है कि इस गिरोह के जरिए करोड़ों रुपए का ट्रांजेक्शन हुआ है। पुलिस इसे प्रारंभिक रूप से 300 करोड़ तक मान रही है। हालांकि, शुभम के पकड़ में आने पर यह आंकड़ा बढ़ने की उम्मीद है।
मामले में अब तक पुलिस सात आरोपी अमन नामदेव, कुलदीप पगारे (निवासी राजनगर), आनंद पहाड़िया (निवासी हवा बंगला, द्वारकापुरी), मोहित भावसार (निवासी एरोड्रम), मोहम्मद रेहान (निवासी उज्जैन), शाहरुख कुरैशी और एजाज खान को गिरफ्तार कर चुकी है। जबकि शुभम और विशाल की तलाश है।


गुजरात, छत्तीसगढ़ और पंजाब को भी तलाश
शुभम को गुजरात, छत्तीसगढ़ और पंजाब पुलिस भी तलाश कर रही है। इंदौर में भले ही क्राइम ब्रांच ने उसका नाम 3 करोड़ की धोखाधड़ी में शामिल किया हो। लेकिन, वह 200 अकाउंट से देशभर के लोगों से 300 करोड़ से ज्यादा हड़प चुका है।
हाल ही में रायपुर (छत्तीसगढ़) के देवेंद्र नगर थाने से एसआई देवेंद्र भी शुभम नामदेव को ढूंढने इंदौर आए थे। उन्होंने यहां क्राइम ब्रांच के साथ एरोड्रम और अन्नपूर्णा इलाके के फ्लैट में दबिश दी, लेकिन वह यहां से पहले ही भाग चुका था। छत्तीसगढ़ में पकड़ाए एक आरोपी ने 6 लाख रुपए के फर्जी ट्रांजेक्शन में शुभम नामदेव का नाम लिया था। इसके चलते छत्तीसगढ़ पुलिस शुभम को तलाश रही है।
डिजिटल अरेस्ट कर हुए करोड़ों रुपए के लेनदेन के ऐसे ही एक मामले में गुजरात पुलिस भी शुभम को ढूंढते हुए इंदौर आई थी। अप्रैल में ही पंजाब पुलिस भी शुभम नामदेव और उसके साथी विशाल पटोले को ढूंढते हुए इंदौर आई थी। पंजाब पुलिस ने स्थानीय पुलिस की मदद ली, लेकिन वह शुभम और विशाल तक पहुंच ही नहीं पाई। कुछ दिन पहले शुभम के एक साथी को मंदसौर पुलिस ने पकड़ा है।
ये 5 अफसर जांच में रहे शामिल
- मंगल सिंह बघेल, एसआई, : 2024 में केवल 24 घंटे के लिए फाइल रही। वे जांच शुरू कर पाते या किसी के बयान लेने की तैयारी करते इसके पहले ही इस केस की फाइल ले ली गई।
- पंकज मिश्रा, एसआई: शुभम और विशाल की लोकेशन ट्रेस कराई। लोकेशन स्कीम नंबर 136 में मिली। यहां क्राइम ब्रांच के पहुंचने के पहले ही दोनों मोबाइल बंद करके भाग निकले। कुछ दिन बाद मिश्रा से जांच वापस ले ली गई।
- देवेंद्र सिंह पंवार, एएसआई: कोई कार्रवाई नहीं।
- जीतू मिश्रा, एसआई: कोई कार्रवाई नहीं।
- मनीष लोहरिया, एसआई: कोई कार्रवाई नहीं।
मीडिया में एंट्री ली ताकि पुलिस से नजदीकी बना सके

कार्रवाई नहीं हुई तो अफसरों से मिले
मामले में अब तक कोई कार्रवाई नहीं होने पर शिकायतकर्ता रोहिताश्व पांडे ने क्राइम ब्रांच के डीसीपी राजेश त्रिपाठी से मिले। उन्होंने सीएम हेल्पलाइन पर भी शिकायत की। त्रिपाठी ने एसीपी आशुतोष पटेल को जांच सौंपी। कहा कि क्राइम ब्रांच के किसी भी पुलिसकर्मी को इसकी जानकारी न लगे। पटेल ने पीड़ितों से बात की और बयान लिए। इस बीच उनका तबादला हो गया।
एसीपी सिकरवार ने दो पर केस दर्ज किया
डीसीपी राजेश त्रिपाठी ने मामले की फाइल एसीपी ललित सिकरवार को सौंप दी। सिकरवार ने पीड़ितों को एक होटल में बुलाकर बयान लिए, ताकि क्राइम ब्रांच के किसी भी पुलिसकर्मी को भनक न लगे। सिकरवार ने जांच के बाद डीसीपी त्रिपाठी को पूरी फाइल सौंपी। शुभम नामदेव और विशाल पटोले को आरोपी बनाकर केस दर्ज किया। फिलहाल इस केस की जांच क्राइम ब्रांच के टीआई आशीष सप्रे कर रहे हैं।
इस तरह हुई ठगी

शुभम की एडवाइजरी कंपनी का सच
करीब 5 साल पहले शुभम ने एरोड्रम इलाके में कैफे किराए पर लिया। यह एक पैथोलॉजी लैब की पहली मंजिल पर था। चूंकि शुभम उज्जैन में फर्जी एडवाइजरी कंपनी ऑपरेट करने के आरोप में पकड़ा जा चुका था। जमानत पर छूटने के बाद वह इंदौर आ गया। यहां उसका परिचय अभिषेक उर्फ गोलू जैन से हुआ।
इसी गोलू के साथ मिलकर दोनों ने डिजिटल अरेस्ट के जरिए ठगी शुरू की। लेकिन धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े के एक मामले में गोलू पर ईडी और आयकर विभाग ने कार्रवाई की तो वह यहां से दुबई शिफ्ट हो गया। दावा किया जा रहा है कि शुभम भी नेपाल के रास्ते दुबई शिफ्ट होने वाला था, लेकिन वह गोलू की मदद से इंदौर में ही लोकेशन बदल-बदल कर रह रहा है।
पुलिस सूत्रों का कहना है कि शुभम और गोलू ने कैफे में आने-जाने वाले स्टूडेंट और जरूरतमंद लोगों की जानकारी ली। उन्हें लालच देकर अकाउंट किराए पर लिए और एडवाइजरी और डिजिटल अरेस्ट से लिए गए रुपए इन अकाउंट में डलवाए।
अब जानिए क्या है शिकायत
डॉ. मोहन सोनी और रोहिताष पांडे ने इस मामले में शिकायत दर्ज कराई थी। रोहिताष ने अप्रैल 2024 में शिकायत की। उसने शुभम और विशाल पटोले द्वारा खातों में फर्जी तरीके से रुपए जमा करना बताया गया। इसके पांच माह बाद डॉ. मोहन सोनी ने सितंबर 2024 में शिकायत की। डॉ. सोनी से इन्होंने एडवाइजरी के नाम पर 2 करोड़ 68 लाख से अधिक की राशि अकाउंट में जमा कराई। डॉ.सोनी की शिकायत के बाद पुलिस ने सितंबर 2024 में ही केस दर्ज कर लिया।

डॉ. मोहन सोनी की शिकायत के बाद ही पुलिस ने शुभम नामदेव पर केस दर्ज किया है।
