इंदौर। ट्रिपल मर्डर केस: मॉल की मुलाकात बनी मौत का जाल, दोस्ती के बहाने घर में घुसी नेहा, तीन पीढ़ियों की निर्मम हत्या; फांसी से उम्रकैद तक का सफर – देखें VIDEO

मध्यप्रदेश क्राइम फाइल्स के पहले पार्ट में आपने पढ़ा कि इंदौर में किराए से रहने वाले निरंजय देशपांडे की पत्नी मेघा, बेटी अश्लेषा और सास रोहिणी की खून से लथपथ लाशें बेडरूम में मिली थीं। निर्मम तरीके से उनकी हत्या की गई थी। मौके पर पहुंची पुलिस ने जांच शुरू की तो अधिकारियों को वहां जूते के निशान मिले।

हत्या किसने और क्यों की? पुलिस को न तो ये पता चल पा रहा था और न ही आरोपियों के बारे में कोई ठोस सुराग मिल रहा था। इन सभी सवालों के जवाब पुलिस तलाशने में जुटी थी। इस बीच एमआईजी थाना पुलिस को सूचना मिली कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के एटीएम के बाहर एक लड़की संदिग्ध स्थिति में खड़ी है।

पुलिस मौके पर पहुंची और तलाशी ली तो युवती के पास से अश्लेषा का एटीएम कार्ड जब्त हुआ। अब पढ़िए आगे की कहानी…

घर से मिले चोरी के जेवर और एटीएम कार्ड

एटीएम के बाहर से पकड़ी गई युवती ने पूछताछ में अपना नाम नेहा वर्मा और उम्र 23 साल बताई। पुलिस नेहा को थाने ले आई।

पुलिस ने निरंजय देशपांडे के साले डॉ. दीपक हरि रानाडे को फोन कर बताया कि एक लड़की को पकड़ा है, जिसके पास से अश्लेषा का एटीएम कार्ड बरामद हुआ है। डॉ. दीपक थाने पहुंचे। तब तक नेहा पूछताछ में जेवर और बाकी सामान के बारे में बता चुकी थी, जो उसने निरंजय देशपांडे के घर से चुराए थे।

डॉ. दीपक ने भी इन जेवर को देखकर कन्फर्म किया कि ये उनकी मां और बहन के हैं। पुलिस ने नेहा से उसका पता-ठिकाना जाना। वह अन्नपूर्णा रोड स्थित देवेंद्र नगर में रहती थी। पुलिस उसे लेकर घर पहुंची। नेहा ने घर में ड्रेसिंग टेबल से निकालकर सोने की दो चूड़ियां, सोने का एक पैंडल, टूटा हुआ मंगलसूत्र, एक एटीएम कार्ड, जिस पर मेघा देशपांडे लिखा था, पुलिस के सुपुर्द कर दिया।

पुलिस पूछताछ में बताए दो साथियों के नाम

नेहा ने अपने दो अन्य साथियों के बारे में पुलिस को जानकारी दी। उसके बताने पर पुलिस घनश्यामदास नगर गई, वहां आरोपी राहुल उर्फ गोविंद मिला। उसे गिरफ्तार किया। उसके घर की अलमारी से पुलिस ने सोने की दो चूड़ियां, सोने का टूटा एक मंगलसूत्र, एक पिस्टल बरामद की।

इसके बाद पुलिस तीसरे आरोपी मनोज पिता नानूराम के सपना-संगीता टॉकीज के पीछे विद्यानगर स्थित घर पहुंची। पुलिस ने मनोज को भी गिरफ्तार किया और उसकी निशानदेही पर बिस्तर के नीचे सोने की दो चूड़ियां, सोने का एक मंगलसूत्र, एक चाकू जब्त किया।

मनोज ने अपने कपड़े-जूते पिता के सिंधी कॉलोनी स्थित घर की अलमारी में छिपाए थे, जिन्हें पुलिस ने बरामद कर लिया। उसने बताया कि मोबाइल राऊ की तरफ मारुति शोरूम के पास फेंक दिया था। पुलिस ने राहुल के बताए अनुसार आईआईएम कॉलेज के आगे पीथमपुर रोड पर बनी पुलिया के नीचे से एक बाइक जब्त की। राहुल ने ये बाइक भंवरकुआं थाना इलाके से चोरी की थी।

