
इंदौर की महिला को डिजिटल अरेस्ट कर 46 लाख रुपए ठगने के मामले में पुलिस ने दो आरोपियों को यूपी से गिरफ्तार किया है। इनमें से एक आरोपी के बैंक खाते में 40 लाख रुपए जमा हुए थे। पुलिस बैंक खातों की डिटेल और टेक्निकल सर्विलांस की मदद से इन तक पहुंची।
डिजिटल अरेस्ट की यह घटना 11 सिंतबर 2024 की है। महिला ने जिन बैंक खातों में पैसे डाले थे, पुलिस ने उनकी जानकारी निकाली। इसके बाद टीम कन्नौज (यूपी) के फलाह दारेन मदरसा समिति के प्रबंधक अली अहमद खान (69) और सह प्रबंधक असद अहमद खान (36) तक पहुंची। दोनों आरोपियों से महिला को ब्लैकमेल करने वालों के बारे में पूछताछ की जा रही है।
डीसीपी क्राइम ब्रांच राजेश त्रिपाठी ने बताया-
आरोपी तीन से चार मदरसे चलाते हैं। वारदात के कुछ दिन पहले ही इन्होंने करंट अकाउंट खोला था। मदरसा चलाने के नाम पर इन्होंने खाता खोला। इसके बाद फ्रॉड के पैसे इसमें आना शुरू हो गए। इससे लग रहा है कि मदरसे के काम के लिए कम, इस काम के लिए ये खाता खोला गया है। इसमें हर पहलुओं की जांच की जाएगी।
खाते में हुआ 1.5 करोड़ रुपए का ट्रांजैक्शन पुलिस ने जब आरोपियों पूछताछ की और बैंक खातों की जानकारी निकाली, तो पता चलता कि ये खाता इसी इंटेशन से खुलवाया गया था। खाता खोलने के लिए राशि दी गई थी। खाते में जो पैसा आता, उसका कुछ प्रतिशत इन्हें देने का बोला गया था। इनके खाते में 1.5 करोड़ रुपए के ट्रांजैक्शन हुए हैं, इसकी जांच भी की जा रही है। खाता खोलने में अली अहमद खान के दस्तावेज भी मिले। खाते का एटीएम भी उसके पास ही है।
आरोपियों के 9 बैंक अकाउंट मिले पुलिस का कहना है कि आरोपियों के कुल 9 खाते मिले हैं। इन्हें फ्रीज कराया जा रहा है। खाते में जो ट्रांजैक्शन हुआ है, वो कौन-कौन से फ्रॉड से आया है, इसकी भी जानकारी निकाली जाएगी। खाते में आए पैसों को कहां-कहां इस्तेमाल किया जाता था। इसकी भी डिटेल निकाली जाएगी।
महिला को 5 दिन तक डराया-धमकाया था बदमाशों ने महिला को ट्राई (टेलीकॉम रेग्युलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया) का अधिकारी बनकर धमकाया। कहा कि आपके फोन नंबर का गलत इस्तेमाल हुआ है। सीबीआई और क्राइम ब्रांच के अधिकारी बनकर उन्हें 5 दिन तक डराते रहे।
घटना 11 सितंबर की है। इस दिन सुबह महिला को वॉट्सऐप पर कॉल आया। ट्राई के दिल्ली हैड ऑफिस से इंक्वायरी ऑफिसर बताकर कहा कि आपके नाम से एक सिम रजिस्टर्ड है। इससे इल्लिगल एडवरटाइजिंग और हैरेसमेंट का अपराध किया गया है। आपके खिलाफ एफआईआर की गई है।
थोड़ी देर बाद दूसरे मोबाइल नंबर से कॉल आया। इस बदमाश ने बोला कि वह सीबीआई ऑफिसर बोल रहा है। आपके आधार कार्ड से दर्ज एक पार्सल कम्बोडिया भेजा गया है, जो कस्टम विभाग में है और इस पर इंक्वायरी चल रही है। आपके नाम की एक पासबुक भी निकली है। इसमें ड्रग्स, आतंकवाद, मनी लॉन्ड्रिंग के लिए करोड़ों रुपए के ट्रांजैक्शन मिले हैं। हमने आपका वारंट निकाला है।
बदमाशों ने उनसे कहा कि जितने भी आपके पास पैसे हैं, उसकी जानकारी हमें दीजिए, नहीं तो ठीक नहीं होगा। आप सारा पैसा आरटीजीएस के जरिए हमें ट्रांसफर करिए। आपने सारी जानकारी नहीं दी, तो आपको और आपके बच्चों को जान का खतरा है। आप लगातार हमारी सर्विलेंस में रहेंगी और कुछ भी काम या किसी से कोई बात करने से पहले हमसे परमिशन लेना होगी।
13 सितंबर को महिला ने बदमाशों के बताए गए
आईसीआईसीआई बैंक के खाते में 40 लाख रुपए आरटीजीएस के जरिए ट्रांसफर किए, इसके बाद बंधन बैंक के खाते में 6 लाख रुपए आरटीजीएस के जरिए ट्रांसफर किए। बदमाशों ने महिला को फोन पर ऑडियो और वीडियो कॉलिंग के माध्यम से डरा धमका कर घर में ही अरेस्ट रखा। बाद में महिला ने क्राइम ब्रांच और एनसीआरपी पोर्टल पर शिकायत की थी।
जानिए क्या है डिजिटल अरेस्ट और कैसे बचें


