
श्राद्ध के समय करें ये उपाय , पितृ होंगे प्रसन्न तो मिलेगा आशीर्वाद , नही भूले पंचबली भोग लगाना साथ जानिए किस तिथि पर आएगा कौन सा श्राद्ध( डाँ. अशोक शास्त्री )
हिंदू धर्म में श्राद्ध का काफी महत्व है । इस साल 20 सितंबर से श्राद्ध या पितृ पक्ष की शुरुआत हो रही है । पितृ पक्ष में पितरों की आत्मा की संतुष्टि के लिए श्राद्ध और तर्पण किया जाता है , जिससे पितर प्रसन्न होकर अपनी संतान को आर्शीवाद देते हैं । हिंदू धर्म में श्राद्ध को जरूरी माना जाता है । इस संदर्भ मे मालवा के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य डाँ. अशोक शास्त्री ने एक विशेष मुलाकात मे बताया की ऐसा माना जाता है कि अगर मरने के बाद व्यक्ति का श्राद्ध न किया जाए , तो मृत व्यक्ति की आत्मा को शांति नहीं मिलती । कहते है श्राद्ध मे पंचबली भोग का कर्म हर किसी को करना जरुरी होता है । अगर श्राद्ध मे पंचबली भोग नही लगाया तो पितृ नाराज होकर भूखे चले जाते है और ऐसे मे आत्मा भूखी रह जाएगी । डाँ. शास्त्री ने कहा की ऐसी मान्यता है कि पंचबली भोग से प्रसन्न होकर पितर अपने वंशज को बहुत आशिर्वाद देते है । हमारे पितृ कई प्रकार के होते हैं । एक जिन्हें मरने के बाद दूसरा जन्म मिल जाता है और बहुतों ने पितृलोक में स्थान प्राप्त कर लिया । जो पितर पितृलोक में स्थान प्राप्त कर चुके हैं वो हर साल पितृ पक्ष में अपने वंशजों को देखने आते हैं । और उस वक्त वे उन्हें आर्शीवाद या श्राप देकर चले जाते हैं । ऐसे में पितरों का आर्शीवाद पाने और उन्हें प्रसन्न करने के लिए इन उपायों को ध्यान रखना जरूरी है ।
1. श्राद्ध पक्ष में श्राद्ध कर्म अच्छे से करने चाहिए । श्राद्ध के दिनों में नियमित हनुमान चालीसा का पाठ करें । साथ ही गरीबों या जरूरतमंदों को दान दें ।
2. पितृ पक्ष मे तिलों को बहुत महत्वपूर्ण माना गया है । कहा जाता है कि तिल की उत्पत्ति भगवान विष्णु के पसीने से हुई है । साथ ही ये भी मान्यता है कि इनसे श्राद्ध करने पर पितरों की आत्मा को संतुष्टि मिलती है ।
3. पितृ पक्ष के दौरान तिल के साथ चावल का प्रयोग भी जरुरी होता है । कहा जाता है कि पितरों के लिए सबसे प्रथम भोज चावल ही होता है । चावल को मिलाकर ही पिंड बनाये जाते है । धार्मिक मान्यतानुसार चावल से बने पिंड से पितर लंबे समय तक संतुष्ट रहते है ।
4. पितृ पक्ष के दौरान कौवों और चीटियों को प्रतिदिन खाना डालना चाहिए । मान्यता है कि हमारे पूर्वज कौवों के रुप मे धरती पर आते है । केसर और चंदन का टीका लगवाना चाहिए । हो सके तो घर का वास्तु भी ठीक करवाना चाहिए ।
5. पितृ पक्ष के प्रथम दिन से पितरों को जल अर्पित करना चाहिए । जल मे जौ , काले तिल और एक लाल फूल डालकर दिन के समय दक्षिण दिशा की ओर मुंह करके देना चाहिए । कहा जाता है कि इससे पितर प्रसन्न होते है । साथ ही इससे पितृ दोष भी दूर होता है ।
6. पितृ पक्ष मे गरीब , विधवा , और अपंग महिला को दान देने का भी महत्व है ।
7. श्राद्ध के दौरान तेरस , चौदस , अमावस्या और पूर्णिमा के दिन गुड – घी की धूप दे ।
8. इस दौरान मांस – मदिरा से दूर रहे और महिलाओं का सम्मान करे ।
9. पितृ पक्ष के दौरान गुरु ग्रह के उपाय करना चाहिए ।
ज्योतिषाचार्य डाँ. अशोक शास्त्री के अनुसार पितृ पक्ष में पंचबली भोग का कर्म हर किसी को अपने पितरों के लिए करना जरूरी होता है ।
पितृ पक्ष में पतिरों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध और तर्पण किया जाता है । डाँ. शास्त्री कहते हैं कि पितृ पक्ष में पंचबली भोग का कर्म हर किसी को अपने पितरों के लिए करना जरूरी होता है । अगर श्राद्ध के दिनों में पंचबली भोग नहीं लगाया तो पितर नाराज होकर भूखे चले जाएंगे । और ऐसे में आत्मा भूखी रह जाएगी । ऐसी मान्यता है कि पंचबली भोग से प्रसन्न होकर पितर अपने वंशजों को खूब आर्शीवाद देते हैं ।
