कोरोना -क्या हर्ड इम्यूनिटी भारत में संभव है?

पिछले दिनों ‘हर्ड इम्यूनिटी’ को लेकर खूब चर्चा हुई थी। ऐसे में यह सवाल बहुत जरूरी बन जाता है कि आखिर कोरोना से बचाने में ‘हर्ड इम्यूनिटी’ कितनी कारगर हो सकती है और क्या भारत में यह संभव है? पिछले महीने स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन ने इसको लेकर एक बयान दिया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत अभी हर्ड इम्यूनिटी से काफी दूर है।

हर्ड इम्यूनिटी क्या है और कब बनती है उसकी स्थिति?

अगर कोई बीमारी, जैसे कोरोना को ही मान लें कि वह देश की पूरी आबादी के बड़े हिस्से में फैल जाती है और इंसान की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी उसके संक्रमण को बढ़ने से रोकने में मदद करती है तो जो लोग उसके संक्रमण से पूरी तरह ठीक हो जाते हैं, उनमें वायरस के खिलाफ प्रतिरक्षात्मक गुण विकसित हो जाते हैं। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन के मुताबिक, किसी भी जनसंख्या में हर्ड इम्यूनिटी की स्थिति तब बनती है जब उस जनसंख्या के 60 से 70 फीसदी लोगों में बीमारी फैल जाती है। इससे बाकी बचे 30 से 40 फीसदी लोगों सुरक्षा मिल जाती है, जो संक्रमित नहीं हुए हैं।

 

हर्ड इम्यूनिटी की जांच के लिए कराया जा रहा सीरो सर्वे:-भारत में हर्ड इम्यूनिटी की स्थिति की जांच के लिए सीरो सर्वे कराया जा रहा है। दिल्ली में अब तक तीन सीरो सर्वे किए जा चुके हैं। पहले सर्वे में करीब 23 फीसदी लोगों में कोरोना के खिलाफ एंटीबॉडी मिली थी जबकि दूसरे में 29 फीसदी लोगों में एंटीबॉडी मिली थी। वहीं तीसरे सर्वे 25 फीसदी लोगों में एंटीबॉडी मिली है। माना जा रहा है कि 15 अक्तूबर से चौथा सीरो सर्वे किया जाएगा।

हर्ड इम्यूनिटी से कैसे वायरस को रोकना मुमकिन है?

दरअसल, वायरस जब भी दूसरे के शरीर में संक्रमण पैदा करने के लिए तैयार होता है, तो वह पहले से ही संक्रमित होता है यानी उसके पास पहले से ही वायरस के खिलाफ इम्यूनिटी रहती है। ऐसे में वायरस के प्रसार का जो चेन होता है, वह टूट जाता है। इसी से वायरस को रोकना मुमकिन हो पाता है।

 

फिलहाल वैक्सीन का इंतजार ही सबसे उत्तम :-वैज्ञानिक मानते हैं कि हर्ड इम्यूनिटी के बजाय वैक्सीन का इंतजार ही सबसे उत्तम है, क्योंकि उससे कुदरती रूप से शरीर को सुरक्षा मिलती है जबकि हर्ड इम्यूनिटी कुदरती रूप से बीमारी से नहीं बचाता बल्कि इसमें वायरस से बचने के लिए लोगों को दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता है।

 

जब तक वैक्सीन नहीं आती, तब तक क्या करें?

फिलहाल वैक्सीन बनाने का काम तेजी से चल रहा है। माना जा रहा है कि इस साल के अंत तक या अगले साल कई वैक्सीन बाजार में लॉन्च हो सकती हैं। हालांकि जब तक वैक्सीन नहीं आ जाती, तब तक कोरोना वायरस से प्रति सावधानी बरतना ही उससे बचाव का एकमात्र उपाय है। इसलिए आप नियमित तौर पर हाथों को साबुन-पानी से धोते रहें, मास्क पहनें और सामाजिक दूरी का पालन करें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *