
नगर निगम में हुए फर्जी बिल घोटाले में गिरफ्तार आरोपी अभय राठौर की जमानत पर शनिवार को हाई कोर्ट में सुनवाई है। राठौर की पत्नी ने कोर्ट के समक्ष शपथ पत्र पेश किया है। इसमें घोटाले में निगम में उच्च पदों पर रहे अधिकारियों के नामों का जिक्र है। इन पर आरोप लगाए हैं कि घोटाला इनकी शह पर ही हुआ है, लेकिन मेरे पति को ही आरोपी बनाकर पेश किया गया है। इसकी निष्पक्ष जांच की जाना चाहिए।
राठौर की पत्नी ने जो शपथ पत्र कोर्ट की प्रक्रिया में वकील के माध्यम से लगाया है, उसमें निगम के पूर्व बड़े अफसरों के अलावा पुलिस के अफसर व थाना प्रभारी एमजी रोड पर भी आरोप लगाए हैं कि सभी ने मिलकर षड्यंत्रपूर्वक मेरे पति को घोटाले का मास्टरमाइंड बनाया है। मेयर इन काउंसिल और प्रेसीडेंट इन काउंसिल के वित्तीय अधिकारों संबंधी नियम 5 का हवाला देकर बताया कि निगमायुक्त को 2 करोड़ के कार्यों की स्वीकृति व भुगतान के अधिकार हैं।
इस घोटालें में लगी फाइलों, बिलों की कॉपियाें से स्पष्ट होता है कि तत्कालीन निगमायुक्त, तत्कालीन अपर आयुक्त के सुपर विजन में ही करोड़ों के बिल पास किए गए हैं। इसलिए सिर्फ मेरे पति ही इस घोटाले के मास्टरमाइंड कैसे हो सकते हैं।
उन्होंने ये भी उल्लेख किया है कि 2 करोड़ से ऊपर के भुगतानों में अपर आयुक्त रहे तत्कालीन अधिकारियों ने ही बिल को लेखा शाखा से पास करवाया है। कई अन्य फर्मों के नामों का जिक्र कर उन्हें करोड़ों के भुगतान की राशियों का भी उल्लेख कर बड़े अफसरों को घेरा है। घोटाले में पहली एफआईआर दर्ज करवाने वाले सुनील गुप्ता पर भी घोटाले का करोड़ों रुपया अधिकारियों तक पहुंचाने व खुद रखने के आरोप शपथ पत्र में लगाए हैं।