क्या होता है पंचबली भोग
धार्मिक मान्यता है कि पितृ पक्ष में पितरों के साथ 5 विशेष प्राणियों को श्राद्ध का भोजन कराए जाने का नियम है । ज्योतिषाचार्य डाँ. अशोक शास्त्री कहते हैं कि अगर पितृ पक्ष में इन्हें भोजन कराया जाता है , तो पितर इनके द्वारा खाए अन्न से तृप्त हो जाते हैं । इनमें वो 5 जीव हैं –
1. गौ बलि – पितृ पक्ष में पहला भोग पवित्रता की प्रतीक गौ माता को खिलाना चाहिए । गौ माता के भोग लगाते समय मंत्र का स्मरण करना चाहिए ।
2. कुक्कुर बलि – शास्त्रों में वर्णन है कि पितरों का श्राद्ध करते समय दूसरा भोग कुक्कर यानि कुत्ते को खिलाना चाहिए । कुक्कर को कत्तर्व्यष्ठा का प्रतीक माना जाता है ।
3. काक बलि – पंचबली में तीसरा भोग काक यानि कौआ को लगाया जाता है । इनके अन्न खाने से पित्र तृप्त हो जाते हैं ।
4. देव बलि – चौथा भोग देवत्व संवधर्क शक्तियों को लगाया जाता है । (इसके लिए ये भोग छोटी कन्या या किसी गाय को खिलाया जा सकता है)
5. पिपीलिकादि बलि – पंचबली में पांचवां भोग चीटियों को लगाया जाता है । ये चीटियां श्रमनिष्ठा और सामूहिकता का प्रतीक हैं ।
कैसे लगाते हैं पंचबली
हर योनि में संव्याप्त जीव चेतना की तुष्टि हेतु भूतयज्ञ किया जाता है । पंचबली भोग लगाने के लिए 5 केले के पत्ते या एक बड़ा पत्तल लें । उसमें 5 जगह भोजन रखें । भोजन में उड़द की दाल की टिक्की और दही रखें । इन्हें पांच हिस्सों में बांट दें और पंचबली भोग गौ , कुत्ता, कौआ , देव और चीटियों को खिला दें । इन सभी जीवों का मंत्र बोलते हुए अक्षत छोड़ते हुए पंचबली समर्पित करें ।
ज्योतिषाचार्य डाँ. अशोक शास्त्री के अनुसार हर साल भाद्रपद मास की पूर्णिमा तिथि से आश्विन मास की अमावस्या यानी 16 दिनों तक मनाया जाता है । पितरों की आत्मा की शांति के लिए भाद्रपद शुक्लपक्ष की पूर्णिमा से आश्विन मास की अमावस्या तक श्राद्ध कर्म किए जाते हैं । धार्मिक मान्यताओं के अनुसार , इस दौरान गाय , कुत्तों और कौवों के साथ चीटियों को भोजन खिलाते हैं । मान्यता है कि ऐसा करने से पितर प्रसन्न होते हैं और सुख – शांति और खुशहाली का आशीर्वाद प्रदान करते हैं ।
डाँ. अशोक शास्त्री के अनुसार इस साल पितृ पक्ष 20 सितंबर से प्रारंभ हो रहे हैं और यह 6 अक्टूबर को अमावस्या तिथि पर समाप्त होंगे ।
पितृ पक्ष 2021 की श्राद्ध की तिथियां
पहले दिन: पूर्णिमा श्राद्ध: 20 सितंबर (सोमवार) 2021
दूसरे दिन: प्रतिपदा श्राद्ध: 21 सितंबर (मंगलवार) 2021
तीसरे दिन: द्वितीय श्राद्ध: 22 सितंबर (बुधवार) 2021
चौथा दिन: तृतीया श्राद्ध: 23 सितंबर (गुरूवार) 2021
पांचवां दिन: चतुर्थी श्राद्ध: 24 सितंबर (शुक्रवार) 2021
महाभरणी श्राद्ध: 24 सितंबर (शुक्रवार) 2021
छठा दिन: पंचमी श्राद्ध: 25 सितंबर (शनिवार) 2021
सातवां दिन: षष्ठी श्राद्ध: 27 सितंबर (सोमवार) 2021
आठवां दिन: सप्तमी श्राद्ध: 28 सितंबर (मंगलवार) 2021
नौवा दिन: अष्टमी श्राद्ध: 29 सितंबर (बुधवार) 2021
दसवां दिन: नवमी श्राद्ध (मातृनवमी): 30 सितंबर (गुरूवार) 2021
ग्यारहवां दिन: दशमी श्राद्ध: 01 अक्टूबर (शुक्रवार) 2021
बारहवां दिन: एकादशी श्राद्ध: 02 अक्टूबर (शनिवार) 2021
तेरहवां दिन: द्वादशी श्राद्ध , संन्यासी , यति , वैष्णवजनों का श्राद्ध: 03 अक्टूबर 2021
चौदहवां दिन: त्रयोदशी श्राद्ध: 04 अक्टूबर (रविवार) 2021
पंद्रहवां दिन: चतुर्दशी श्राद्ध: 05 अक्टूबर (सोमवार) 2021
सोलहवां दिन: अमावस्या श्राद्ध , अज्ञात तिथि पितृ श्राद्ध , सर्वपितृ अमावस्या समापन – 06 अक्टूबर (मंगलवार) 2021
ज्योतिषाचार्य
डाँ. पं. अशोक नारायण शास्त्री
श्रीमंगलप्रद् ज्योतिष कार्यालय
245 , एम. जी. रोड ( आनंद चौपाटी ) धार , एम. पी.
मो. नं. 9425491351
–: शुभम् भवतु :–