लगता है कि ममता के अच्छे दिन जाने वाले हैं… कौशल किशोर चतुर्वेदी

लगता है कि ममता के अच्छे दिन जाने वाले हैं…
आई-पैक रेड मामले में ईडी अफसरों के सामने शेरनी बनकर पहुँची पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के अच्छे दिन लगता है अब जाने वाले हैं। सुप्रीम कोर्ट ने जिस तरह की टिप्पणी की है,
उससे ममता का भविष्य संकट में नजर आ रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने ईडी की याचिका पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को नोटिस जारी किया है। आई-पैक के परिसर पर छापे के दौरान कथित रूप से दख़ल देने को लेकर ईडी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।
इस याचिका पर सर्वोच्च अदालत ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और डीजीपी, पुलिस कमिश्नर और डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस समेत राज्य प्रशासन के अधिकारियों को नोटिस जारी किया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि आई-पैक के परिसर में जांच के दौरान मुख्यमंत्री और राज्य अधिकारियों ने जबरन दखल दिया और ईडी की जांच में रुकावट डाली। अदालत ने निर्देश दिया कि प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया जाए। दो हफ्ते के भीतर काउंटर हलफनामा दाखिल किया जाए। मामले को तीन फरवरी 2026 को सूचीबद्ध किया जाए। इस बीच निर्देश दिया जाता है कि प्रतिवादी, यानी पश्चिम बंगाल सरकार, आई-पैक और आसपास के इलाकों की फुटेज वाले सभी सीसीटीवी कैमरों को सुरक्षित रखे। जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस विपुल पंचोली की पीठ ने आई-पैक में जांच के लिए पहुंचे ईडी अधिकारियों के खिलाफ पश्चिम बंगाल पुलिस की ओर से दर्ज एफआईआर पर भी रोक लगा दी है।
तो सुप्रीम कोर्ट में पहली सुनवाई और दिशा निर्देश यह साफ बयाँ कर रहे हैं कि ममता बनर्जी और पश्चिम बंगाल सरकार इस पूरे मामले में बैकफुट पर है। ईडी अफसरों की कार्रवाई में दखल ममता बनर्जी पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।। जिस तरह ममता बनर्जी का कहना था कि ईडी अफसरों का टारगेट उनकी चुनावी रणनीति में भेद लगाना था। ममता की इस बात को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता लेकिन फिर भी जब ईडी दरवाजे पर पहुंच ही गई थी तब मुख्यमंत्री के नाते ममता की दबंगई को कतई स्वीकार भी नहीं किया जा सकता है। इस पूरे मामले में अगर यह मान भी लिया जाए कि केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा गठबंधन और मोदी-शाह की मंशा के अनुरूप ईडी ने कार्रवाई की योजना बनाई है। तब भी ईडी की राह में कानून को ताक पर रखकर बाधा नहीं डाली जा सकती है। अगर मोदी- शाह का उद्देश्य
राजनैतिक लाभ लेना भी है, तब भी
ईडी की कार्रवाई में संवैधानिक तौर तरीकों के आधार पर ही रुकावट डालने की सोच पर आगे बढ़ा जा सकता था। पर ममता शायद यह मानकर बैठी थी कि पश्चिम बंगाल में वह जो चाहे वह करने को स्वतंत्र हैं। पर लगता है अब इसका बड़ा खामियाजा भुगतने के लिए ममता को तैयार रहना पड़ेगा। और इसका सीधा असर ममता के पश्चिम बंगाल में चौथी बार सिंहासन पर बैठने के इरादे पर संकट के रूप में सामने दिख सकता है। ईडी ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर दस्तावेजों की चोरी के आरोप लगाए थे। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान ईडी की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि था इस मामले में मुख्यमंत्री स्वयं आरोपी हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के बाद आदेश देते हुए कहा कि जांच एजेंसी की काम में पुलिस की दखल का मामला गंभीर है। कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार और बंगाल पुलिस को जवाब देने के लिए नोटिस जारी किया। कोर्ट ने दो हफ्ते के अंदर जवाब मांगा है। साथ ही, ईडी के छापे से जुड़ी सभी सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने का आदेश दिया है। अब इस मामले की सुनवाई 3 फरवरी को होगी। ईडी ने आरोप लगाए थे कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दस्तावेजों की चोरी की है। पश्चिम बंगाल के डीजीपी ने सहयोगी की भूमिका निभाई। स्थानीय पुलिस को छापेमारी की जानकारी दी गई थी, लेकिन मुख्यमंत्री ने गैरकानूनी तरीके से छापे की जगह पहुंचकर दस्तावेजों की चोरी की। उन्होंने मांग की कि कोर्ट को ऐसा आदेश देना चाहिए ताकि जांच में बाधा डालने वाले अधिकारियों के लिए एक नजीर बन सके। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट में ईडी का पक्ष रखते हुए कहा कि छापेमारी के बीच मुख्यमंत्री परिसर में घुसीं और कानून-व्यवस्था का उल्लंघन करते हुए उन्होंने सभी डिजिटल डिवाइस और तीन आपत्तिजनक दस्तावेज अपने कब्जे में लिए और दोपहर 12:15 बजे चली गईं। सीएम समेत सभी की हिम्मत कैसे हुई कि वे जांच से जुड़े दस्तावेज अपने साथ चोरी करके ले गए। एएसजी एसवी राजू ने मामले में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ एफआईआर की मांग की। उन्होंने कहा कि सिर्फ एक संज्ञेय अपराध का होना जरूरी है।एफआईआर के लिए संज्ञेय अपराध का प्रथम दृष्टया मामला ही काफी है। यह चोरी और लूट का मामला है।
कुल मिलाकर पश्चिम बंगाल का रण अब ममता की विजय पर संशय पैदा कर रहा है। ममता अगर खुद ईडी अफसरों के सामने न जाकर नौकरशाही को चेहरा बनने देतीं, तब भी स्थितियाँ नियंत्रण में मानी जा सकती थीं। पर अब स्थितियाँ ‘विनाश काले विपरीत बुद्धि’ की तरफ इशारा कर रही हैं। अगर ईडी की कार्रवाई को ममता पर जाल फैलाने वाला भी माना जाए तो भी ममता ने खुद को जाल के मायाजाल में उलझा दिया है। देखते हैं अब आगे क्या होता है। पर सारी स्थितियाँ यही इशारा कर रही हैं कि लगता है ममता के अच्छे दिन जाने वाले हैं… और पश्चिम बंगाल में चौथी बार ममता सरकार बनने की संभावनाएँ धूमिल हो सकती हैं।

कौशल किशोर चतुर्वेदी

कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश‌ संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं

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