पहली बार मॉल में हुई थी नेहा और मेघा की मुलाकात

पुलिस तीनों आरोपियों तक पहुंच चुकी थी, लेकिन ये सवाल अभी भी बना हुआ था कि आखिर नेहा वर्मा ने तीन महिलाओं की हत्या क्यों कर दी? नेहा जितनी खूबसूरत थी, उतनी ही महत्वाकांक्षी भी थी। मिडिल क्लास से ताल्लुक रखती थी और अमीर बनने के सपने देखती थी। वो ढेर सारा पैसा कमाना चाहती थी और अपने बॉयफ्रेंड राहुल के साथ सेटल होने की प्लानिंग कर रही थी।

एक दिन एक मॉल में वो मेघा देशपांडे से टकराई थी। नेहा ने तुरंत कहा, ‘आंटी सॉरी, मैंने आपको देखा नहीं था।’ माफी मांगते हुए नेहा जमीन पर गिरा मेघा का सामान उठाकर देने लगी। मेघा ने काफी ज्वेलरी पहनी थी। नेहा मेघा को कार तक छोड़ने आई। उसे अपना परिचय दिया।

मेघा ने नेहा को अपने घर आने के लिए कहा। बाद में नेहा एक-दो बार मेघा के घर भी गई।

बॉयफ्रेंड से शादी की प्लानिंग कर रही थी नेहा

नेहा का लंबे समय से राहुल के साथ अफेयर चल रहा था। दोनों शादी करना चाहते थे लेकिन पैसे नहीं थे। शादी से पहले दोनों जल्द से जल्द ज्यादा पैसा कमाना चाहते थे। नेहा ने राहुल के साथ मिलकर मेघा के घर लूट की प्लानिंग की। इस काम में राहुल ने अपने साथ मनोज को भी जोड़ लिया।

19 जून 2011 को नेहा ब्यूटी प्रोडक्ट्स दिखाने के बहाने मेघा से मिलने उसके घर गई। लिविंग रूम में मेघा और नेहा बात करने लगे। इस बीच नेहा ने मेघा से प्रोडक्ट्स में कन्फ्यूजन की बात कहते हुए अपने बॉयफ्रेंड राहुल को फोन कर मेघा के घर बुलाया। इधर, राहुल पहले से नेहा के फोन का इंतजार कर रहा था। फोन आते ही वो साथी मनोज के साथ मेघा के घर पहुंचा।

मेघा ने घर का दरवाजा खोला और राहुल को अंदर बैठने के लिए कहा। मौका पाकर उन्होंने पिस्टल निकाली और फायर कर दिया। गोली मेघा के सिर में लगी। दूसरी गोली गलती से राहुल के पैर में लग गई। आवाज सुनकर अंदर से बेटी अश्लेषा और मेघा की मां रोहिणी बाहर आईं तो चाकू से गोदकर आरोपियों ने दोनों की हत्या कर दी।

नेहा ने तीनों महिलाओं की लाश से ज्वेलरी निकाली। नकदी सहित अन्य सामान भी चुरा लिए।

तीनों को पहले फांसी, बाद में 25 साल की सजा

कोर्ट ने माना कि एक ही परिवार की तीन पीढ़ी बेटी, मां और नानी की हत्या की गई थी। तीनों महिलाएं बिना किसी विद्वेष या आपराधिक जीवन के अपनी जिंदगी जी रही थीं। चंद रुपए के लालच में आकर बड़े ही क्रूर तरीके से गोली मारकर और शरीर के लगभग हर हिस्से पर चाकू से गोदकर उनकी हत्या कर दी गई।

ऐसी स्थिति में आरोपी दया के पात्र नहीं है। अपराध नृशंस प्रकृति का है। फैसला सुनाते समय विशेष अपर सत्र न्यायाधीश डीएन मिश्र ने कहा था कि तीन असहाय महिलाओं की हत्या हुई है। यह मामला विरल से विरलतम (रेयरेस्ट ऑफ रेयर) अपराध की श्रेणी में आता है। आरोपियों के लिए नरम रुख रखना उचित नहीं है। ये दया के पात्र नहीं हैं। कोर्ट ने तीनों आरोपी नेहा, राहुल और मनोज को फांसी की सजा सुनाई।

फांसी की सजा के खिलाफ तीनों हाई कोर्ट गए। हाई कोर्ट ने भी फांसी की सजा को बरकरार रखा। मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। जेल में रहते हुए नेहा ने जरदौजी की कला सीखी और सिखाई। इसके अलावा ब्यूटी पार्लर का कोर्स सीखा और दूसरी महिला बंदियों को साफ-सुथरा रहने के लिए जागरूक किया। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने तीनों की फांसी की सजा को 25 साल की सजा में बदल दिया।

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