
अगर आप मूंगफली का तेल खरीद रहे हैं, तो थोड़ा सतर्क हो जाइए। दरअसल शहर में कुछ स्थानों पर मूंगफली तेल के नाम पर मिलावटी तेल बेचा जा रहा है। मिलावट खोरों ने कहीं मूंगफली तेल में सोयाबीन तेल की मिलावट की है, तो कहीं सिर्फ एसेंस मिलाया है।
यह खुलासा इंदौर में हुई एक जगह छापेमारी के दौरान हुआ है। यहां तेल में एसेंस मिलाया जा रहा था। यह एसेंस खाने योग्य है या नहीं, इसकी अभी रिपोर्ट आना बाकी है। तेल के इस कालेधंधे से लोगों की जेब के साथ ही सेहत पर भी असर पड़ रहा है।
जानिए कैसे हुआ मूंगफली तेल के नाम पर मिलावट का खुलासा…
खाद्य विभाग को सूचना मिली थी कि शहर में कुछ स्थानों पर मूंगफली तेल के नाम पर मिलावटी तेल बेचा जा रहा है। ऐसी दुकानों प्रोडक्शन यूनिट की जानकारी हासिल की गई। सबसे पहला नाम मल्हारगंज क्षेत्र स्थित जैन मसाला व अनूप ट्रेडर्स का सामने आया। यहां छापा मारने पर टीम को अलग-अलग ब्रांड का मूंगफली तेल मिला।
चार दिन और छानबीन करने पर पालदा इलाके का पाइंट मिला। टीम ने पालदा में अथर्व इंटरप्राइजेज, सांवरिया इंडस्ट्रीज सहित तीन स्थानों पर छापा मारा। टीम ने अर्थव इंटरप्राइजेज में निरीक्षण किया। यहां रिफाइंड सोयाबीन तेल, पंखिड़ा ब्रांड मूंगफली तेल के नाम से मूंगफली एवं सोयाबीन तेल की पैकिंग का काम किया जा रहा था।
टीम ने यहां से दोनों तेल के सैंपल लिए। संदेह के आधार पर 5 हजार लीटर से ज्यादा तेल का स्टॉक जब्त किया गया। इसकी कीमत 9 लाख रुपए है। इसके साथ ही नोटिस जारी किया गया। टीम ने यहीं सांवरिया इंडस्ट्रीज पर भी छापा मारा। यहां से अंगूर ब्रांड सोयाबीन तेल एवं लूज सोयाबीन तेल के दो सैंपल लिए। पांच दिनों की कार्रवाई में कुल 6 ब्रांड के 10 सैंपल लेकर भोपाल लैब भेजे गए। इनकी रिपोर्ट अभी आना है।

कुछ व्यापारी तो मूंगफली का तेल 25% मिलाते हैं और मूंगफली का स्ट्रॉन्ग ऐसेंस मिलाते हैं।
25 से 40 प्रतिशत ही रहता है मूंगफली तेल
सूत्रों के मुताबिक शहर में कोटा सहित राजस्थान के अलग-अलग शहरों से सोयाबीन तेल मंगवाया जाता है। फिर इसमें अलग-अलग तरह की मिलावट की जाती है। मिलावटखोर 60% सोयाबीन तेल और 40% मूंगफली तेल मिलाकर इसे तैयार करते हैं। इसी तरह कहीं 70% सोयाबीन और 30% मूंगफली का तेल मिलाते हैं।
कुछ व्यापारी तो मूंगफली का तेल 25% मिलाते हैं और मूंगफली का स्ट्रॉन्ग ऐसेंस मिलाते हैं। इससे मिलावटी तेल हुबहू मूंगफली जैसा लगता है। एसेंस खाने का (Edible) है या नहीं, यह अभी पता नहीं चला है।
सीनियर फूड इंस्पेक्टर मनीष स्वामी ने बताया कि जो सैंपल टेस्टिंग के लिए भेजे गए हैं, उनकी रिपोर्ट आने में समय लगेगा। वहीं कलेक्टर आशीष सिंह का कहना है कि जनता की सेहत के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ अभियान जारी रहेगा।