कहीं यह ट्रंप और उनकी टीम का पागलपन तो नहीं…
राष्ट्रपति पद पर अपने दूसरे कार्यकाल में डोनाल्ड ट्रंप और उनकी टीम पागलपन के दौर से गुजर रही है। और कहा जाए तो ट्रंप का पागलपन एक बार तब देखने को मिला था, जब राष्ट्रपति का चुनाव हारने के बाद उनकी पागलपन भरी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही थीं। ऐसे लग रहा था कि व्हाइट हाउस छोड़ने को ट्रंप राजी नहीं हैं और उनका वश चलता तो व्हाइट हाउस में वह निर्वाचित तत्कालीन राष्ट्रपति ‘जो’ को दूर से ही ‘गो बैक’ कहकर बैरंग लौटा देते। खैर समय गुजरा और ट्रंप को दूसरी बार व्हाइट हाउस में एंट्री मिल गई है। जब से एंट्री मिली है, तब से नए तरह का पागलपन दुनिया देख रही है। पहले अमेरिका ने दूसरे देशों को दी जाने वाली सहायता राशि पर जोर का चाबुक चला दिया। फिर अवैध प्रवासियों को हाथ-पैर में हथकड़ी लगाकर वापस उनके देश भेजना। रूस के खिलाफ युद्ध विराम करने के लिए यूक्रेन के राष्ट्रपति को बेइज्जत करना। और अब टैरिफ वार शुरू करना। सिलसिला थम नहीं रहा है। और लग रहा है कि अबकी बार अमेरिका को बैकफुट पर डंप करने की तैयारी ट्रंप और उनकी टीम कर चुकी है।
ताजा खबर यही है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी कांग्रेस को संबोधित करते हुए कहा, “हमारे खिलाफ दशकों से टैरिफ का इस्तेमाल किया जा रहा है। अब हमारी बारी है। भारत जैसे देश हमारी कारों पर 100% से ज्यादा टैरिफ लगाते हैं, यह बिल्कुल अनुचित है।” उन्होंने यह भी कहा कि 2 अप्रैल से यह नई व्यवस्था लागू होगी, जिसमें अमेरिका भी अन्य देशों के उत्पादों पर उसी तरह के शुल्क लगाएगा, जैसे वे देश अमेरिकी उत्पादों पर लगाते हैं। अब तक भारत ट्रंप के टैरिफ के निशाने से बचा हुआ था, लेकिन अब यह बदलने वाला हैं। ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स और डॉयचे बैंक के विश्लेषकों का मानना है कि भारत और अमेरिका के बीच टैरिफ का अंतर इतना ज्यादा है कि भारत को इसकी सबसे ज्यादा मार झेलनी पड़ सकती है। मॉर्गन स्टैनली के विश्लेषक चेतन अह्या के अनुसार, भारत और थाईलैंड जैसे एशियाई देशों पर 4 से 6 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैरिफ लग सकता है। इकॉनमिस्क टाइम्स ने इसे लेकर एक विस्तृत रिपोर्ट छापी है। असर जो होगा सो होगा, पर ज्यादा संभावना यही है कि अमेरिका ट्रंप और उनकी टीम के फैसलों से बौना ही साबित होने वाला है।
अमेरिकी कांग्रेस में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रिपब्लिकन सेनेटर्स के “यूएसए-यूएसए” नारों के बीच सबसे पहली बात कही- अमेरिका इज बैक। व्हाइट हाउस में लौटने के बाद उनका यह पहला ऐसा संबोधन है। यहां वो अपने दूसरे कार्यकाल के दृष्टिकोण को सामने रख रहे हैं, जिसने पहले ही अमेरिका की घरेलू और विदेश नीति, दोनों को नाटकीय रूप से बदला है। कांग्रेस में डोनाल्ड ट्रंप के संबोधन का विषय “अमेरिकी सपने का नवीनीकरण (रिन्यूअल)” है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संसद के दोनों सदनों को संबोधित करते