इंदौर। फौजी की हत्या की रहस्यमयी कहानी; पुणे से जम्मू, भोपाल तक की अनसुलझी यात्रा

इंदौर के पास कालीसिंध नदी में जम्मू के आर्मी जवान की हत्या पहेली बन गई है। दो महीने बाद भी पुलिस यह नहीं पता लगा सकी कि पुणे से जम्मू के लिए ट्रेन से निकले जवान को कैसे मारा और लाश नदी में कैसे आ गई? पिता जगदीश राज निवासी जम्मू कभी इंदौर तो कभी शाजापुर के रेलवे स्टेशन, पुलिस स्टेशन के चक्कर काट रहे हैं। वे कहते हैं कि जब मैंने सुना कि मेरे बेटे की मौत हो गई तो मुझे चक्कर आ गए। चेहरा देखकर भी उसे पहचान नहीं सका। आंखें बाहर निकली हुई थीं लेकिन कपड़े और हाथ के कड़े को देख पहचाना जिस पर जसवंतसिंह नाम लिखा था। वह कालीसिंध में बहकर कैसे आया, यह कोई नहीं बता रहा। मुझे इंसाफ चाहिए…।

55 साल के जगदीश राज के 26 साल के बेटे की मौत रहस्य बन गई है। बताते हैं कि जिस जगह लाश मिली, वह रेलवे ट्रेक के आसपास आता ही नहीं है। जम्मू से 1500 किलोमीटर का सफर तय कर मध्यप्रदेश के शहरों में बेटे की मौत की वजह पता लगाने के लिए भटक रहे हैं। घटना के करीब 2 महीने बाद पुलिस ने 18 अगस्त को धारा 201 और 302 में हत्या का केस दर्ज किया है। पुलिस का कहना है कि जांच में पता चला है कि पानी में डूबने से जसवंत की मौत नहीं हुई। मामले में जांच की जा रही है।

आखिरी बार 18 जून को ही उससे बात हुई थी…

मैं जगदीश राज। सांबा डिस्ट्रिक्ट जम्मू का रहने वाला हूं। दो बेटे हैं। बड़ा जसवंतसिंह और छोटा कुलवंतसिंह। जसवंत 2015 में आर्मी में भर्ती हुआ। सिपाही था और फिर आगे जाकर लांस नायक बना। पहले आंध्र प्रदेश में उसकी ट्रेनिंग हुई, फिर पोस्टिंग सिक्किम में। दूसरी पोस्टिंग ग्वालियर। उसके बाद 22 मई 2022 को पुणे में पोस्टिंग हो गई थी और तब से वहीं पोस्टेड था।

18 जून 2023 की बात है। उस दिन उससे फोन पर बात हुई थी। छोटे बेटे ने उसे फोन लगाया था। एक-दो मिनट जसवंत हुई। फिर दो दिन तक कोई बात नहीं हुई। 20 जून को उसे कॉल किया तो मोबाइल स्विच्ड ऑफ मिला। कई बार फोन लगाते रहे लेकिन 22 जून तक भी फोन बंद ही था। मैंने छोटे बेटे कुलवंत से कहा कि किसी और का नंबर निकालो ताकि जसवंत से बात हो सके। कुलवंत ने राजौरी यूनिट में किसी को फोन लगाया तो वहां से पुणे में किसी का नंबर दिया गया।

वहां बात की तो पता चला कि जसवंत को तो 19 जून को ही जम्मू राजौरी यूनिट के लिए पुणे से रवाना हो गया है। यह सुनकर हम हैरत में पड़ गए। जसवंत ने यह बात नहीं बताई थी कि वह पुणे से जम्मू आ रहा है। 19 जून को पुणे से निकला तो 22 जून तक वो कहां है, कोई जानकारी नहीं थी। आखिर बार 18 जून को हुई बातचीत में भी उसने जम्मू रवानगी की कोई जानकारी परिवार को नहीं दी थी।

19 जून को पुणे से निकलने पर भी 21 जून को जम्मू पहुंचना था। 22 जून को यह जानकारी मिलने के बाद परिवार 23 जून को जम्मू रेलवे स्टेशन पहुंचा। पता चला कि झेलम ट्रेन से उसे जम्मू आना था लेकिन नहीं आया है। हमने जम्मू की रेलवे पुलिस को लापता बेटे की जानकारी दी।

जम्मू रेलवे स्टेशन पर पुलिस ने मिसिंग की रिपोर्ट लिखी। वहां के सीसीटीवी फुटेज देखे लेकिन उसमें भी वह दिखाई नहीं दिया। इस बीच घर से मेरे छोटे भाई का फोन आया कि जसवंत का पता चल गया है, वह बीमार था और मध्यप्रदेश के शाजापुर में अस्पताल में है, आप घर लौट आओ।

मैं घर चला आया। मेरे भाई को शाजापुर पुलिस ने फोन किया था कि कालीसिंध नदी में उनके बेटे का शव मिला था। बेटे के जेब से परिचय पत्र के जरिए पुलिस ने उनसे संपर्क किया था। हालांकि तब तब तक भाई ने मुझे बेटे की मौत की बात नहीं बताई थी। भाई ने यही कहा था कि जसवंत बीमार है, आपको शाजापुर-मध्य प्रदेश जाना है। फिर जम्मू से चंडीगढ़ तक बस से आए और चंडीगढ़ से इंदौर तक हवाई जाकर से 24 अगस्त को पहुंच गए।

शाजापुर पहुंचे तो मुझे डेड बॉडी पहचानने के लिए कहा गया। अस्पताल में बोले कि आपके बेटे की मौत हो गई है। वहां पर आर्मी के दो लोग भी थे और पुलिस वाले थे। मुझे बताया कि काली सिंध नदी में डेड बॉडी मिली है। ये सुन कर मुझे चक्कर आ गए। मैं गिर पड़ा।

जहां डेड बॉडी रखी थी, उस कमरे में मुझे जैसे-तैसे पकड़ कर ले गए। बेटे को देखा तो चेहरे से उसे पहचान पाना संभव नहीं था। आंखें बाहर आ चुकी थी। उसके कपड़े पहचाने, घर से जो कपड़े डालकर गया था वो ही पहन रखे थे। उसके हाथ में कड़ा था, जिस पर जसवंत सिंह नाम लिखा था। गले में चेन थी। उसकी पहचान की। चेहरा देखने के लायक नहीं था।

पुलिस ने बताया कि जसवंत का शव कालीसिंध नदी में पड़ा मिला है। वह यहां कैसे पहुंचा, इसकी जानकारी नहीं है। बाद में पता किया तो जानकारी मिली की वह भोपाल में ट्रेन से उतरा था, उसकी ट्रेन छूट गई थी। उसने भागकर ट्रेन पकड़ने की कोशिश भी की लेकिन ट्रेन पकड़ नहीं सका। फिर वो दूसरी ट्रेन में बैठ गया।

कालीसिंध स्टेशन पर एक मिनट के लिए ट्रेन रुकती है। वहां वो उतरा या उतारा गया। वो तब जिंदा था या नहीं, ये भी नहीं पता। पुलिस को कालीसिंध रेलवे स्टेशन से 6 किलोमीटर दूर बेटे की डेथ बॉडी मिली। अब बेटे की मौत को दो महीने हो गए हैं, पुलिस जांच कर रही है लेकिन हमें तो कुछ हाथ आ नहीं रहा है। क्या हो रहा है, क्या नहीं हो रहा है, कुछ भी पता नहीं है। मुझे तो इंसाफ चाहिए कि क्या हुआ बेटे के साथ, किसने किया, क्यों किया।

जसवंत सिंह का शव पुलिस को इस तरह पानी में डूबा हुआ मिला था। चेहरा देखने लायक स्थिति में नहीं होने के कारण उसे ब्लर किया गया है।

बेटे की शादी की बात चल रही थी

पिता ने बताया बेटे की शादी की बात चल रही थी। जसवंत बोल रहा था कि मैं सितंबर में छुट्‌टी आऊंगा तो लड़की देख लेंगे। लड़की वाले उसकी शादी को लेकर बात भी कर रहे थे। उन्हें भी लड़का देखने के लिए सितंबर का ही समय दिया था। बेटे की उम्र 26 साल थी। सबसे हंसी-मजाक से ही बात करता था। 55 साल का किसान हूं, मैंने देशसेवा के लिए भेजे बेटे को इस तरह खो दिया। मुझे इंसाफ चाहिए कि मेरे बेटे के साथ क्या हुआ, कौन जिम्मेदार है?

डूबने से नहीं हुई जवान की मौत

शाजापुर एसपी यशपाल सिंह का कहना है कि पीएम रिपोर्ट में जसवंत की मौत का कारण स्पष्ट नहीं हुआ। इसके बाद विसरा, हार्ट व टिबीया बोन सुरक्षित की गई। विसरा का रासायनिक परीक्षण और टीबीया बोन के डायटम टेस्ट के लिए सलाह दी गई। जिस पर आर्टिकलों का ड्राफ्ट तैयार कर एफएसएल और मेडिकोलिगल कॉलेज भोपाल भेजा गया। डायटम टेस्ट रिपोर्ट में परीक्षण कर्ता वैज्ञानिक अधिकारी ने लिखा कि जवान की मौत पानी में डूबने से होने की आशंका कम है।

पुलिस ने जांच में पाया कि अज्ञात व्यक्ति ने जवान की हत्या कर शव को छिपाने के उद्देश्य से ग्राम रूपापुरा के नजदीक कालीसिंध नदी में फेंक दिया। डेड बॉडी पानी में डूबी हुई मिली थी, लेकिन जांच में डूबने से मौत नहीं होना पाया गया। मामले में जांच की जा रही है।

अब जानिए क्या होता है डायटम टेस्ट

किसी भी व्यक्ति की मृत्यु पानी में डूबने से हुई है या नहीं इसका पता डायटम टेस्ट से लगाया जाता है। जब डूबने के दौरान ब्लड सर्कुलेशन बंद हो जाता है और मौत हो जाती है तो ऐसी स्थिति में शरीर में डायटम पाया जाता है। यदि किसी की हत्या कर शव पानी में फेंका जाए तो उसके अंदर डायटम नहीं मिलता है। जसवंत के मामले में भी डायटम नहीं मिला, इसलिए इसे हत्या मानते हुए केस दर्ज किया गया है।

 

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