हुए दावा किया कि अमेरिका ने अपनी खोई हुई ताकत फिर से हासिल कर ली है। उन्होंने कहा कि अमेरिका की वापसी हो चुकी है और यह एक बार फिर अपनी पुरानी गति पर लौट आया है। हमें हालिया चुनाव में ऐतिहासिक जनादेश प्राप्त हुआ है। अमेरिका अब पूरी तरह से वापस आ गया है। ट्रंप ने अपने कार्यकाल के पहले महीने को ऐतिहासिक रूप से सबसे सफल बताते हुए कहा कि उन्होंने 100 कार्यकारी आदेशों (एग्जिक्युटिव ऑर्डर) पर हस्ताक्षर किए हैं और जनता द्वारा चुने गए कार्यों को ही पूरा करने पर ध्यान दे रहे हैं।
सीमा सुरक्षा पर जोर देते हुए ट्रंप ने कहा कि अवैध घुसपैठ को रोकने के लिए सीमा पर सेना तैनात की गई है, जिसके परिणामस्वरूप उनके कार्यकाल में यह संख्या अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। उन्होंने दावा किया, “जो लोग अवैध रूप से घुसपैठ करते थे, उन्होंने मेरी बात सुनी और अब वे नहीं आ रहे।” पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन पर निशाना साधते हुए ट्रंप ने कहा कि बाइडेन के कार्यकाल में अवैध घुसपैठ चरम पर थी और वे अब तक के सबसे अक्षम राष्ट्रपति साबित हुए.
यूक्रेन को झटका देने के बाद यूएसए ऐसी रणनीति पर विचार कर रहा है, जो यूरोप के साथ-साथ पूरी दुनिया को हिला देगी। अमेरिका नाटो और वर्ल्ड बैंक छोड़ने पर विचार कर रहा है। अमेरिकी इन्फ्लुएंसर गुंथर इगलमेन ने लिखा- अब समय आ गया है कि अमेरिका, नाटो, वर्ल्ड बैंक छोड़ दे। अमेरिका को यूएन भी छोड़ देना चाहिए। इससे पहले मस्क भी नाटो को छोड़ने की सलाह दे चुके हैं। मस्क का कहना था कि इससे केवल यूरोप को लाभ होता है। गौरतलब है कि यूक्रेन मामले में यूरोप ने अमेरिका को आइना दिखा दिया है। और यह दम भी भरा है कि यूरोप नाटो जैसा दूसरा संगठन बनाकर अमेरिका से किनारा कर ले। उधर टैरिफ वार से चीन भी अमेरिका को मुंह तोड़ जवाब देने की तैयारी कर रहा है।
तो ट्रंप और उनकी टीम की थीम है कि “अमेरिकी सपने का नवीनीकरण (रिन्यूअल) है।” और यह बात कि यूक्रेन को झटका देने के बाद यूएसए ऐसी रणनीति पर विचार कर रहा है, जो यूरोप के साथ-साथ पूरी दुनिया को हिला देगी। तो रिपब्लिकन सीनेटर्स कह रहे हैं कि अमेरिका इज बैक। तो दूसरा पक्ष यह भी है कि सपने का नवीनीकरण कहीं अमेरिका को सपनों की दुनिया में तो नहीं धकेल देगा? और पूरी दुनिया को हिलाने के चक्कर में कहीं अमेरिका खुद तो नहीं हिल जाएगा? और अमेरिका इज बैक की जगह कहीं अमेरिका बैकफुट पर जाने की तैयारी तो नहीं कर रहा है? खैर जो भी हो, पर यह अंदेशा तो है कि अब दुनिया में नए पावर सेंटर्स बनने का दौर शुरू हो रहा है और इसका फायदा भारत को मिलने की पूरी संभावना है। क्योंकि दूसरी पारी में ट्रंप और उनकी टीम के फैसले यह सोचने को मजबूर कर रहे हैं कि ‘कहीं यह ट्रंप और उनकी टीम का पागलपन तो नहीं…।’
कौशल किशोर चतुर्वेदी
कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। दो पुस्तकों “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।
वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।